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आभा आई़डी : तीन साल में 29.3 लाख के सापेक्ष 16.8 लाख के बने कार्ड

Wed, 16 Jul 2025 01:07 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव Updated Wed, 16 Jul 2025 01:07 AM IST
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Abha ID: Cards worth 16.8 lakh made against 29.3 lakh in three years
उन्नाव। आभा आईडी (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट ) बनाने में जिले की प्रगति खराब है। तीन साल में अभी तक केवल 16.8 लाख लोगों की आभा आईडी बन पाई है। इसका मुख्य कारण यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। इससे आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को कार्ड बनाने में दिक्कत हो रही है। वहीं जानकारी के अभाव में लोग भी कार्ड बनवाने से कतरा रहे हैं।
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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत जिले में 2022 में आभा आईडी बनाने की योजना शुरू हुई थी। जिले का लक्ष्य 29.3 लाख है। इसके सापेक्ष 16.8 लाख लोगों की आभा आईडी बन पाई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है जल्द ही लक्ष्य के सापेक्ष कार्ड बना दिए जाएंगे, लेकिन लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। इसका कारण जमीनी स्तर पर प्रचार- प्रसार और जानकारी का अभाव है। अधिकारियों के अनुसार लोगों का डिजिटल स्वास्थ्य खाता तैयार किया जा रहा है। इसमें मरीज की बीमारी, दवा और इलाज का डाटा रहेगा। भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी होने पर पुराना रिकार्ड देखा जा सकेगा।
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ऐसे जाने क्या है आभा आईडी
आभा कार्ड एक डिजिटल हेल्थ कार्ड होता है। इसमें लोगों का मेडिकल रिकॉर्ड रहता है। कब बीमार हुए, क्या इलाज चला, किस डॉक्टर को दिखाया, बीमारी से संबंधित कौन-कौन सी जांच हुई, कौन-कौन सी दवाइयां लिखी गईं आदि रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है। आभा आईडी बनने से अस्पताल में बनने वाले पर्चे संभालकर रखने की जरूरत नहीं है। आभा कार्ड की मदद से पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। दोबारा कभी अगर आप बीमार होते हैं और डॉक्टर के पास जाते हैं, तो डॉक्टर आपकी आभा आईडी से पुराने चले उपचार का पता कर इलाज शुरू करेंगे।
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अस्पतालों में पंजीकरण कराने से मिलेगी राहत
इस आईडी के जरिए आपको को अस्पताल में लाइन लगाकर पंजीकरण कराने की जरूर नहीं होगी। अस्पताल में लगे बार कोड को स्कैन करके आप अपना स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं। इसके बाद डॉक्टर को भी दिखा सकते हैं। डॉक्टर को पूर्व में चले इलाज की भी जानकारी मिल जाएगी। उसी आधार पर वह इलाज शुरू कर देंगे।
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बोले जिम्मेदार
कार्ड बनाने का काम ग्रामीण स्तर पर तेजी से चल रहा है। आशा कार्यकर्ता, सीएचओ और एएनएम को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। हर सप्ताह इस समीक्षा की जा रही है।
डॉ.जेआर सिंह, प्रभारी सीएमओ
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