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दूध में बेच रहे जहर

Unnao Updated Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। अधिक कमाई के चलते दूधिए दूध में जहर मिला रहे हैं। चार महीन में जांच को भेजे गए 11 नमूनों में 6 का फेल होना इस बात को पुष्ट करता है। बीते वर्ष भी 34 नमूनों में 9 में मिलावट पाई गई थी। जो नमूने फेल हुए हैं उनमें रायायनिक तत्व मिले थे।
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दूध में मिलावट की शिकायतों पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने छापेमारी कर वर्ष 2012 में दूध के 11 सैंपल जांच को भेजे। इनमें 06 फेल हो गए। इसी प्रकार वर्ष 2011 में दूध के 34 नमूने लिए गए। इनमें 9 नमूने फेल हो गए थे। वर्ष 2010 में 24 सैंपलों में 4 की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। जो नमूने फेल हुए उनमें यूरिया, डिटर्जेंट पाया गया है।
जानकारों के अनुसार शहर में प्रतिदिन करीब 72 हजार लीटर दूध की खपत है। दूधियों और डेयरियों से लगभग 50 हजार लीटर की आपूर्ति होती है। इसके बाद भी करीब 22 हजार लीटर की कमी रह जाती है। इस कमी को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर पानी के साथ ही रासायनिक तत्वों की मिलावट की जाती है। मुख्य खाद्य निरीक्षक सुशील सचान ने बताया कि नमूनों की जांच रिपोर्ट में मिलावट पाई गई है। इसमें 5 केस कोर्ट में शुरू हो गए हैं। शेष प्रक्रिया में हैं। बताया कि शुक्लागंज में एक ब्रांडेंड कंपनी के दूध का नमूना लिया गया था जिसमेें 43 प्रतिशत फैट कम पाया गया। दूध में घी निकाल पानी मिलाया गया था। अभी मामले कोर्ट में विचाराधीन है। खाद्य निरीक्षक ने कहा कि चेकिंग अभियान फिर से शुरू हो चुका है। दूध में मिलावट करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।


अब 14 दिन में आएगी जांच रिपोर्ट
उन्नाव। शासन ने नया खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 लागू किया है। सितंबर-2011 से यह लागू किया जा चुका है। इस नए अधिनियम में पेनाल्टी स्तर तक के मामलों की सुनवाई एडीएम कोर्ट में होगी। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, अभी तक दूध में पानी और दाल व चावल में कंकड़ आदि मिलाने के मामले भी कोर्ट में सालों चलते हैं। कई बार तो जिसके खिलाफ केस चलता है उसकी मौत हो जाती है मामले का निर्णय नहीं हो पाता। इसलिए अब ऐसे मामले जिनमें मिलावट तो हो पर उसमें घातक चीज न मिले की सुनवाई का अधिकार एडीएम को दे दिया गया है। एडीएम तीन माह में ऐसे मामलों की सुनवाई कर मिलावट करने वाले पर अधिकतम 1 लाख रुपए तक का जुर्माना कर सकता है। ऐसे मामले जिनमें 3 साल से कम सजा हो सकती है उनकी सुनवाई एसीजेएम कोर्ट में होगी। मिलावट के ऐसे मामले जिनमें 3 साल से ऊपर की सजा हो सकती है में कमिशभनर केस चलाने की अनुमति देंगे। इसके बाद वाद अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट में दायर किया जाएगा। नए अधिनियम में सैंपल की जांच रिपोर्ट 14 दिन में आ जाएगी। तीन माह में साधारण मिलावटखोरों को सजा मिल सकेगी। फिर चाहे उस पर मामूली जुर्माना ही क्यों न लगाया जाए। फूड इंस्पेक्टर सुशील सचान ने बताया कि सितंबर-2011 से नया अधिनियम लागू हो चुका है। इसमें तीन माह में मामूली मिलावट के मामलों की सुनवाई पूरी हो सकेगी।



बेसन, चने की दाल के नमूने भरे
उन्नाव। खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारियों ने कई दुकानों पर छापेमारी करके बेसन व चने की दाल के नमूने लिए। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन अभिहित अधिकारी हरिशंकर सिंह की अगुवाई में खाद्य निरीक्षक हितेन्द्र मोहन त्रिपाठी, संजीव कश्यप, सुशील सचान, पुष्कर श्रीवास्तव, मृत्युन्जय कुमार ने सदर तहसील के आदर्शनगर स्थित विकास गुप्ता की दुकान से बेसन का, विवेक गुप्ता की दुकान से चने की दाल नमूना लिया। इसके अलावा राजेश मेडिकल स्टोर शुक्लागंज के रामप्रकाश शुक्ला से पेपजिम एवं एफटोन जेड फूड सप्लीमेंट के सैंपल भरे। वहीं लोडर में लादकर ले जाए जा रहे सरसों के तेल के 38 ड्रमों को पकड़ लिया। मगरवारा पुलिस चौकी के पास गाड़ी को रोककर सरसों के तेल का नमूना लिया गया। यह तेल कमल उद्योग कृष्णा आयल मिल भन्नानापुरवा कानपुर यूपी द्वारा मेसर्स जगदीश प्रसाद एंड सतीश चन्द्र कैसरगंज उन्नाव को बेचा गया था। सभी नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है। निरीक्षक सुशील सचान ने बताया कि एडीएम के निर्देश पर छापेमारी की गई है। लगातार अभियान चलाया जा रहा है। नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद यदि मिलावट पाई गई तो संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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