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मोबाइल टावर से रैडियएशन से हो सकता है हादसा

Fri, 17 Jun 2016 12:46 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव Updated Fri, 17 Jun 2016 12:46 AM IST
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mobile tower
मोबाइल टावर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

मकानों व दुकानों की छतों पर लगे मोबाइल टावर यमदूत से कम नहीं है। जिले भर के रिहायशी इलाकों में करीब दो सैकड़ा से अधिक टावरों को लगाने में खुलेआम मानकों की अनदेखी की गई है। उन्नाव विकास प्राधिकरण (यूडीए) से इमारत की तकनीकी जांच कराए बगैर ही टावर खड़े कर दिए गए। हर माह हजारों की कमाई के चक्कर में मकान मालिक सेवा प्रदाता कंपनियों से करार कर टावर लगाने की अनुमति दे देते हैं। हैरानी की बात यह है कि मोबाइल कंपनियां यूडीए, पीडब्ल्यूडी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेना भी मुनासिब नहीं समझते। घनी आबादी के बीच अलग-अलग कंपनियों के ढाई सौ से ज्यादा मोबाइल टावर हैं। टावरों के रेडिएशन विकरण से जहां रोगों का खतरा रहता है वहीं कभी भी बड़े हादसे को नकारा नहीं किया जा सकता।

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घनी आबादी के मकानों में लगे टॉवर
उन्नाव। दूसंचार कंपनियों ने नियमों को ताक पर रख कर जगह-जगह मोबाइल टावर लगा रखे हैं। घनी आबादी के बीच बने रिहायशी मकानों को व्यवसायिक उपयोग में लाया जा रहा है। इनमें से कई लोगों ने यूडीए से इसकी अनुमति भी नहीं ली है।
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हो सकता है बड़ा हादसा
मोबाइल टावर कभी भी हादसे का कारण बन सकते है। वजह यह है कि जिन इमारतों की छतों पर यह टावर लगे हैं उनमें से अधिकांश इनका बोझ सहने के काबिल नहीं हैं। तेज हवा व आंधी में टावर कभी भी गिर सकते हैं। जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। शहर में मोहल्ला पीतांबर नगर, आवास विकास कालोनी, मोतीनगर, आदर्श नगर, सिविल लाइन, कल्याणी देवी, प्रियदर्शिनी नगर में लगे मोबाइल टावर किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
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कोर्ट का आदेश दरकिनार
घनी आबादी में लगे मानक विहीन मोबाइल टावरों को हटाने के लिए कोर्ट ने आदेश दिए थे। इसके लिए सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को ऐसे मोबाइल टावर हटवाने के निर्देश दिए थे जो घनी आबादी में लगे हैं और लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं। अदालती आदेश भी अधिकारियों की अनसुनी की भेंट चढ़ गया।

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मोबाइल टावर लगाने के मानक
मोबाइल टावर घनी आबादी में नहीं होना चाहिए। इसके लिए सरकारी जमीन का उपयोग नहीं होना चाहिए। जिस मकान में टावर लगे उसका नक्शा पास होना चाहिए। मकान को व्यवसायिक उपयोग में लेने की अनुमति हो। टेक्निकल जांच के बाद यूडीए से पास होना चाहिए। बिजली लाइनों के नजदीक में टावर न लगा हो। हाईटेंशन लाइन इतनी दूर हो कि टावर गिरने पर भी न छुए।


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यूडीए के सहायक अभियंता राजेश्वर सिंह ने बताया कि जांच की जाएगी और जिन इमारतों में बिना अनुमति के मोबाइल टावर लगाए गए हैं उन्हें नोटिस भेजकर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही इमारत, टावर का भार सहने की स्थिति में है या नहीं इसकी भी जांच की जाएगी।

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