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आफत बन बरसा पानी, फसलें कर दीं चौपट
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खैरीगुरुदासपुर में बरसात से भीगी धान की फसल को बचाने का प्रयास करते किसान। संवाद
- फोटो : UNNAO
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उन्नाव। 15 घंटे में 32 एमएम बारिश से फसलें चौपट हो गईं। सोमवार शाम से मंगलवार सुबह तक रुक-रुककर बारिश होती रही। इसमें सदर में 25, पुरवा में 18, हसनगंज में 44 व सफीपुर में 42 मिलीमीटर बारिश हुई। इससे धान सहित खरीफ व रबी सीजन की कई फसलों को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है। धान की फसल खेतों में गिर गई है। मूंग, उड़द, सरसों और आलू की फसल के सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
फतेहपुर चौरासी में बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। आलू की बुआई कर चुके किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। पकी धान की फसल, सरसों, सब्जी में गोभी की फसल चौपट हो गई है। खैरीगुरुदासपुर निवासी कृष्ण प्रकाश मिश्रा ने बताया कि 22 बीघा आलू बोया था। खेत में पानी भर जाने से नुकसान हो गया। दबौली के रामकृष्ण पांडेय ने चार बीघा, इस्माइलपुर नौगवां के रोशन पांच बीघा आलू की बोआई की थी। दबौली के नीरज पांडेय ने बताया कि सात बीघा की तिल्ली खेत में कटी पड़ी थी, जो डूब गई। खैरीगुरुदासपुर के बबलू मिश्रा ने बताया कि 20 बीघा आलू बोया था। खेत में पानी भर गया है। एक बीघा आलू बोने में 15 से 20 हजार रुपये तक लागत आती है। कोलवा निवासी लक्ष्मीशंकर मिश्रा ने बताया कि 18 बीघा आलू बोया था। बीज के रूप में पड़ी आलू सड़ जाएगी।
पुरवा के रामापुर के किसान बंशीलाल लोधी ने कहा कि पानी गिरने से धान की खड़ी फसल गिर गई है। खेतों में कटी पड़ी धान की फसल को नुकसान हुआ है। बाजीखेड़ा के किसान डॉ. गोर्वधन लाल पटेल ने कहा कि फायदा कम नुकसान ज्यादा है। सरसों की बोयी फसल पर जमींदोज हो गई है। अगनुवाखेड़ा के किसान सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि खेतों मेें धान की पकी खड़ी 60 बीघा फसल गिर गई है। राजकीय कृषि एवं बीज भंडार प्रभारी विवेक सिंह ने बताया कि बे-मौसम बरसात से खेतों में बोईं फसलें प्रभावित हुई हैं। सलाह दी कि खेत में जब तक बारिश का पानी न सूख जाए तब तक न बोएं। बताया कि चार न्याय पंचायत के गांवों में 100 बीघे धान की फसल गिरी है।
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हसनगंज में बारिश से धान, सरसों, बैगन, फूल गोभी की फसलों को नुकसान हुआ है। मंगलवार दोपहर बाद किसान रघुबीर, प्रभात, राकेश सिंह खेत में कटी पड़ी धान की फसल को उठाकर सुखाने के लिए एकत्रित करते नजर आए। किसानों ने बताया कि जब पानी की जरूरत थी तब बारिश नहीं हुई। अब धान की फसल तैयार हुई तो बे-मौसम बारिश से फसल जलमग्न हो गई। अब उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
गंजमुरादाबाद क्षेत्र में 50 फीसदी आलू बोई जा चुकी है। इस बारिश से बीज सड़ने की आशंका बढ़ गई है। 10 अक्तूबर से अब तक 50 फीसदी किसानों ने आलू बुआई कर ली थी। एक बीघे में जुताई से लेकर गड़ाई तक में 15 हजार रुपये की लगात आई है। इधर हुई बारिश से आलू के खेत पानी से लबालब हो गए। बीज खेत में ही सड़ जाएगा। किसानों का कहना है कि इस बरसात ने तगड़ा झटका दिया है।
उन्नाव। बारिश से शहर के गांधीनगर, ईदगाह, इंद्रानगर, डीएसएन कालेज रोड, आदर्श नगर, हिरन नगर, पीडीनगर, कृष्णानगर, शिवनगर, सिविल लाइन, कब्बाखेड़ा, मौहारीबाग, कल्याणी सहित अधिकांश मोहल्ले जलभराव की चपेट में रहे। बांगरमऊ नगर के स्टेशन मार्ग और तिकोनिया पार्क सहित नसीमगंज, पन्नीटोला, न्यू कटरा, प्रेमगंज, नौनिहालगंज व सरोजिनी नगर व चूड़ी वाली गली की गलियों में जलभराव रहा।
उन्नाव। कई घंटे की बारिश से शहर और ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट रहा। कब्बाखेड़ा, सिटी, पीडीनगर, इब्राहिमाबाग व कुंदनरोड उपकेंद्र से जुड़े सिविल लाइन, दरोगाबाग, बंधूहार, गांधीनगर, इंद्रानगर, छोटा चौराहा, धवनरोड आदि क्षेत्रों में बिजली घंटों गुल रही। ग्रामीण इलाकों मेें नवाबगंज, अजगैन, पुरवा, औरास, असोहा, मौरावां, मियागंज, बांगरमऊ में सोमवार रात गई बिजली मंगलवार दोपहर बाद सामान्य हो सकी।
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फतेहपुर चौरासी में बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। आलू की बुआई कर चुके किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। पकी धान की फसल, सरसों, सब्जी में गोभी की फसल चौपट हो गई है। खैरीगुरुदासपुर निवासी कृष्ण प्रकाश मिश्रा ने बताया कि 22 बीघा आलू बोया था। खेत में पानी भर जाने से नुकसान हो गया। दबौली के रामकृष्ण पांडेय ने चार बीघा, इस्माइलपुर नौगवां के रोशन पांच बीघा आलू की बोआई की थी। दबौली के नीरज पांडेय ने बताया कि सात बीघा की तिल्ली खेत में कटी पड़ी थी, जो डूब गई। खैरीगुरुदासपुर के बबलू मिश्रा ने बताया कि 20 बीघा आलू बोया था। खेत में पानी भर गया है। एक बीघा आलू बोने में 15 से 20 हजार रुपये तक लागत आती है। कोलवा निवासी लक्ष्मीशंकर मिश्रा ने बताया कि 18 बीघा आलू बोया था। बीज के रूप में पड़ी आलू सड़ जाएगी।
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पुरवा के रामापुर के किसान बंशीलाल लोधी ने कहा कि पानी गिरने से धान की खड़ी फसल गिर गई है। खेतों में कटी पड़ी धान की फसल को नुकसान हुआ है। बाजीखेड़ा के किसान डॉ. गोर्वधन लाल पटेल ने कहा कि फायदा कम नुकसान ज्यादा है। सरसों की बोयी फसल पर जमींदोज हो गई है। अगनुवाखेड़ा के किसान सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि खेतों मेें धान की पकी खड़ी 60 बीघा फसल गिर गई है। राजकीय कृषि एवं बीज भंडार प्रभारी विवेक सिंह ने बताया कि बे-मौसम बरसात से खेतों में बोईं फसलें प्रभावित हुई हैं। सलाह दी कि खेत में जब तक बारिश का पानी न सूख जाए तब तक न बोएं। बताया कि चार न्याय पंचायत के गांवों में 100 बीघे धान की फसल गिरी है।
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हसनगंज में बारिश से धान, सरसों, बैगन, फूल गोभी की फसलों को नुकसान हुआ है। मंगलवार दोपहर बाद किसान रघुबीर, प्रभात, राकेश सिंह खेत में कटी पड़ी धान की फसल को उठाकर सुखाने के लिए एकत्रित करते नजर आए। किसानों ने बताया कि जब पानी की जरूरत थी तब बारिश नहीं हुई। अब धान की फसल तैयार हुई तो बे-मौसम बारिश से फसल जलमग्न हो गई। अब उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
गंजमुरादाबाद क्षेत्र में 50 फीसदी आलू बोई जा चुकी है। इस बारिश से बीज सड़ने की आशंका बढ़ गई है। 10 अक्तूबर से अब तक 50 फीसदी किसानों ने आलू बुआई कर ली थी। एक बीघे में जुताई से लेकर गड़ाई तक में 15 हजार रुपये की लगात आई है। इधर हुई बारिश से आलू के खेत पानी से लबालब हो गए। बीज खेत में ही सड़ जाएगा। किसानों का कहना है कि इस बरसात ने तगड़ा झटका दिया है।
उन्नाव। बारिश से शहर के गांधीनगर, ईदगाह, इंद्रानगर, डीएसएन कालेज रोड, आदर्श नगर, हिरन नगर, पीडीनगर, कृष्णानगर, शिवनगर, सिविल लाइन, कब्बाखेड़ा, मौहारीबाग, कल्याणी सहित अधिकांश मोहल्ले जलभराव की चपेट में रहे। बांगरमऊ नगर के स्टेशन मार्ग और तिकोनिया पार्क सहित नसीमगंज, पन्नीटोला, न्यू कटरा, प्रेमगंज, नौनिहालगंज व सरोजिनी नगर व चूड़ी वाली गली की गलियों में जलभराव रहा।
उन्नाव। कई घंटे की बारिश से शहर और ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट रहा। कब्बाखेड़ा, सिटी, पीडीनगर, इब्राहिमाबाग व कुंदनरोड उपकेंद्र से जुड़े सिविल लाइन, दरोगाबाग, बंधूहार, गांधीनगर, इंद्रानगर, छोटा चौराहा, धवनरोड आदि क्षेत्रों में बिजली घंटों गुल रही। ग्रामीण इलाकों मेें नवाबगंज, अजगैन, पुरवा, औरास, असोहा, मौरावां, मियागंज, बांगरमऊ में सोमवार रात गई बिजली मंगलवार दोपहर बाद सामान्य हो सकी।
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