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आजम पर लगाम कसने के लिए फटकार-पुचकार रणनीति
कुमार भवेश चंद्र/ आगरा
Updated Fri, 13 Sep 2013 12:04 AM IST
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सपा के राष्ट्रीय महासचिव और संसदीय कार्यमंत्री आजम
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खां की नाफरमानी पर लगाम कसने के लिए सपा नेतृत्व फिलहाल एक साथ फटकार और
पुचकार की रणनीति पर काम कर रहा है।
बृहस्पतिवार को आजम के समकक्ष महासचिव रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल ने जहां उनसे सीधे इस्तीफा मांग लिया, वहीं किसी मुगालते में न रहने की नसीहत भी दे डाली।
दोपहर में, पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने जरूर उनके जख्मों पर मरहम लगाते हुए दावा किया कि आजम हमसे कभी नाराज हो ही नहीं सकते।
अलबत्ता वे आजम की सरकार से नाराजगी पर कुछ भी बोलने से बचे, वहीं रामगोपाल यादव का भी जमकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि बयान वही दिए जाते हैं, जो देने लायक होते हैं।
आजम के रुख से आगरा की दो दिन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक लगभग पूरी तरह उनकी गैर मौजूदगी, नाराजगी और मुजफ्फरनगर हिंसा पर केंद्रित होकर रह गई।
कहीं न कहीं पार्टी नेतृत्व को आजम का रवैया बेहद नागवार गुजरा है। यही वजह है कि आगरा बैठक के पहले दिन अप्रत्यक्ष तौर पर तो दूसरे दिन आजम को लेकर नेतृत्व का गुस्सा खुलकर सामने आया।
रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल के विरोध के बाद तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का माहौल ही बदल गया। हालात ऐसे बन गए कि कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक के मंथन के नतीजों को बताने के लिए बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस पहले तो रद्द कर दी गई।
बाद में, हालात को संभालने की कोशिश करते हुए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह सामने आए और सफाई दी कि आजम के बैठक में नहीं आने के आप गलत मायने मत लगाइए।
मुझे पता है उनके नहीं आने की वजह। इससे पहले रामगोपाल-नरेश की जोड़ी ने आजम की गैर मौजूदगी पर बुधवार को ही नाराजगी जता दी थी और उनके न आने को अधिक अहमियत नहीं दिए जाने को भी कहा था।
बृहस्पतिवार को उनके तेवर और तीखे हो गए। रामगोपाल ने कहा, इससे आदमी अपना कद खुद कम करता है। अगर किसी को पदाधिकारी नहीं रहना है तो इस्तीफा दे देना चाहिए। रामगोपाल के सुर में सुर मिलाया नरेश अग्रवाल ने।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अगर खुद को पार्टी से बड़ा समझता है तो यह उसकी भूल है। सपा को अल्पसंख्यक वोट किसी अल्पसंख्यक नेता की वजह से नहीं मिलता बल्कि मुलायम सिंह की वजह से मिलता है।
आजम पर जारी रह सकते हैं हमले
सपा सुप्रीमो की पुचकार के बावजूद आजम के खिलाफ सपा के वरिष्ठ नेताओं की बयानबाजी का सिलसिला खत्म होने के आसार कम ही हैं। सपा में यह प्रकरण अभी लंबा खिंच सकता है और इसका अंत बेहद चौंकाने वाला भी हो सकता है।
आजम के लिए पार्टी में मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर उनके विरोधी माने जाने वाले अबु आजमी ने सपा सुप्रीमो की प्रेस कांफ्रेंस के बाद भी आजम पर हमला जारी रखा। उन्होंने कहा कि अमर सिंह का उदाहरण नजीर हैं।
कहा जा रहा था कि अमर सिंह के बिना सपा नहीं चल सकती जबकि उसके बाद सपा का विस्तार ही हुआ है। इसलिए ऐसी गलतफहमी पालने वालों को वक्त खुद ही सबक सिखा देगा।
दूसरी ओर, आजम सीधे तौर पर मीडिया के सामने तो नहीं आ रहे लेकिन उनके समर्थक बताते हैं कि वह हथियार डालने वालों में नहीं। पार्टी में अपनी अहमियत को साबित करने की उनकी कोशिशें जारी रह सकती हैं।
यूं हुआ अटैक...
रामगोपाल ने की शुरुआत
'आजम की गैर मौजूदगी से कोई फर्क नहीं पड़ता। किसी ने नोटिस भी नहीं लिया। दरअसल इससे आदमी अपना ही कद छोटा करता है... पार्टी का कोई नुकसान नहीं होता है... उन्हें सोचना चाहिए या तो पदाधिकारी न रहें, इस्तीफा दे देना चाहिए... नहीं तो आना चाहिए।'
नरेश अग्रवाल ने की बात पूरी
'कोई आदमी पार्टी से बड़ा नहीं होता। किसी को लगता है कि वह नेताजी से बड़ा है तो ऐसी खुशफहमी छोड़ देनी चाहिए। अगर कोई ऐसी गलतफहमी पाले हुए है तो उसको इसकी हकीकत का पता जल्द ही चल जाएगा। सपा को मुसलमान वोट नेताजी के कारण मिलता है, किसी को गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि उसके कारण मिलता है।'
अबु आजमी ने मिलाया सुर
'पार्टी को वोट नेताजी के कारण मिलता है, किसी को अपने बारे में गलतफहमी है तो जल्दी ही वक्त सबक सिखा देगा। इस बार हाईकोर्ट (रामगोपाल) ने सजा सुनाई सुप्रीमकोर्ट (मुलायम) ने माफ कर दिया। कभी ऐसा भी हो सकता है कि हाईकोर्ट की सजा पर सुप्रीमकोर्ट भी मुहर लगा दे।'
मुलायम की पुचकारने की कोशिश
'आजम खां हमारे से कभी नाराज नहीं हो सकते। कहीं जाना हो सकता है। कोई और बात हो सकती है।बैठक में उनके नहीं आने के आप गलत मायने मत लगाइए...हमें पता है उनके नहीं आने की वजह...उनसे बात कर ली जाएगी।'
....और अखिलेश बोले
'आजम खां को कहीं जाना था, इसलिए वे बैठक में नहीं आए।'
आजम के नजदीकी का पलटवार
जिन लोगों का धर्म-ईमान 24 घंटे की सरकार के लिए भी बदल जाता है, उसके कहे को कौन गंभीरता से लेता है। नरेश अग्रवाल और अबु आजमी क्या हैं, यह सब जानते हैं।
- राफे राना, आजम समर्थक
बृहस्पतिवार को आजम के समकक्ष महासचिव रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल ने जहां उनसे सीधे इस्तीफा मांग लिया, वहीं किसी मुगालते में न रहने की नसीहत भी दे डाली।
दोपहर में, पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने जरूर उनके जख्मों पर मरहम लगाते हुए दावा किया कि आजम हमसे कभी नाराज हो ही नहीं सकते।
अलबत्ता वे आजम की सरकार से नाराजगी पर कुछ भी बोलने से बचे, वहीं रामगोपाल यादव का भी जमकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि बयान वही दिए जाते हैं, जो देने लायक होते हैं।
आजम के रुख से आगरा की दो दिन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक लगभग पूरी तरह उनकी गैर मौजूदगी, नाराजगी और मुजफ्फरनगर हिंसा पर केंद्रित होकर रह गई।
कहीं न कहीं पार्टी नेतृत्व को आजम का रवैया बेहद नागवार गुजरा है। यही वजह है कि आगरा बैठक के पहले दिन अप्रत्यक्ष तौर पर तो दूसरे दिन आजम को लेकर नेतृत्व का गुस्सा खुलकर सामने आया।
रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल के विरोध के बाद तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का माहौल ही बदल गया। हालात ऐसे बन गए कि कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक के मंथन के नतीजों को बताने के लिए बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस पहले तो रद्द कर दी गई।
बाद में, हालात को संभालने की कोशिश करते हुए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह सामने आए और सफाई दी कि आजम के बैठक में नहीं आने के आप गलत मायने मत लगाइए।
मुझे पता है उनके नहीं आने की वजह। इससे पहले रामगोपाल-नरेश की जोड़ी ने आजम की गैर मौजूदगी पर बुधवार को ही नाराजगी जता दी थी और उनके न आने को अधिक अहमियत नहीं दिए जाने को भी कहा था।
बृहस्पतिवार को उनके तेवर और तीखे हो गए। रामगोपाल ने कहा, इससे आदमी अपना कद खुद कम करता है। अगर किसी को पदाधिकारी नहीं रहना है तो इस्तीफा दे देना चाहिए। रामगोपाल के सुर में सुर मिलाया नरेश अग्रवाल ने।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अगर खुद को पार्टी से बड़ा समझता है तो यह उसकी भूल है। सपा को अल्पसंख्यक वोट किसी अल्पसंख्यक नेता की वजह से नहीं मिलता बल्कि मुलायम सिंह की वजह से मिलता है।
आजम पर जारी रह सकते हैं हमले
सपा सुप्रीमो की पुचकार के बावजूद आजम के खिलाफ सपा के वरिष्ठ नेताओं की बयानबाजी का सिलसिला खत्म होने के आसार कम ही हैं। सपा में यह प्रकरण अभी लंबा खिंच सकता है और इसका अंत बेहद चौंकाने वाला भी हो सकता है।
आजम के लिए पार्टी में मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर उनके विरोधी माने जाने वाले अबु आजमी ने सपा सुप्रीमो की प्रेस कांफ्रेंस के बाद भी आजम पर हमला जारी रखा। उन्होंने कहा कि अमर सिंह का उदाहरण नजीर हैं।
कहा जा रहा था कि अमर सिंह के बिना सपा नहीं चल सकती जबकि उसके बाद सपा का विस्तार ही हुआ है। इसलिए ऐसी गलतफहमी पालने वालों को वक्त खुद ही सबक सिखा देगा।
दूसरी ओर, आजम सीधे तौर पर मीडिया के सामने तो नहीं आ रहे लेकिन उनके समर्थक बताते हैं कि वह हथियार डालने वालों में नहीं। पार्टी में अपनी अहमियत को साबित करने की उनकी कोशिशें जारी रह सकती हैं।
यूं हुआ अटैक...
रामगोपाल ने की शुरुआत
'आजम की गैर मौजूदगी से कोई फर्क नहीं पड़ता। किसी ने नोटिस भी नहीं लिया। दरअसल इससे आदमी अपना ही कद छोटा करता है... पार्टी का कोई नुकसान नहीं होता है... उन्हें सोचना चाहिए या तो पदाधिकारी न रहें, इस्तीफा दे देना चाहिए... नहीं तो आना चाहिए।'
नरेश अग्रवाल ने की बात पूरी
'कोई आदमी पार्टी से बड़ा नहीं होता। किसी को लगता है कि वह नेताजी से बड़ा है तो ऐसी खुशफहमी छोड़ देनी चाहिए। अगर कोई ऐसी गलतफहमी पाले हुए है तो उसको इसकी हकीकत का पता जल्द ही चल जाएगा। सपा को मुसलमान वोट नेताजी के कारण मिलता है, किसी को गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि उसके कारण मिलता है।'
अबु आजमी ने मिलाया सुर
'पार्टी को वोट नेताजी के कारण मिलता है, किसी को अपने बारे में गलतफहमी है तो जल्दी ही वक्त सबक सिखा देगा। इस बार हाईकोर्ट (रामगोपाल) ने सजा सुनाई सुप्रीमकोर्ट (मुलायम) ने माफ कर दिया। कभी ऐसा भी हो सकता है कि हाईकोर्ट की सजा पर सुप्रीमकोर्ट भी मुहर लगा दे।'
मुलायम की पुचकारने की कोशिश
'आजम खां हमारे से कभी नाराज नहीं हो सकते। कहीं जाना हो सकता है। कोई और बात हो सकती है।बैठक में उनके नहीं आने के आप गलत मायने मत लगाइए...हमें पता है उनके नहीं आने की वजह...उनसे बात कर ली जाएगी।'
....और अखिलेश बोले
'आजम खां को कहीं जाना था, इसलिए वे बैठक में नहीं आए।'
आजम के नजदीकी का पलटवार
जिन लोगों का धर्म-ईमान 24 घंटे की सरकार के लिए भी बदल जाता है, उसके कहे को कौन गंभीरता से लेता है। नरेश अग्रवाल और अबु आजमी क्या हैं, यह सब जानते हैं।
- राफे राना, आजम समर्थक