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परीक्षा खत्म होने से पहले ही बाहर आया नेट का पेपर
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Sun, 30 Dec 2012 11:26 PM IST
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यूजीसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) का पेपर परीक्षा खत्म होने से पहले ही बाहर आ गया। रविवार को हुई परीक्षा में 50 फीसदी से अधिक परीक्षार्थी एक घंटा पहले ही पेपर हल करके बाहर निकल गए थे। खास यह कि उन सभी के हाथ में पेपर भी था।
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हालांकि यूजीसी की तरफ से ही इस बार पेपर घर ले जाने की छूट दी गई थी लेकिन इस तरह से परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र बाहर आने से कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। यूजीसी-नेट में पिछली बार से शुरू बदलाव का क्रम इस बार भी जारी रहा। परीक्षार्थियों को इस बार आंसर शीट की कार्बन कापी के साथ प्रश्न पत्र भी घर ले जाने को दी गई।
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अभ्यर्थियों को सब्जेक्ट के तीसरे पेपर में 75 सवाल करने थे, जिसके लिए ढाई घंटे का समय मिला। इसके विपरीत वस्तुनिष्ठ आधारित पेपर होने के कारण बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने समय से पहले ही उन्हें हल कर लिया। स्थिति यह रही कि डेढ़ बजे शुरू हुई परीक्षा में आधे से अधिक परीक्षार्थी तीन बजे के बाद बाहर निकल गए।
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परीक्षार्थियों का कहना था कि उनका पेपर तो और पहले हल हो गया था लेकिन तीन बजे से पहले कक्ष से बाहर निकलने की छूट नहीं थी। खास यह कि सभी अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र भी ले जाने को मिला। समन्वयक इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर माता अंबर तिवारी का कहना है कि यूजीसी ने पहले ही इसकी घोषणा कर दी थी। चूंकि परीक्षा कक्ष में किसी को मोबाइल आदि ले जाने की छूट नहीं थी। ऐसे में परीक्षा समाप्त होने से एक घंटा पहले पेपर बाहर आने पर भी नकल की कोई गुंजाइश नहीं रही। उन्होंने बताया कि कहीं से किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत नहीं है।
बार-बार पूछे जा रहे एक ही सवाल
परीक्षा देकर बाहर निकले कुछ अभ्यर्थी आपस में बात कर रहे थे, ‘लगता है यूजीसी तथा अन्य भर्ती आयोगों के पास एक्सपर्ट और क्वेश्चन बैंक की कमी पड़ गई है।’ उनकी यह टिप्पणी ऐसे ही नहीं थी। उनका कहना था कि रविवार को हुई परीक्षा में कई ऐसे सवाल थे जो जून तथा पूर्व के एग्जाम में भी पूछे गए थे। इतना ही नहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के क्रेट तथा कई अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी पूछे गए हैं।
संगीत की एक परीक्षार्थी ने बताया कि ‘मतंग के गुरु का नाम क्या है?’, ‘एक ताल को पाश्चात्य संगीत में क्या कहेंगे?’, ‘भारतीय सौंदर्य शास्त्र में चिदावरण भंग की परिकल्पना किसने दी है?’ आदि सवाल पूर्व में भी कई बार पूछे गए हैं और इस बार भी थे। अभ्यर्थियों का कहना था कि तीनों पेपर इस बार अपेक्षाकृत कठिन थे। पहले पेपर में शोध तथा करेंट से जुड़े कई सवाल अभ्यर्थियों को समझ में नहीं आए। शहरीकरण पर आधारित पैराग्राफ से भी कई सवाल थे लेकिन उनका उत्तर ढूंढ़ना परीक्षार्थियों के लिए काफी कठिन रहा। अभ्यर्थियों में सेंटर कोड भरने को लेकर भी काफी भ्रम रहा।
रिकॉर्ड उपस्थिति
यूजीसी-नेट में इस बार रिकॉर्ड उपस्थिति रही। इलाहाबाद सेंटर पर ही 23445 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इससे पहले जून में हुई परीक्षा में तकरीबन 19 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इससे पूर्व की परीक्षाओं में तो यह संख्या आठ से 10 हजार ही हुआ करती थी लेकिन परीक्षा पैटर्न में बदलाव के बाद आवेदकों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इस बार इलाहाबाद केंद्र पर कुल 28840 आवेदक थे। इनमें से पहली पाली में 23735 अभ्यर्थी शामिल हुए। दूसरी पाली में 290 परीक्षार्थी और कम हो गए। इससे पेपर कठिन होने के बावजूद नेट और जेआरएफ का कटऑफ हाई जाने की बात कही जा रही है।
परीक्षा प्रारूप में बदलाव की मांग
अव्यवस्था को देखते हुए परीक्षा से जुड़े अफसर और प्रतियोगी यूजीसी-नेट में पुराना पैटर्न फिर से लागू करने की मांग करने लगे हैं। तृतीय पेपर वस्तुनिष्ठ आधारित हो गया है। इसमें 75 सवालों के लिए ढाई घंटे दिए जाने के कारण अभ्यर्थियों के पास पर्याप्त समय भी होता है। इसकी वजह से नकल की आशंका बढ़ गई है। प्रतियोगियों का यह भी कहना है कि दूसरा पेपर भी सब्जेक्ट से संबंधित है। ऐसे में उसी पैटर्न पर एक और पेपर का औचित्य नहीं बनता। उनकी मांग है कि या तो तीसरा पेपर समाप्त कर दिया जाए या फिर पुरानी व्यवस्था लागू की जाए।