नाराज रेलकर्मियों ने सिग्नल रूम में डाला ताला, रुकीं ट्रेनें
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जीआरपी एसओ व सिग्नल मैन में हाथापाई के मामले ने तूल पकड़ लिया। एसओ पर कार्रवाई की मांग पर अड़े सिग्नल विभाग के कर्मचारियों ने शनिवार की सुबह करीब 8 बजे पश्चिमी केबिन से सिग्नल नो लाईट करने के बाद केबिन में ताला डाल दिया। सिग्नल न मिलने से गोरखपुर-अहमदाबाद समेत चार ट्रेनें लगभग 20 मिनट जहां की तहां खड़ी हो गईं। रेल यातायात प्रभावित होते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने आनन-फानन सिग्नल रूम खुलवाया और सिग्नल सिस्टम शुरू कराया गया। जिसके बाद ट्रेन सेवा बहाल हुई। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने सिग्नल मैन उन्नाव को सस्पेंड करते हुए अन्य कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी।
बता दें कि शुक्रवार दोपहर चेकिंग के दौरान मगरवारा स्टेशन पर जीआरपी एसओ अनिल कुमार मिश्रा ने ट्रैक पर घूमकर मोबाइल पर बात करते सिग्नल मैन रामेश्वर मीणा को फटकार लगाते हुए ट्रैक से घसीटकर हटा दिया था। इसमें सिग्नल मैन को कुछ चोटें आ गई थी। घटना से गुस्साए साथी कर्मचारियों ने एसओ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्नाव रेलवे स्टेशन पर जमकर हंगामा काटा था। कर्मचारियों ने एसओ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग भी की थी। इसमें कोई कार्रवाई न होने से सिग्नल कर्मचारी शनिवार सुबह वेस्ट केबिन पहुंचे और वहां पर सिग्नल नो लाईट करने के बाद ताला डाल दिया। इसके चलते यहां से निकलने वाली ट्रेनें जहां की तहां खड़ी हो गईं। सिग्नल न होने से करीब 20 मिनट तक रेलवे यातायात बाधित रहा। इससे गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सपे्रस सहित दो ट्रेनों को मेमो देकर रवाना किया गया। वहीं दो अन्य माल गाड़ियां भी प्रभावित रहीं। सूचना मिलने पर विभाग के एसई नरायन भींगरा ने केबिन पहुंचकर सिग्नल को सही करवाया और तब जाकर यातायात बहाल हो सका। देखते ही देखते इसकी जानकारी विभाग में मंडल अधिकारियों को हुई। इसके बाद लखनऊ के डिवीजन सिग्नल टेलीकॉम इंजीनियर एके निगम उन्नाव पहुंचे और जांच करने के बाद सिग्नल मैन मुदित बाजपेई को सस्पेंड कर दिया। इसके अलावा उन्होंने इसमें शामिल बाकी कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी।
एसओ के माफी मांगने पर माने कर्मचारी
विवाद होने का मुख्य मामला एसओ जीआरपी द्वारा कर्मचारी के साथ मारपीट में सभी कर्मचारी शनिवार को भी एकजुट दिखे। आरपीएफ इंस्पेक्टर राजीव रंजन सिंह व सिग्नल विभाग के मंडल अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बातचीत के दौरान एसओ के माफी मांगने के बाद भी कर्मचारी मानने को राजी नहीं थे। लेकिन, एसओ द्वारा मारपीट पर माफी मांगने पर अधिकारियों ने कर्मचारियों को फटकारा तब जाकर वह सभी मान गए और मामले को वहीं पर खत्म करवा दिया गया।