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अभागा परिवार: 14 बच्चों में से एक जिंदा, वह भी मंद्धबुद्धि
पिलाना(बागपत)/ब्यूरो
Updated Thu, 30 May 2013 01:13 AM IST
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रामकुमार के साथ उसका नसीब न जाने कैसा खेल खेल रहा है। उसे घर का चिराग मिलता है, और फिर बुझ जाता है। ऐसा एक दो बार नहीं, 13वीं बार हुआ है।
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ये अभागा परिवार उत्तरप्रदेश के बागपत जिले में रहता है। बुधवार को रामकुमार का चार साल का बेटा अनु नर्सरी की हौज में डूबकर मर गया। इससे पहले उसके नौ बेटे और तीन बेटियों की अकाल मृत्यु हो चुकी है।
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उसके 14 बच्चों में से सिर्फ एक जीवित है, लेकिन वह न केवल मंदबुद्धि है, बल्कि कभी भी घर से भाग जाता है। एक बार तो सात साल तक लापता रहा।
50 साल के रामकुमार और उनकी पत्नी मंजू की सिसकती हुई जिंदगी आंसुओं में रिस रिसकर बीत रही है। इतने गम मिले हैं इन अभागों को कि हर दिन वीरान और हर रात श्मशान हो गई है।
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रामकुमार का सबसे बड़ा बेटा 24 साल का है। वह मंदबुद्धि है। तीन बार घर से भाग चुका। एक बार तो साल साल तक लापता रहा।
अनु के चार साल का होने पर पूरा परिवार यह सोचकर खुश था कि वह जिंदगी जिएगा, लेकिन उसे भी न जाने किसकी नजर लग गई।
रामकुमार सिंघावली अहीर थाने के पास स्थित नर्सरी पर काम करता है। वहीं पर खेलते हुए अनु हौज में जा पहुंचा और डूबकर मर गया। इससे पहले मंजू को नौ बेटे और तीन बेटियां हुई।
ये सभी तीन साल की उम्र तक नहीं पहुंच पाए। किसी की बीमारी तो किसी की दुर्घटना में मौत हो गई।
रामकुमार के परिवार के लोगों ने बताया कि अनु की मौत का सदमा मंजू सहन नहीं कर पा रही है। वह आठ माह के गर्भ से है। उस पर गम का यह पहाड़ा टूटा है। उसका रो रोकर बुरा हाल है।