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शातिर अपराधी राजेंद्र लोध गिरफ्तार
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
Updated Mon, 22 Aug 2016 12:23 AM IST
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पुलिस हिरासत में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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राजेंद्र के बयान ने पुलिस व जेल की व्यवस्था को कटघरे में ला दिया है। उसकी बातों से यह तो साफ हो गया कि जेल में अभी भी बंदियों को मोबाइल सुविधा खुलेआम दी जाती है। इतना ही नहीं जेल से पेशी तक बंदी मोबाइल फोन से लैस रहते हैं। जेल नियमों की माने तो पेशी पर जाने और वापस लौटने पर तलाशी के बाद ही बंदियों को जेल में दाखिल किया जाता है। राजेंद्र के खुलासे के बाद यह तो स्पष्ट है कि तलाशी लेने वाले मिलीभगत के चलते बंदियों को हर सुविधा देकर महज कोरम पूरा करते हैं। एसपी नेहा पांडेय ने सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही की बात को स्वीकार करते हुए घटना के तैनात सुरक्षा कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है। वह बोली कि भविष्य में ऐसी घटना सामने आई तो जिम्मेदार बख्शे नहीं जाएंगे।
अधिकारियों को जो दिखाते वही देखकर लौटते
समय-समय पर जेल निरीक्षण को पहुंचने वाले अधिकारी भी जेल की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद बता वहां के कर्मियों का बचाव करते हैं। जेल सूत्रों की माने तो निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों को जैसा वहां के जिम्मेदार दिखाते हैं। वही देखकर वह लौट आते है। राजेंद्र तक मोबाइल, आरी ब्लेड कैसे पहुंची यह जांच का विषय है। रोटीन निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को औचक निरीक्षण कर सच सामने लाने की जरूरत है। एसपी भी इस सच को झुठला नहीं सकी। उन्होंने जल्द जेल की हकीकत परखने और सच सामने लाने की बात कही है।
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16 वर्ष की उम्र में की थी पहली लूट
राजेंद्र के पिता खेती-किसानी कर परिवार चलाते थे। शुरू से ही राजेंद्र का पढ़ने में मन नहीं लगता था। रातोरात मालामाल बनने की चाहत रखने वाले राजेंद्र ने सोलह साल की उम्र में ओमप्रकाश के साथ फतेहपुर में चेन लूट की वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद उसके हौसलों को पर लग गए और वह एक के बाद एक घर लूट, वाहन चोरी समेत अन्य गंभीर वारदातों को अंजाम देता गया। प्रेस वार्ता के दौरान राजेंद्र लोध ने अपनी कहानी खुद सभी को बताई। उसकी आंखों में पछतावे जैसा कुछ नहीं दिखा। वह दिलेरी से की गई हर एक घटना को पुलिस के सामने रखता गया। एसपी नेहा पांडेय ने राजेंद्र और उसके साथियों पर गैंगेस्टर लगाने की बात कही है।
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