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Sultanpur News: ठंड से बच्चों में बढ़ रहा वायरल निमोनिया
Fri, 03 Jan 2025 12:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Fri, 03 Jan 2025 12:28 AM IST
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सुल्तानपुर। ठंड बढ़ने के साथ बच्चों में वायरल निमोनिया के मामले में डेढ़ गुना इजाफा हुआ है। बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल की ओपीडी में वायरल निमोनिया के करीब 78 मामले आए। चिकित्सकों ने बच्चों का इलाज किया। दवा के साथ बच्चों के कान ढ़ककर रखने और ठंड से बचाने का सुझाव दिया।
ठंड बढ़ने के साथ फेफड़े पर वायरस का हमला तेज हो गया है। मेडिकल कॉलेज में आने वाला निमोनिया का लगभग हर तीसरा मरीज इसी वायरस का शिकार पाया जा रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम करन ने बताया कि इन दिनों कई प्रकार के वायरस बच्चों को वायरल निमोनिया का शिकार बना रहे हैं।
बताया कि ओपीडी में आने वाले निमोनिया के 70 प्रतिशत बीमार बच्चे वायरल निमोनिया के मिल रहे हैं। एडिनो वायरस, रेस्पिरेटरी सिनिसाइटल जैसे वायरस मुख्य हैं। वायरल निमोनिया का कोई इलाज नहीं है। बाजार में कोई दवा तक उपलब्ध नहीं है। एंटीबायोटिक दवा से ही वायरल निमोनिया का इलाज किया जा रहा है। निमोनिया ठीक करने के लिए कांप्लेक्स एंटीबॉयोटिक दवाएं देनी पड़ रही हैं। निमोनिया के मरीज के लिए पांच दिन का एंटीबायोटिक दवा का कोर्स होता है।
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बैक्टीरियल निमोनिया के लिए ब्लड कल्चर समेत अन्य प्रकार की जांच होती है, लेकिन वायरल निमोनिया के लिए कोई जांच नहीं है। एक्सरे देखकर इसका पता लगाते हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश ने बताया कि ठंड का मौसम चल रहा है, इसलिए इन दिनों निमोनिया के मामले बढ़े हुए हैं।
इनसेट..
वायरल निमोनिया के लक्षण
- बुखार व खांसी के साथ लगातार सांस लेने में तकलीफ और सांस लेने की गति तेज होना।
- जन्म से दो माह के बच्चे में सांस की गति प्रति मिनट 60 से अधिक हो और खांसी व बुखार हो।
- दो महीने से एक साल के बच्चों में सांस की गति 50 प्रति मिनट और एक से पांच साल के बच्चे में 40 से अधिक हो।
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ठंड बढ़ने के साथ फेफड़े पर वायरस का हमला तेज हो गया है। मेडिकल कॉलेज में आने वाला निमोनिया का लगभग हर तीसरा मरीज इसी वायरस का शिकार पाया जा रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम करन ने बताया कि इन दिनों कई प्रकार के वायरस बच्चों को वायरल निमोनिया का शिकार बना रहे हैं।
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बताया कि ओपीडी में आने वाले निमोनिया के 70 प्रतिशत बीमार बच्चे वायरल निमोनिया के मिल रहे हैं। एडिनो वायरस, रेस्पिरेटरी सिनिसाइटल जैसे वायरस मुख्य हैं। वायरल निमोनिया का कोई इलाज नहीं है। बाजार में कोई दवा तक उपलब्ध नहीं है। एंटीबायोटिक दवा से ही वायरल निमोनिया का इलाज किया जा रहा है। निमोनिया ठीक करने के लिए कांप्लेक्स एंटीबॉयोटिक दवाएं देनी पड़ रही हैं। निमोनिया के मरीज के लिए पांच दिन का एंटीबायोटिक दवा का कोर्स होता है।
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बैक्टीरियल निमोनिया के लिए ब्लड कल्चर समेत अन्य प्रकार की जांच होती है, लेकिन वायरल निमोनिया के लिए कोई जांच नहीं है। एक्सरे देखकर इसका पता लगाते हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश ने बताया कि ठंड का मौसम चल रहा है, इसलिए इन दिनों निमोनिया के मामले बढ़े हुए हैं।
इनसेट..
वायरल निमोनिया के लक्षण
- बुखार व खांसी के साथ लगातार सांस लेने में तकलीफ और सांस लेने की गति तेज होना।
- जन्म से दो माह के बच्चे में सांस की गति प्रति मिनट 60 से अधिक हो और खांसी व बुखार हो।
- दो महीने से एक साल के बच्चों में सांस की गति 50 प्रति मिनट और एक से पांच साल के बच्चे में 40 से अधिक हो।