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ये है मोहब्बत की कत्लगाह का नया ट्रेंड!
बागपत/ब्यूरो
Updated Tue, 05 Mar 2013 12:39 PM IST
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'ना खंजर पर कोई छींटा...ना दामन पर कोई दाग...तुम कत्ल करते हो या करामात करते हो'।
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यह शेर चाहें किसी भी संदर्भ में कहा गया हो, लेकिन पश्चिमी यूपी में हाल फिलहाल में हुई प्रेम दिवानी युवतियों की संदिग्ध मौत पर एकदम फिट बैठता है। इन मामलों में पुलिस के पास ऑनर किलिंग की शिकायत गई, लेकिन सुबूत न मिलने के चलते एक में भी कार्रवाई नहीं हो पाई। सवाल उठना लाजिमी है कि कि मोहब्बत की कत्लगाह कहे जाने वाले इस इलाके में कहीं यह आन की खातिर जान लेने की नई तरकीब तो नहीं है?
घटनाओं पर रोशनी डालने से तस्वीर कुछ और साफ हो जाती है। बागपत के चार माह पहले निबाली गांव में एक लड़की का गांव के ही लड़के से प्रेम प्रसंग चल रहा था। रात को अचानक लड़की की तबीयत बिगड़ी। गांव के झोलाछाप डॉक्टर को बुलाया गया। थोड़ी देर में लड़की की मौत हो गई। सुबह को पुलिस के पास ऑनर किलिंग की शिकायत पहुंची, लेकिन जब पुलिस गांव में पहुंची तो पता चला कि शव का दाह संस्कार हो चुका है।
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यही किस्सा एक माह पहले फिर बालैनी के दत्तनगर में दोहराया गया। यहां गाजियाबाद से रिश्तेदारी में आई लड़की अचानक चल बसी और डेढ़ माह पहले छपरौली में भी यही हुआ और ताजा घटना सहारनपुर में सामने आई है। इन चारों घटनाओं में एक दो नहीं, बहुत सारी बातें एक जैसी हैं। जैसे सभी लड़कियों का प्रेम प्रसंग चल रहा था। चारों रात में ही मरीं। इनके परिवार वालों ने इन्हें सरकारी अस्पताल या अच्छे डॉक्टर के पास ले जाने की जरूरत नहीं समझी।
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इसलिए हो रहा है शक
* इन युवतियों की तबीयत अचानक रात में बिगड़ी, रात में ही मौत हो गई।
* किसी के भी परिजनों ने न अच्छे डॉक्टर को दिखाया, न सरकारी अस्पताल ले गए।
* इन युवतियों के शव के दाह संस्कार में भी जल्दी दिखाई गई।
* इस तरह मृत इन सभी युवतियों का प्रेम प्रसंग चल रहा था।
* सभी मामलों में पुलिस के पास ऑनर किलिंग की शिकायत आईं।
कहीं से फांसी का डर तो नहीं ?
इस इलाके में ऐसी अनेक घटनाएं हुई, जब ऑनर किलिंग करने वाले मूंछों पर ताव देते हुए खुद थाने पहुंचे। इसके बाद पिछले साल बागपत की अदालत ने ऑनर किलिंग में बाप-बेटे को सजा-ए-मौत सुनाई। एक सवाल ये भी पैदा हो रहा कि कहीं सजा के डर से प्यार के दुश्मनों ने ये नई तरकीब तो नहीं निकाली है?
एसपी बागपत राजू बाबू सिंह कहते है कि ऐसी स्थिति में पुलिस के सामने एक तो यह दिक्कत होती है कि कोई तहरीर नहीं देता। दूसरा, लाश जल चुकी होती है, इसलिए सुबूत नहीं मिलते। सिर्फ एफआईआर लिखना पर्याप्त नहीं है, साक्ष्य भी चाहिए । इसलिए अगर कोई ऑनर किलिंग का ही केस हो, तो जिन लोगों को पता हो, उन्हें आगे आना चाहिए।
वहीं डिप्टी सीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि अगर कोई पहले से ही दिल का मरीज न हो, तो युवा अवस्था में इस तरह अचानक दर्द उठने से मृत्यु होना संभव नहीं। दूसरा, दर्द होने पर डॉक्टर को न दिखाना, संदेह पैदा करता है। हो सकता है कि ऑनर किलिंग छुपाने के लिए झूठ बोला जा रहा हो।