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अपराध का विवरण छिपाने पर रद्द होगा निर्वाचन: हाईकोर्ट
Tue, 18 Aug 2026 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Tue, 18 Aug 2026 11:19 PM IST
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सुल्तानपुर। जिला बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति में सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्देशों के मुताबिक महिलाओं का पद आरक्षित करने के मुद्दे पर पेश हुई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट लखनऊ बेंच का आदेश मंगलवार को सामने आया। हाईकोर्ट ने पक्षकार की मोडिफिकेशन अर्जी को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एल्डर्स कमेटी या अन्य जिम्मेदारों को 15 दिन में महिला आरक्षण के रोस्टर के अनुसार चुनाव कराने व सूचित करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में अनुपालन पर सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की है।
कोतवाली नगर के पंजाबी काॅलोनी की रहने वाली अधिवक्ता शशि मिश्रा की तरफ से महिलाओं का 30 प्रतिशत पद आरक्षित करने के लिए हाईकोर्ट मे जनहित याचिका पेश की गई है। हाईकोर्ट से जारी निर्देश के मुताबिक प्रत्येक तीसरे साल पर अध्यक्ष,महासचिव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष,संयुक्त सचिव,कोषाध्यक्ष के पद पर रोस्टर के अनुसार बारी-बारी महिलाओं का प्रतिनिधित्व होने की व्यवस्था बनाने के लिए सुझाव दिया गया है।
हाईकोर्ट ने प्रत्याशियों को निर्वाचन फाॅर्म में दर्ज या लंबित आपराधिक मामलों का विवरण देना अनिवार्य बताया है। हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक नए रोस्टर में इस बार महासचिव पद महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं रहेगा, बल्कि एक साल तक अपने रोस्टर का इंतजार करना पड़ेगा। हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद जल्द ही महिला आरक्षण का रोस्टर बनाने व चुनाव की नई अधिसूचना चुनाव अधिकारियों की तरफ से जारी की जाएगी।
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कोतवाली नगर के पंजाबी काॅलोनी की रहने वाली अधिवक्ता शशि मिश्रा की तरफ से महिलाओं का 30 प्रतिशत पद आरक्षित करने के लिए हाईकोर्ट मे जनहित याचिका पेश की गई है। हाईकोर्ट से जारी निर्देश के मुताबिक प्रत्येक तीसरे साल पर अध्यक्ष,महासचिव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष,संयुक्त सचिव,कोषाध्यक्ष के पद पर रोस्टर के अनुसार बारी-बारी महिलाओं का प्रतिनिधित्व होने की व्यवस्था बनाने के लिए सुझाव दिया गया है।
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हाईकोर्ट ने प्रत्याशियों को निर्वाचन फाॅर्म में दर्ज या लंबित आपराधिक मामलों का विवरण देना अनिवार्य बताया है। हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक नए रोस्टर में इस बार महासचिव पद महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं रहेगा, बल्कि एक साल तक अपने रोस्टर का इंतजार करना पड़ेगा। हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद जल्द ही महिला आरक्षण का रोस्टर बनाने व चुनाव की नई अधिसूचना चुनाव अधिकारियों की तरफ से जारी की जाएगी।
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