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दो साल बाद बकाया बिजली बिलों की वसूली नहीं: हाईकोर्ट
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Thu, 23 May 2013 01:09 AM IST
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लंबे अर्से तक बकाया बिजली बिल की वसूली करने में लापरवाही पर पावर कॉर्पोरेशन को करारा झटका लगा है।
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि पहली बार डिफाल्टर होने के दो साल के बाद बकायेदार से वसूली नहीं की जा सकती है।
कोर्ट ने कहा अगर उपभोक्ता को दो साल के पहले नोटिसें भेजी गई हों और वसूली की कार्रवाई तर्कसंगत व उचित आधारों पर जारी हो तो कानून के मुताबिक बकाये की वसूली की जा सकती है।
लंबे समय से बकायेदार चल रहे लोगों के लिए अदालत का यह फैसला राहत देने वाला है।
अदालत ने पावर कॉर्पोरेशन के एमडी को फैसले की इस विधि व्यवस्था संबंधी टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए दो माह में समुचित सर्कुलर या आदेश जारी करने के साथ ही तीन माह मे पालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
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न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति डॉ सतीश चंद्रा की खंडपीठ ने बुधवार को यह फैसला नानपारा, बहराइच के सत्य नारायण की रिट को मंजूर कर सुनाया।
याची ने रिट दायर कर उसके खिलाफ शुरू की गई बकाया बिजली के देयों की कार्यवाहियों को चुनौती दी थी।
वर्ष 1984 -85 में याची ने अपनी दुकान के लिए बिजली का कनेक्शन लिया था। बाद में उसकी दुकान बंद हो गई 1997 में उसकी दुकान का बिजली कनेक्शन काट दिया गया।
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इसके करीब 14 साल बाद नानपारा के तहसीलदार ने वर्ष 1997-98 से बकाया बिजली बिल 86,925 रुपए की वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी।
याची ने जेल जाने के डर से 30 जुलाई 2012 को 11 हजार रुपये जमा भी कर दिए।
पावर कॉर्पोरेशन की गंभीर लापरवाही
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को पता चला कि 12 साल से बिजली निगम ने बकाया वसूली की कोई कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने इसे यूपी पावर कॉर्पोरेशन की गंभीर लापरवाही करार दिया।
कोर्ट ने याची के मामले मे कहा कि करीब 12 साल तक पावर कॉर्पोरेशन ने उसे कोई वसूली संबंधी नोटिस तक नहीं भेजा। लिहाजा अब उससे बकाया वसूली का कोई हक कॉर्पोरेशन को नहीं है।
कोर्ट ने याची की रिट मंजूर कर कहा कि अगर इस फैसले के प्रकाश में उसने वांछित रकम से अधिक राशि जमा कर दी हो तो वह शेष रकम वापस लेने का हकदार होगा।
कोर्ट ने याची के किसी भी प्रत्यावेदन का दो माह में निपटारा किए जाने को कहा है।
साथ ही इस फैसले से दो हफ्ते में यूपीपीसीएल के एमडी को अवगत कराने के निर्देश कोर्ट के रजिस्ट्रार को दिए।
दो साल पहले कार्रवाई शुरू हो तो ही वसूली
अदालत ने संबंधित नजीरों व कानूनों के हवाले से कहा कि आमतौर पर बकाये के दो साल बीतने पर बिजली बिल वसूली योग्य नहीं होंगे।
यह मियाद तभी बढ़ाई जा सकती है जब यह दिखाया जाए कि दो साल के अंदर वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी।
कोर्ट ने कहा कि विद्युत शुल्क का भुगतान संविदात्मक दायित्व व कानूनी निर्देश है। मियाद अधिनियम 1963 के तहत ऐसे मामलों को ‘डील’ करने की समय सीमा 3 साल है।
कोर्ट ने कहा कि अगर उपभोक्ता बिजली देयों का भुगतान ने करे तो विद्युत वितरण संहिता के तहत इसकी वसूली के लिए दो साल के अंदर कार्रवाई शुरू करने का दायित्व पावर कॉर्पोरेशन का है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मीटर के बगैर ‘फिक्स पेमेंट’ पर बिजली की आपूर्ति की जाती है।
कोर्ट ने कहा अगर ऐसा है, तो इन मामलों मे सिर्फ दो साल के मासिक किराए को ध्यान मे रखकर बकाया रकम की गणना की जा सकती है।