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‘हिंगलाज में बसी भवानी, महिमा अमित न जात बखानी’

Tue, 04 Oct 2016 10:31 PM IST
Amar ujala Bureau
Amar ujala Bureau Updated Tue, 04 Oct 2016 10:31 PM IST
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Hinglag mandir decorated in Navratri
नवरात्र पर सजे देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

क्षेत्र के दादरा गांव में स्थित मां हिंगलाज देवी का मंदिर सैकड़ों साल से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। देश की तमाम हस्तियां यहां शीष नवा चुकी हैं। नवरात्र के दिनों में भक्त माता के दरबार में माथा टेक कर मन्नतें मांगते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई भक्त की हर मुराद यहां पूरी होती है। इसीलिए कहते हैं कि ‘हिंगलाज में बसी भवानी, महिमा अमित न जात बखानी।’

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हिंगलाज देवी मंदिर की आधार शिला तकरीबन छह सौ वर्ष पूर्व संत पुरुषोत्तम दास ने रखी थी। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि बाबा पुरुषोत्तम दास ने हींगल नदी के किनारे स्थित हींगल पर्वत पर (अब पाकिस्तान में) 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने प्रतीक स्वरूप बाबा पुरुषोत्तम दास को त्रिशूल भेंट किया था। देवी से प्राप्त त्रिशूल को लेकर बाबा पुरुषोत्तम दास यहां पर आए और धार्मिक स्थल के निर्माण का कार्य आरंभ करवाया।
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देवी का दिया हुआ त्रिशूल आज भी गर्भ गृह में स्थित है। मंदिर के पुजारी संजय मिश्र ने बताया कि शारदीय नवरात्र के दिनों में माता यहां पर किसी न किसी रूप में उपस्थित रहती हैं। इसीलिए देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी इस मंदिर में शीष नवा चुके हैं। आस-पास के कई जनपदों के श्रद्धालु अपनी मनौती की पूर्ति के लिए नवरात्र में माथा टेकने आते हैं। मान्यता है कि मां हिंगलाज अपने भक्तों की प्रार्थना को अवश्य पूरा करती हैं। 

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