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दान, धर्म, सत्कर्म से मिलती शांति
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रामकथा सुनाती कथावाचिका शिवानी शुक्ला। संवाद
- फोटो : UNNAO
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अचलगंज। पचोड्डा स्थित बालाजी मंदिर के वार्षिकोत्सव पर चल रही रामकथा में भक्तों को अहंकार से दूर रहने की सीख दी गई। बताया कि दान, धर्म, सत्कर्म व ईश्वर की उपासना करने से मन को शांति मिलती है
कथा वाचिका शिवानी शुक्ला ने कहा कि नारद को भी अहंकार हो गया था कि उनसे बड़ा कोई भक्त नहीं है। इसलिए भगवान नारायण ने माया के सहयोग से उन्हें वास्तविकता से परिचत कराया। व्यक्ति यदि समाज के हित में कार्य करता है तो कुर्सी पर बैठे व्यक्ति को भय होने लगता है कि कहीं मेरी सत्ता न हथिया ले। वह उसको गिराने के लिए कई तरह के गलत काम करता है। यही भय इंद्र को भी हो गया था जब नारद मुनि ने श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए तप करना शुरू किया।
उन्होंने कहा कि जिस पर भगवत कृपा होती है उसका कोई बाल बांका नहीं कर सकता। इस दौरान कथावाचिका ने संगीतमय भजन सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। आचार्यों द्वारा मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक किया। प्रधान शंकर दयाल अग्निहोत्री, रौनक मिश्र, राजकुमार सिंह, रामबाबू तिवारी, सोनू तिवारी, बीनू शुक्ल, रज्जन पांडेय, मोनू द्विवेदी, सचिन सविता मौजूद रहे।
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कथा वाचिका शिवानी शुक्ला ने कहा कि नारद को भी अहंकार हो गया था कि उनसे बड़ा कोई भक्त नहीं है। इसलिए भगवान नारायण ने माया के सहयोग से उन्हें वास्तविकता से परिचत कराया। व्यक्ति यदि समाज के हित में कार्य करता है तो कुर्सी पर बैठे व्यक्ति को भय होने लगता है कि कहीं मेरी सत्ता न हथिया ले। वह उसको गिराने के लिए कई तरह के गलत काम करता है। यही भय इंद्र को भी हो गया था जब नारद मुनि ने श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए तप करना शुरू किया।
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उन्होंने कहा कि जिस पर भगवत कृपा होती है उसका कोई बाल बांका नहीं कर सकता। इस दौरान कथावाचिका ने संगीतमय भजन सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। आचार्यों द्वारा मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक किया। प्रधान शंकर दयाल अग्निहोत्री, रौनक मिश्र, राजकुमार सिंह, रामबाबू तिवारी, सोनू तिवारी, बीनू शुक्ल, रज्जन पांडेय, मोनू द्विवेदी, सचिन सविता मौजूद रहे।
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