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तीसरी बार महिला के पाले में जिला पंचायत अध्यक्ष पद
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सुल्तानपुर। शासन की ओर से जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष का पद तीसरी बार महिलाओं के हिस्से में दिया गया है। चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था लागू होने के बाद से अध्यक्ष पद को एक बार एससी तो दो बार सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इस बार सामान्य महिला के हिस्से में सीट जाने से चुनाव में घमासान के आसार बढ़ गए हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर लागू चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था में शासन ने संभावित पंचायत निर्वाचन के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित कर दिया है। वर्ष 1995 से प्रदेश में शुरू हुई चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था में वर्ष 1995 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित था, तब जानकी पाल अध्यक्ष चुनी गई थीं।
वर्ष 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष सामान्य होने पर सामान्य निर्वाचन में अमिता सिंह अध्यक्ष चुनी गई थीं। अमिता सिंह के विधायक चुने जाने के बाद राजकिशोर सिंह अध्यक्ष बने। वर्ष 2005 में अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षण होने पर गीता सरोज जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं।
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शासन की ओर से चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था के तहत वर्ष 2010 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया तो बसपा के सीताराम वर्मा अध्यक्ष चुने गए। उपचुनाव में पृथ्वीपाल यादव सपा से अध्यक्ष बने।
वर्ष 2015 में शासन ने अध्यक्ष पद फिर अनारक्षित कर दिया। इस चुुनाव में ऊषा सिंह अध्यक्ष चुनी गईं। इस बार शासन ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित कर दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित किए जाने से चुनाव में घमासान के आसार बढ़ गए हैं। संबंधित खबर पेज 3 पर...
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर लागू चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था में शासन ने संभावित पंचायत निर्वाचन के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित कर दिया है। वर्ष 1995 से प्रदेश में शुरू हुई चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था में वर्ष 1995 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित था, तब जानकी पाल अध्यक्ष चुनी गई थीं।
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वर्ष 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष सामान्य होने पर सामान्य निर्वाचन में अमिता सिंह अध्यक्ष चुनी गई थीं। अमिता सिंह के विधायक चुने जाने के बाद राजकिशोर सिंह अध्यक्ष बने। वर्ष 2005 में अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षण होने पर गीता सरोज जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं।
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शासन की ओर से चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था के तहत वर्ष 2010 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया तो बसपा के सीताराम वर्मा अध्यक्ष चुने गए। उपचुनाव में पृथ्वीपाल यादव सपा से अध्यक्ष बने।
वर्ष 2015 में शासन ने अध्यक्ष पद फिर अनारक्षित कर दिया। इस चुुनाव में ऊषा सिंह अध्यक्ष चुनी गईं। इस बार शासन ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित कर दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित किए जाने से चुनाव में घमासान के आसार बढ़ गए हैं। संबंधित खबर पेज 3 पर...