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डहरौली में पसरा रहा सन्नटा
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नीरज का फाइल फोटो। संवाद
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। पुरवा-उन्नाव मार्ग पर शुक्रवार देर रात हुए सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। पिता-पुत्र सहित तीन की मौत से कोहराम मच गया। गांव में खामोशी छाई रहीं। ग्रामीणों ने मृतकों के परिजनों को ढांढस बंधाया। पुलिस हादसा करने वाले वाहन का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
अजगैन कोतवाली क्षेत्र के मुंडेरा-डहरौली गांव निवासी प्रेमचंद्र (53) शुक्रवार शाम 12 वर्षीय बेेटे विकास व चचेरे भतीजे नीरज गौतम (20) के साथ एक बाइक से पुरवा के जगेथा गांव निवासी दोस्त जितेंद्र के भतीजे शौर्य के मुंडन संस्कार में शामिल होने गए थे। रात लगभग 11 बजे बाइक से घर लौटने के दौरान पुरवा कोतवाली क्षेत्र के तौरा गांव के पास अज्ञात वाहन ने तीनों को कुचल दिया था। मौके पर ही प्रेमचंद्र, विकास व नीरज की मौत हो गई थी। शनिवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंची राजकुमारी पति प्रेमचंद्र व बेटे विकास का शव देखकर किस्मत को कोसती दिखीं। बड़ा बेटा आशीष सूरत में धागा फैक्टरी में काम करता है। वह दोपहर को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा। वहीं नीरज की मौत से मां राजेश्वरी, भाई जितेंद्र, राजेंद्र, बहन सीमा व शालिनी का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्रेमचंद्र की मौत के बाद बड़े बेटे आशीष पर तीन बहनों व मां की जिम्मेदारी आ गई है। पिता के रहते हुए वह सूरत में नौकरी कर परिवार का खर्च चलाने के लिए रुपये भेजता था। पिता तीन बीघा खेती व बेटे आशीष के भेजे गए रुपयों से परिवार का गुजारा चलाते थे। शुक्रवार रात पिता प्रेमचंद्र व छोटे भाई विकास की मौत से आशीष ही परिवार का एक मात्र सहारा बचा है।
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अजगैन कोतवाली क्षेत्र के मुंडेरा-डहरौली गांव निवासी प्रेमचंद्र (53) शुक्रवार शाम 12 वर्षीय बेेटे विकास व चचेरे भतीजे नीरज गौतम (20) के साथ एक बाइक से पुरवा के जगेथा गांव निवासी दोस्त जितेंद्र के भतीजे शौर्य के मुंडन संस्कार में शामिल होने गए थे। रात लगभग 11 बजे बाइक से घर लौटने के दौरान पुरवा कोतवाली क्षेत्र के तौरा गांव के पास अज्ञात वाहन ने तीनों को कुचल दिया था। मौके पर ही प्रेमचंद्र, विकास व नीरज की मौत हो गई थी। शनिवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंची राजकुमारी पति प्रेमचंद्र व बेटे विकास का शव देखकर किस्मत को कोसती दिखीं। बड़ा बेटा आशीष सूरत में धागा फैक्टरी में काम करता है। वह दोपहर को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा। वहीं नीरज की मौत से मां राजेश्वरी, भाई जितेंद्र, राजेंद्र, बहन सीमा व शालिनी का रो-रोकर बुरा हाल है।
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प्रेमचंद्र की मौत के बाद बड़े बेटे आशीष पर तीन बहनों व मां की जिम्मेदारी आ गई है। पिता के रहते हुए वह सूरत में नौकरी कर परिवार का खर्च चलाने के लिए रुपये भेजता था। पिता तीन बीघा खेती व बेटे आशीष के भेजे गए रुपयों से परिवार का गुजारा चलाते थे। शुक्रवार रात पिता प्रेमचंद्र व छोटे भाई विकास की मौत से आशीष ही परिवार का एक मात्र सहारा बचा है।

प्रेमचंद्र का फाइल फोटो। संवाद- फोटो : UNNAO

विकास का फाइल फोटो। संवाद- फोटो : UNNAO
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