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बीटीसी में प्रवेश नहीं होने से कॉलेज संचालकों को करोड़ों का नुकसान

Thu, 10 Jun 2021 11:52 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jun 2021 11:52 PM IST
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Loss of crores to college operators due to non-admission in BTC
सुल्तानपुर। कोरोना की वजह से बीटीसी कॉलेजों में शिक्षण सत्र 2020-21 में प्रवेश नहीं हुआ है। जिससे बीटीसी कॉलेज संचालकों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा है। सुल्तानपुर व अमेठी जिले में वर्तमान समय में 92 बीटीसी कॉलेज संचालित हैं। कुछ कॉलेजों में 50 व कुछ में 100 सीटों पर प्रतिवर्ष प्रवेश होता है। आमतौर पर बीटीसी में प्रवेश की प्रक्रिया अप्रैल-मई से शुरू होकर जून-जुलाई तक चलती है। जुलाई से शिक्षण सत्र की शुरुआत हो जाती है।
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अमेठी और सुल्तानपुर के इन 92 कॉलेजों में प्रतिवर्ष लगभग 8000 विद्यार्थियों के प्रवेश होते हैं। प्राइवेट शिक्षण संस्थानों के अतिरिक्त जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में सुल्तानपुर और अमेठी जिले के हाई मेरिट वाले विद्यार्थी प्रवेश पाते हैं। दोनों जिले के सौ-सौ विद्यार्थी डायट परिसर में संचालित बीटीसी कोर्स में प्रवेश लेते हैं।
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कोरोना संक्रमण की वजह से बीटीसी कॉलेजों में शिक्षण सत्र 2020-21 में प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी थी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से इसके संबंध में कोई गाइडलाइन भी नहीं जारी हुई। पूरे साल डीएलएड कॉलेज संचालक शासन के निर्देश का इंतजार करते रहे लेकिन बीटीसी में प्रवेश के लिए कोई आदेश नहीं आया। अब इस शिक्षण सत्र में प्रवेश की कोई उम्मीद भी नहीं है। शिक्षण सत्र 2020-21 में प्रवेश नहीं होने से बीटीसी कॉलेज संचालकों को करोड़ों की चपत लगी है।
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प्रत्येक बीटीसी कॉलेज में प्राचार्य, प्राध्यापक, तृतीय श्रेणी कर्मी और चतुर्थ श्रेणी कर्मी को मिलाकर 10 से 12 लोग कार्यरत हैं। इस हिसाब से दोनों जिले के 92 कॉलेज में कुल कार्यरत कर्मियों की संख्या तकरीबन एक हजार है। बीटीसी के सत्र 2020-21 में प्रवेश नहीं होने से कॉलेजों को एक ओर आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है, वहीं शिक्षकों व कर्मचारियों को मानदेय/वेतन भुगतान भी करना पड़ रहा है। आय नहीं होने और खर्च अधिक होने से कॉलेज संचालकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
बीटीसी (डीएलएड) के सत्र 2020-21 में प्रवेश प्रक्रिया नहीं होने से बीटीसी की पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को भी निराशा हाथ लगी है। दो वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं का एक साल बर्बाद हुआ है। यदि प्रवेश प्रक्रिया हुई होती तो छात्र-छात्राओं को 2022 में बीटीसी का सर्टिफिकेट हासिल हो जाता। साल बर्बाद हो जाने से बीटीसी के इच्छुक विद्यार्थी निराश हैं।

डायट के प्राचार्य धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि बीटीसी सत्र 2020-21 में कोरोना की वजह से प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई थी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी के यहां से सत्र 2020- 21 को शून्य घोषित करने के संबंध में कोई भी दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। शिक्षण सत्र 2021-22 में प्रवेश की उम्मीद की जा रही है। फिलहाल अभी तक शासन अथवा परीक्षा नियामक प्राधिकारी के स्तर से इसके बारे में भी कोई पत्राचार नहीं हुआ है।
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