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Sultanpur News: दूसरे प्रदेशों में पहचान बना रहें कच्चे धागे से बने खिलौने
Thu, 19 Sep 2024 01:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 19 Sep 2024 01:30 AM IST
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सुल्तानपुर खिलौने के साथ शांति देवी।
सुल्तानपुर। कच्चे धागे से स्वयं सहायता समूह की शांति देवी के बनाए खिलौने दूसरे प्रदेशों में अपनी पहचान बना रहे हैं। प्रदेश के जिलों में मिले नतीजों के बाद दूसरे प्रदेशों में लगने वाले मेले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की ओर से उनको स्टाल दिलाया जा रहा है। साथ ही प्रोत्साहित करने के लिए विभाग से धनराशि भी दी जा रही है।
भदैंया विकास खंड के पन्नाटिकरी गांव निवासी शांति देवी ने करीब पांच साल पहले राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर कच्चे धागे से खिलौने व घर के सजावटी सामान बनाना शुरू किया था। शांति देवी बताती हैं कि शुरुआती दौर में उन्हें जिले में लगने वाले मेले में अपने खिलौनों का स्टाल लगाने के लिए भेजा जाता था। प्रयागराज, अयोध्या, वाराणसी व गाजियाबाद समेत अब तक कई जिलों में उनके खिलौनों का स्टाल लग चुका है। जिलों में खिलौनों की बिक्री को देखते हुए शांति देवी को दूसरे प्रदेशों में आयोजित होने वाले मेलों में भेजा जाने लगा है। इसके लिए एनआरएलएम की ओर से उनके स्टाल का बंदोबस्त किया जा रहा है। शांति देवी बताती हैं, मध्यप्रदेश व दिल्ली में वह अपने खिलौनों का स्टाल लगा चुकी हैं। खिलौनों की बिक्री से शांति देवी आत्मनिर्भर हैं। बताती हैं कि मेले का मौसम करीब पांच माह ठंडा रहता है। इसके बाद भी औसतन 20 से 25 हजार रुपये प्रति माह कमाई हो जाती है। अब वह अन्य महिलाओं को अपने कारोबार से प्रेरित कर रहीं हैं। मिशन प्रबंधक नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि शांति देवी काफी अच्छे खिलौने बनाती हैं, जिससे उनकी अच्छी बिक्री हो जाती है।
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भदैंया विकास खंड के पन्नाटिकरी गांव निवासी शांति देवी ने करीब पांच साल पहले राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर कच्चे धागे से खिलौने व घर के सजावटी सामान बनाना शुरू किया था। शांति देवी बताती हैं कि शुरुआती दौर में उन्हें जिले में लगने वाले मेले में अपने खिलौनों का स्टाल लगाने के लिए भेजा जाता था। प्रयागराज, अयोध्या, वाराणसी व गाजियाबाद समेत अब तक कई जिलों में उनके खिलौनों का स्टाल लग चुका है। जिलों में खिलौनों की बिक्री को देखते हुए शांति देवी को दूसरे प्रदेशों में आयोजित होने वाले मेलों में भेजा जाने लगा है। इसके लिए एनआरएलएम की ओर से उनके स्टाल का बंदोबस्त किया जा रहा है। शांति देवी बताती हैं, मध्यप्रदेश व दिल्ली में वह अपने खिलौनों का स्टाल लगा चुकी हैं। खिलौनों की बिक्री से शांति देवी आत्मनिर्भर हैं। बताती हैं कि मेले का मौसम करीब पांच माह ठंडा रहता है। इसके बाद भी औसतन 20 से 25 हजार रुपये प्रति माह कमाई हो जाती है। अब वह अन्य महिलाओं को अपने कारोबार से प्रेरित कर रहीं हैं। मिशन प्रबंधक नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि शांति देवी काफी अच्छे खिलौने बनाती हैं, जिससे उनकी अच्छी बिक्री हो जाती है।
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