फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Unnao News ›   38 days after the people cashless

38 दिन बाद भी लोग कैशलेस

Sat, 17 Dec 2016 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव Updated Sat, 17 Dec 2016 01:03 AM IST
विज्ञापन
38 days after the people cashless
चर्चा करते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विज्ञापन

गांव के बाहर रोड किनारे संचालित मेडिकल स्टोर में पहुंच नोटबंदी के असर का हाल जाना गया। संचालिका ज्योति सैनी ने बताया कि नोटबंदी से व्यापार चौपट हो गया है। पहले हर रोज तीन से चार हजार की बिक्त्रस्ी हो जाती थी। अब तो बमुश्किल हजार रुपये की बिक्री भी नहीं हो रही। पीएम का फैसला तो सही है लेकिन सिस्टम रुला रहा है।

फसल की नहीं हो सकी समय पर बुवाई
गांव के राजू ने बताया कि नोट की चोट से अपना पैसा ही दुश्मन बन गया है। सख्त नियमों के बीच बैंकों में करेंसी की किल्लत ने तो जीना मुहाल कर दिया है। हाथ में नगदी न होने से गेहूं फसल बुवाई पखवाड़ा पिछड़ गई। अंत में उधार लेकर खेतों की जुताई व फसल की बुवाई कराई।
विज्ञापन


घर खर्च चलाना मुश्किल
अयोध्या प्रसाद ने बातचीत में बताया कि नोटबंदी के बाद से बैंक में जमा पैसा शोपीस साबित हो रहा है। तीन दिन जूझने के बाद बैंक से दो हजार रुपये का भुगतान हो सका। इतने में न तो खेती की बुवाई हो पा रही है न ही घर खर्च चल पा रहा है। एक माह से नोटबंदी ने जीना मुहाल कर दिया है। बिना पैसे के कोई काम संभव नहीं और बैंक भुगतान कर नहीं पा रही।
विज्ञापन
विज्ञापन


----------------------------
बैंक में करेंसी के लाले, ग्रामीणों को कैश के लाले
असोहा (उन्नाव)। नोटबंदी से बैंक में करेंसी के लाले तो ग्रामीणों में कैश के लाले पड़े हैं। कांथा गांव में किसी को फसल बुवाई की चिंता खाए जा रही है। तो कोई पति के इलाज को दर-दर भटक रही। तो वहीं कई परिवार के चूल्हें एक टाइम सुलग रहे हैं। गांव में नोटबंदी के बाद से हालात काफी जटिल हो गए हैं। बैंक करेंसी की कमी ने लोगों का चैन व सुकून छीन लिया है।
कांथा गांव में ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त शाखा 8 नवंबर के पहले ग्रामीणों में लेनदेन के लिए काफी मददगार साबित हो रही थी। पीएम की करेंसी पर की गई सर्जिकल स्ट्राईक के बाद से बैंक में करेंसी का सूखा पड़ा है। हफ्तों बैंक के चक्कर लगाने के बाद लोगों को हजार रुपये का भुगतान भी मुश्किल हो रहा है। 38 वें दिन भी कैश की किल्लत ने लोगों को खूब परेशान किया। शाखा प्रबंधक ने करेंसी की कमी बता शुक्रवार को खाताधारकों को महज एक हजार रुपये का भुगतान किया। इससे लोगों का गुस्सा भी फूटा और हंगामा हुआ। इसके बावजूद लोगों की समस्या का हल नहीं हो सका। अंत में जरूरतमंद लोगों को मायूस होकर ही लौटना पड़ा।
इनसेट
प्रतिक्रिया
नोटबंदी से फसल चौपट
कांथा निवासी किसान बच्चूलाल चौरसिया सुबह से ही बैंक की कतार में लग गए थे। घंटों जद्दोजहद के बाद बैंक में इंट्री हुई तो एक हजार रुपये का भुगतान मिलने पर सिस्टम को कोसते हुए बाहर निकले। बातचीत में किसान ने नोटबंदी को गलत करार दिया। साथ ही नोटबंदी से साल भर की जीविका छिनने की चिंता जताई।

- विदेश की कमाई भी नहीं आ रही काम
पड़री खुर्द निवासी कृष्णादेवी का खाता आर्यावर्त ग्रामीण बैंक में है। इनके पति रमा यादव बहरीन देश में रहकर परिवार के लिए कमाई कर रहे हैं। हर माह इसी बैंक खाते में परिवार को पैसा भेजते थे। खाते में हजारों की रकम होने के बाद भी बैंक में करेंसी की किल्लत से दो हजार का भुगतान भी चार दिनों में नहीं हो सका।

मासूम के इलाज तक को पड़ रहा भटकना
कांथा निवासी गुड़िया सुबह 8 बजे बैंक पहुंच कतार में इस उम्मीद के साथ लग गई थी कि चार हजार का भुगतान लेकर मासूम का इलाज करा सकेंगी। बैंक खुलने तक सैकड़ों की भीड़ की लंबी कतार लग चुकी थी। घंटों धक्कामुक्की झेलने के बाद गुड़िया कैश काउंटर पर पहुंची तो केवल एक हजार का भुगतान हो सका। मासूम का इलाज बिन पैसे कैसे हो यह कहते हुए मां सिस्टम को कोसते हुए वापस लौट गई।


पति के इलाज को भटक रही बुजुर्ग
दैनिक मजदूरी कर पेट भरने वाली हृदया देवी ने कुछ रकम इकट्ठा कर बैंक में जमा कर दी थी कि मजबूरी में काम आ सके। पति की तबियत बिगड़ने के चलते बुजुर्ग महिला तीन दिन से बैंक के चक्कर काट रही लेकिन दो हजार का भुगतान नसीब नहीं हो सका। पति का इलाज कैसे होगा। यह सोचकर महिला की आंखो में आसू छलक रहे थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed