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रघुकुल रीति सदा चल आई, प्राण जाएं पर वचन न जाई

Tue, 19 Oct 2021 12:18 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 Oct 2021 12:18 AM IST
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दोस्तीनगर में अयोजित रामलीला में लक्ष्मण शक्ति लीला में विलाप करते श्रीराम। संवाद - फोटो : UNNAO
उन्नाव। साकेतधाम में चल रही सुबह नंद महोत्सव मनाया गया। गोकुल वासी नंदबाबा को बधाइयां देते हुए भाव विभोर हो गए। कृष्ण की बाल लीलाओं के बीच पूतना राक्षसी का वध होता है। शाम को रामलीला का मंचन हुआ। राम वनगमन से पंचवटी तक लीलाओं का मंचन हुआ।
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रामलीला मंचन में मंथरा के उकसाने पर कैकेयी राजा दशरथ से राम को वनवास और भरत को राजगद्दी का वचन लेती हैं। ‘रघुकुल रीति सदा चलि आई, प्राण जाहिं पर वचन न जाई’ को सिद्ध करने के लिए राम वन को निकलते हैं। सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ चले जाते हैं। इस अपार दुख से व्यथित हो दशरथ विलाप करते हुए अपने प्राण त्यागते हैं। रास्ते में राम गौतम ऋषि के श्राप से सिला बनी अहिल्या का उद्धार करते हैं। नदी के तट पर श्रीराम जी केवट से नदी पार कराने का आग्रह करते हुए उतराई देने लगते हैं तो केवट हाथ जोड़कर कहते हैं कि प्रभु आपके और मेरे काम में समानता है तो मैं उतराई नहीं ले सकता। आज मैं आपको पार उतारूंगा लेकिन जब आप के पास मैं आऊंगा तो आप भी मुझे भव सागर पार कराइएगा। वन में पंचवटी में आश्रम बनाकर राम, सीता वलक्ष्मण जीवन यापन करने लगते हैं। रावण की बहन सूपर्नखा मोहिनी रूप धर कर राम और लक्ष्मण से विवाह का प्रस्ताव रखते हुए जब अधिक परेशान करती है तो लक्ष्मण सूपर्नखा की नाक काट देते हैं। क्रोधित सूर्पनखा बदला लेने की चेतावनी देती हैं।
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शहर के दोस्तीनगर में चल रहे रामलीला महोत्सव में दूसरे दिन स्थानीय कलाकारों ने अंगद रावण संवाद, मेघनाथ वध, कुंभकरण वध, अहि रावण व रावण वध का मंचन किया।
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मेला प्रबंधक वीरेंद्र सिंह ने राम लक्ष्मण की आरती उतारी। उसके बाद लीला का मंचन शुरू हुआ। कार्यक्रम में पहुंचे भाजपा नेता शशांक शेखर सिंह ने राम, लक्ष्मण, हनुमान व अंगद को माला पहनाई। देर रात तक लीलाओं का मंचन हुआ। मेला प्रबंधक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि हर साल की भांति इस साल भी कार्यक्रम सकुशल हुआ। इस दौरान मेला संरक्षक रणजीत सिंह, महामंत्री उमाशंकर अवस्थी, राधे रावत, रामकुमार रैदास मौजूद रहे।
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