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डेंगू की दहशत बनी कमाई का जरिया
Updated Mon, 17 Sep 2018 12:25 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। वायरल बुखार के कहर के बीच डेंगू का हौवा दिखाकर निजी पैथोलॉजी संचालक मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। पैथोलॉजी में चाइनीज किट से ही जांच कर डेंगू की पुष्टि की जा रही है। प्लेटलेट्स कम बताकर मरीजों को नर्सिंग होम में भर्ती कर उनका उपचार किया जा रहा है। यह हाल तब है जब स्वास्थ्य विभाग किट की जांच रिपोर्ट को सही नहीं मानता। निजी पैथोलॉजी में किट की जांच से ही मरीज को डेंगू पॉजिटिव की रिपोर्ट दी जा रही है।
बारिश के मौसम के साथ ही वायरल बुखार ने बच्चों से लेकर बड़ों तक को अपनी चपेट में ले लिया है। हर बुखार के मरीज की खून की जांच कराई जा रही है। कई दिन तक तेज बुखार की चपेट में रहने वाले मरीजों को डेंगू की जांच कराने की सलाह दी जाती है। जिला अस्पताल में किट की जांच के बाद मरीज का सैंपल लखनऊ मेडिकल कालेज भेज दिया जाता है। जहां एलाइजा जांच के बाद ही डेंगू की पुष्टि की जाती है। हालांकि निजी पैथोलॉजी संचालक इस प्रक्रिया को नहीं अपनाते। वह बिना एलाइजा जांच के ही डेंगू की पुष्टि कर रहे हैं। संक्रामक रोग विभाग के नोडल अधिकारी डा. आरएस मिश्रा बताते हैं कि सिर्फ किट की जांच से डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। बिना एलाइजा जांच के डेंगू की पुष्टि करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
130 रुपये में हो रही 2500 की जांच
निजी पैथोलॉजी में डेंगू की जांच जिस किट से की जाती है उसकी कीमत बाजार में सिर्फ 130 रुपये है। जबकि डेंगू की पुष्टि बिना एलाइजा जांच के संभव नहीं है। यह जांच सुविधा उन्नाव की किसी भी पैथॉलाजी में उपलब्ध नहीं है। एलाइजा जांच के लिए सैंपल लखनऊ या दिल्ली भेजे जाते हैं। जहां एलाइजा जांच के नाम पर 2500 रुपये अदा करने पड़ते हैं।
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-किट से जांच में पैथोलॉजी में की जा रही डेंगू की पुष्टि
-प्लेटलेट्स कम दिखाकर मरीजों का किया जा रहा आर्थिक शोषण
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उन्नाव। वायरल बुखार के कहर के बीच डेंगू का हौवा दिखाकर निजी पैथोलॉजी संचालक मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। पैथोलॉजी में चाइनीज किट से ही जांच कर डेंगू की पुष्टि की जा रही है। प्लेटलेट्स कम बताकर मरीजों को नर्सिंग होम में भर्ती कर उनका उपचार किया जा रहा है। यह हाल तब है जब स्वास्थ्य विभाग किट की जांच रिपोर्ट को सही नहीं मानता। निजी पैथोलॉजी में किट की जांच से ही मरीज को डेंगू पॉजिटिव की रिपोर्ट दी जा रही है।
बारिश के मौसम के साथ ही वायरल बुखार ने बच्चों से लेकर बड़ों तक को अपनी चपेट में ले लिया है। हर बुखार के मरीज की खून की जांच कराई जा रही है। कई दिन तक तेज बुखार की चपेट में रहने वाले मरीजों को डेंगू की जांच कराने की सलाह दी जाती है। जिला अस्पताल में किट की जांच के बाद मरीज का सैंपल लखनऊ मेडिकल कालेज भेज दिया जाता है। जहां एलाइजा जांच के बाद ही डेंगू की पुष्टि की जाती है। हालांकि निजी पैथोलॉजी संचालक इस प्रक्रिया को नहीं अपनाते। वह बिना एलाइजा जांच के ही डेंगू की पुष्टि कर रहे हैं। संक्रामक रोग विभाग के नोडल अधिकारी डा. आरएस मिश्रा बताते हैं कि सिर्फ किट की जांच से डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। बिना एलाइजा जांच के डेंगू की पुष्टि करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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130 रुपये में हो रही 2500 की जांच
निजी पैथोलॉजी में डेंगू की जांच जिस किट से की जाती है उसकी कीमत बाजार में सिर्फ 130 रुपये है। जबकि डेंगू की पुष्टि बिना एलाइजा जांच के संभव नहीं है। यह जांच सुविधा उन्नाव की किसी भी पैथॉलाजी में उपलब्ध नहीं है। एलाइजा जांच के लिए सैंपल लखनऊ या दिल्ली भेजे जाते हैं। जहां एलाइजा जांच के नाम पर 2500 रुपये अदा करने पड़ते हैं।
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-किट से जांच में पैथोलॉजी में की जा रही डेंगू की पुष्टि
-प्लेटलेट्स कम दिखाकर मरीजों का किया जा रहा आर्थिक शोषण