फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Unnao News ›   Dialysis machines spoiled, patient upset

डायलिसिस मशीनें खराब, मरीज परेशान

Thu, 27 Aug 2020 12:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2020 12:36 AM IST
विज्ञापन
Dialysis machines spoiled, patient upset
???? ??????? ?? ???????? ????? ??? ???? ??? ????? - फोटो : UNNAO
उन्नाव। जिला अस्पताल के डायलिसिस वार्ड की दो मशीनें खराब होने से मरीजों की समस्या बढ़ गई है। उनकी पूरी डायलिसिस नहीं हो पा रही है। स्थिति यह है कि एक दिन में सिर्फ 5 मरीजों का ही रक्तशोधन हो पा रहा है। मशीन खराब होने से अस्पताल आ रहे मरीजों को रातभर रुककर अपनी बारी का इंतजार करना मजबूरी बन गया है।
विज्ञापन

खानपान सही न होने से अधिकतर लोगों के गुर्दे खराब हो रहे हैं। इससे उन्हें जीवित रहने के लिए डायलिसिस का सहारा लेना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा होने से मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। रोजाना चार से पांच मरीज डायलिसिस के लिए आ रहे हैं। जिला अस्पताल में कहने को तो पांच मशीनें लगी हुई हैं लेकिन, उसमें दो मशीनें खराब हैं। जबकि यहां जिले के अलावा दूसरे जिलों से लोग आकर डायलिसिस करा रहे हैं। ऐसे में मरीज परेशान हैं। गंभीर मरीज आने पर स्टाफ पहले उन्हें प्राथमिकता देता है और नंबर वाले मरीज को रोक देता है। ऐसे में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। मरीजों का आरोप है कि बेड पर जो चादर पड़े होते हैं वह भी नहीं बदले जा रहे। इससे इंफेक्शन का भी खतरा बना रहता है।
विज्ञापन

सीएमएस बोले
सीएमएस बीबी भट्ट ने बताया कि पांच मशीनों में चार नार्मल मरीजों के लिए हैं जबकि पांचवीं एचआईवी पीड़ित के लिए है। नॉर्मल मरीजों की डायलिसिस करने वाली मशीनों में दो खराब है। इसकी सूचना शासन को भेजी गई है। जल्द ही बनवाई जाएगी। चादर न बदले जाने पर उनका कहना था वह बदलवाई जाती हैं। फिर भी यदि शिकायत है तो उसे दिखवाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

समय घटाकर दो घंटे ही हो रही डायलिसिस
पांच मशीनों में दो मशीनें खराब होने से तीन शिफ्टों में सिर्फ 5 मरीजों की ही डायलिसिस हो पा रही है। जबकि रोजाना करीब 15 मरीज इसके लिए आ रहे हैं। एक बार प्रक्रिया पूरी होने के तीन दिन बाद उसी मरीज को दोबारा बुलाया जाता है। डायलिसिस में एक तरफ मरीज का खून फिल्टर होता रहता है और दूसरी ओर चढ़ता रहता है। ऐसे में एक मरीज की डायलिसिस में तीन से चार घंटे का समय लगता है। मशीनें खराब होने से समय घटाकर दो घंटे ही डायलिसिस की जा रही है।

कोविड मरीजों के बाद अब सामान्य मरीज भी बेहाल
जिले में कोविड मरीजों को डायलिसिस के लिए तो परेशानी उठानी ही पड़ रही थी। अब सामान्य मरीज भी परेशान हैं। डायलिसिस समय पर न होने से वह भी लखनऊ, कानपुर के चक्कर लगा रहे हैं। वहां भी कोविड जांच के बिना कोई भी डायलिसिस करने को तैयार नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed