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Sultanpur News: अब ट्राॅमा सेंटर में सी-आर्म मशीन से होगा ऑपरेशन
Tue, 28 Nov 2023 12:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Tue, 28 Nov 2023 12:29 AM IST
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सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज से आधुनिक सी-आर्म मशीन मंगलवार को ट्रॉमा सेंटर पहुंच जाएगी। इससे मरीजों के पैर और हाथ की टूटी हड्डियों में सरिया और प्लेट आसानी से डाला जा सकेगा। ट्राॅमा सेंटर में 15 मरीज भर्ती हैं। सोमवार दोपहर एक बजे तक 50 मरीजों ने पंजीयन करवाया।
ट्राॅमा सेंटर के आर्थो चिकित्सक डॉ. समीर सुमन ने बताया कि सी-आर्म मशीन के पहुंचने से ऑपरेशन के मामले और बढ़ जाएंगे। इस मशीन के जरिए पैर और हाथ की टूटी हड्डियों में रॉड व प्लेट को आसानी से एक छेद के माध्यम से डाला जाएगा। बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।
चिकित्सक ने बताया कि यह मशीन हड्डी से जुड़े ऑपरेशन के काम में आती है। इसके जरिए डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान हड्डी या अंदर की जगह को स्क्रीन पर देख पाते हैं। इसके जरिए माइनर से लेकर बड़ा ऑपरेशन किया जा सकता है। बताया कि पहली नवंबर से ट्राॅमा सेंटर पूर्ण रूप से चल रहा है। एक्सीडेंटल केस मेडिकल कॉलेज के बजाय यहां आ रहे हैं।
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गलियारे में बेड लगाकर हो रहा उपचार
ट्राॅमा सेंटर में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दुर्घटना में घायल मरीज अब मेडिकल कॉलेज के बजाय यहां पहुंच रहे हैं। इससे मेडिकल कॉलेज पर दबाव कम पड़ रहा है। इस वजह से बेड कम पड़ने से गलियारे में मरीजों का इलाज चल रहा है।
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ट्राॅमा सेंटर के आर्थो चिकित्सक डॉ. समीर सुमन ने बताया कि सी-आर्म मशीन के पहुंचने से ऑपरेशन के मामले और बढ़ जाएंगे। इस मशीन के जरिए पैर और हाथ की टूटी हड्डियों में रॉड व प्लेट को आसानी से एक छेद के माध्यम से डाला जाएगा। बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।
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चिकित्सक ने बताया कि यह मशीन हड्डी से जुड़े ऑपरेशन के काम में आती है। इसके जरिए डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान हड्डी या अंदर की जगह को स्क्रीन पर देख पाते हैं। इसके जरिए माइनर से लेकर बड़ा ऑपरेशन किया जा सकता है। बताया कि पहली नवंबर से ट्राॅमा सेंटर पूर्ण रूप से चल रहा है। एक्सीडेंटल केस मेडिकल कॉलेज के बजाय यहां आ रहे हैं।
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गलियारे में बेड लगाकर हो रहा उपचार
ट्राॅमा सेंटर में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दुर्घटना में घायल मरीज अब मेडिकल कॉलेज के बजाय यहां पहुंच रहे हैं। इससे मेडिकल कॉलेज पर दबाव कम पड़ रहा है। इस वजह से बेड कम पड़ने से गलियारे में मरीजों का इलाज चल रहा है।