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'बस-ट्रेन में घूरती निगाहें, ऑफिस में बॉस की बुरी नजर'
पुनीत शर्मा/मुरादाबाद
Updated Tue, 05 Feb 2013 11:45 AM IST
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यूपी पुलिस में शामिल होने वाली जांबाज बेटियों में जज्बा कुछ अलग है। इनमें से कुछ ने टीजिंग का ‘टार्चर’ सहा है तो बस और ट्रेन में घूरती निगाहों के बीच यात्रा की है। दफ्तर में बॉस और दूसरे लोगों के कमेंट सुने हैं। कुछ ऐसे वाकये भी हैं जिन्हें वे याद करके आज भी सिहर जाती हैं। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद बीते वक्त के जिक्र से ही उनका चेहरा गुस्से से तमतमा गया। मुट्ठी भिंच गई।
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...मानो चैलेंज कर रही हों कि अब कोई ऐसा करके तो देखे, मुंहतोड़ जवाब तो देंगी ही साथ ही सामने आने वाली हर अबला के लिए वे ऐसे दरिंदों को ढूंढ-ढूंढकर सजा दिलाएंगी। पीटीसी में एक साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद 67 बेटियां दारोगा बन गईं। आज ये इस काबिल हो गईं हैं कि दूसरों की सुरक्षा कर सकें। पीड़ितों को न्याय दिला सकें। लेकिन इससे पूर्व जब उनको पुलिस की वरदी नहीं मिली थी और आम लड़कियों की तरह से थीं तब इन्हें भी कदम कदम पर बहुत कुछ सहना पड़ा है।
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'ऐसे कमेंट कि बता नहीं सकते'
कानपुर निवासी श्वेता यादव एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करती थी। लेकिन उसके बॉस का व्यवहार ठीक नहीं था लिहाजा नौकरी छोड़नी पड़ी। अनुराधा भी प्राइवेट कंपनी में सर्विस करती थीं। वहां भी उन्हें बहुत कुछ बर्दाश्त करना पड़ा। संभल की रहने वाली प्रतिमा त्यागी तो कालेजों के दिनों को याद करके घबरा जाती हैं। बोलीं, हम सभी सहेलियां कालेज से घर जा रहे थे। रास्ते में खड़े कुछ लड़कों ने ऐसे कमेंट किए कि बता नहीं सकते।
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'घर से निकलना मुश्किल'
महाराजगंज की अनीता यादव ट्रेन की एक घटना का जिक्र करती हैं। अनीता ने बताया कि हम ट्रेन में थे। वहीं एक परिवार बैठा था। उनमें दो लड़कियां थी। कुछ लफंगे ट्रेन में चढ़े और उनके साथ छेड़छाड़ करने लगे। मन किया कि इन लोगों को उठाकर ट्रेन से बाहर फेंक दूं। इलाहाबाद की रंजना पांडेय का कहना है कि आज वाकई लड़कियों का घर से निकलना मुश्किल है। गुंड़ों के भय से कई लड़कियां तो कालेज जाना भी बंद कर देती हैं।
'पांच दिन कालेज नहीं गई'
प्राइवेट स्कूल में एक साल तक नौकरी करने वाली कल्पना और गीता चौहान तो आप बीती बताते बताते रुआंसी हो जाती हैं। कहती हैं, पांच दिन कालेज नहीं गई थी। भैया से बताती तो झगड़ा होता। लिहाजा खामोश रही। जिक्र केवल इन्हीं का नहीं है बल्कि सोमवार को पासआउट होने वाली अधिकांश लड़कियों ने ऐसे राज खोलें, जिन पर अब तक चुप्पी साधे थीं। लेकिन उन्होंने हर मुसीबत का चट्टान की तरह मुकाबला किया और अपना एक मुकाम हासिल कर लिया।