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जांच के आदेश के तीन माह बाद भी नहीं आई रिपोर्ट
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उन्नाव। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को लेकर अफसर लापरवाही बरत रहे हैं। डीएम ने तीन महीने पहले 50 लाख से अधिक की परियोजनाओं रीटेंडरिंग की जांच और दो सप्ताह में रिपोर्ट तलब की थी। लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई।
जिले में 50 लाख से अधिक की परियोजनाओं में बचुआखेड़ा में ग्रामीण स्टेडियम, गंजमुरादाबाद व रसूलपुर रूरी के साथ अन्य गांव में पीएचसी का निर्माण, बांगरमऊ आईटीआई, आश्रय योजना के निर्माण, सिंचाई विभाग की नहरों की सफ ाई बंद एवं चालू होने, माध्यमिक शिक्षा विभाग में कई हाईस्कूल एवं इंटर स्तर के निर्माणाधीन भवनों का यूपीपीसीएल से कराया जा रहा निर्माण, डलमऊ बी पंप सिंचाई परियोजना, यूपी डेस्को, पैक्सपेड, यूपीएसआईसी और आवास विकास आदि कार्यदायी संस्थाओं के कई काम शामिल हैं।
इन परियोजनाओं को कार्यदायी संस्थाओं ने ही जान-बूझकर लेट किया। समय अधिक होने पर कार्य की लागत बढ़ गई। जब समय निकल गया तो उनका संशोधित बढ़ा एस्टीमेट बनाकर शासन से पास भी करा लिया। फिर संस्थाओं ने ‘खेल’ करते हुए काम की रीटेंडरिंग करा ली। तीन माह पहले डीएम रवींद्र कुमार ने समीक्षा बैठक में इस मामले को पकड़ा था। तब उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राजेश कुमार प्रजापति व जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी राजदीप वर्मा को जांच के आदेश दिए थे। दोनों अधिकारियों से दो हफ्ते में जांच रिपोर्ट तलब की थी।
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लेकिन तीन महीने बाद भी न रिपोर्ट तैयार हुई और ना ही उसकी जानकारी की गई। डीएम रवींद्र कुमार ने बताया कि दस दिन पहले इन कामों की समीक्षा की थी। बैठक में संशोधित एस्टीमेट और रीटेंडरिंग की जांच वाला बिंदु छूट गया था। अब सीडीओ को रिमाइंडर भेजकर रिपोर्ट तलब करेंगे।
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जिले में 50 लाख से अधिक की परियोजनाओं में बचुआखेड़ा में ग्रामीण स्टेडियम, गंजमुरादाबाद व रसूलपुर रूरी के साथ अन्य गांव में पीएचसी का निर्माण, बांगरमऊ आईटीआई, आश्रय योजना के निर्माण, सिंचाई विभाग की नहरों की सफ ाई बंद एवं चालू होने, माध्यमिक शिक्षा विभाग में कई हाईस्कूल एवं इंटर स्तर के निर्माणाधीन भवनों का यूपीपीसीएल से कराया जा रहा निर्माण, डलमऊ बी पंप सिंचाई परियोजना, यूपी डेस्को, पैक्सपेड, यूपीएसआईसी और आवास विकास आदि कार्यदायी संस्थाओं के कई काम शामिल हैं।
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इन परियोजनाओं को कार्यदायी संस्थाओं ने ही जान-बूझकर लेट किया। समय अधिक होने पर कार्य की लागत बढ़ गई। जब समय निकल गया तो उनका संशोधित बढ़ा एस्टीमेट बनाकर शासन से पास भी करा लिया। फिर संस्थाओं ने ‘खेल’ करते हुए काम की रीटेंडरिंग करा ली। तीन माह पहले डीएम रवींद्र कुमार ने समीक्षा बैठक में इस मामले को पकड़ा था। तब उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राजेश कुमार प्रजापति व जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी राजदीप वर्मा को जांच के आदेश दिए थे। दोनों अधिकारियों से दो हफ्ते में जांच रिपोर्ट तलब की थी।
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लेकिन तीन महीने बाद भी न रिपोर्ट तैयार हुई और ना ही उसकी जानकारी की गई। डीएम रवींद्र कुमार ने बताया कि दस दिन पहले इन कामों की समीक्षा की थी। बैठक में संशोधित एस्टीमेट और रीटेंडरिंग की जांच वाला बिंदु छूट गया था। अब सीडीओ को रिमाइंडर भेजकर रिपोर्ट तलब करेंगे।