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Sultanpur News: डिग्री बीटेक व बीएड की, खाकी वर्दी की चाहत में दी परीक्षा
Mon, 26 Aug 2024 01:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Mon, 26 Aug 2024 01:03 PM IST
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सुल्तानपुर। बेरोजगारी का सितम कहें या खाकी वर्दी की चाहत। पद भले ही सिपाही का हो, लेकिन परीक्षा देने बीटेक, बीएड करने वाले भी पहुंचे। इतना ही नहीं, पीसीएस की तैयारी कर रहे युवाओं ने भी सिपाही भर्ती परीक्षा में हाथ आजमाया। रविवार को केंद्रों पर ऐसे अभ्यर्थी भी मिले जो एमएससी, बीकॉम और एमबीए डिग्रीधारी थे, लेकिन वे भी सिपाही की परीक्षा देने के लिए कतारों में खड़े मिले।
तीसरे दिन की पहली पाली में परीक्षा देने कुशीनगर से पहुंचे राम आशीष मौर्य ने बताया कि उनका सेंटर सर्वोदय इंटर कॉलेज लंभुआ है। टैक्सी पकड़ने के लिए बस स्टेशन पर खड़े थे। पूछने पर बताया कि वह बीएड डिग्रीधारक हैं। काफी प्रयास के बाद कोई रोजगार नहीं मिला तो एक प्राइवेट स्कूल में पांच हजार रुपये में शिक्षक की नौकरी कर ली। घरवालों के दबाव में सिपाही भर्ती का फॉर्म भर दिया था, इसलिए परीक्षा देने आ गया।
अंबेडकरनगर से केशकुमारी बालिका इंटर कॉलेज में परीक्षा देने पहुंचीं अनामिका सिंह दिल्ली के मुखर्जीनगर में पीसीएस की तैयारी कर रही हैं। पूछने पर बताया कि सरकारी नौकरी कोई भी हो, चलेगा। अगर खाकी वर्दी मिल रही है तो सिपाही बनना भी खराब नहीं है, पुलिस वाला रौब तो रहेगा। टांटियानगर बाईपास पर सवारी का इंतजार कर रहे अनुभव गुप्ता बीटेक डिग्रीधारक हैं। बताया कि वह गोरखपुर से आए हैं। पहली पाली की परीक्षा देने के बाद घर जा रहे हैं।
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इसी तरह बहराइच से राम सुभावन भी एमए की डिग्री लेकर सिपाही की परीक्षा देने जीआईसी पहुंचे थे। बताया कि यूपीएससी की तैयारी प्रयागराज में कर रहे थे। 10 साल तैयारी करने के बाद सफलता नहीं मिली। शादी के बाद जिम्मेदारी बढ़ी तो प्रयागराज छोड़कर घर आ गए और एक कोचिंग सेंटर खोलकर बच्चों को पढ़ाने लगे। सरकार ने कोचिंग पर रोक लगा दी तो नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं।
अयोध्या से परीक्षा देने गनपत सहाय डिग्री कॉलेज पहुंचीं सुरभि मिश्रा भी एमबीए डिग्रीधारक हैं। प्राइवेट सेक्टर की एक कंपनी में मार्केटिंग का काम कर रही हैं। बताया कि बहुत मेहनत करने के बाद 18 हजार तक महीना कमा पाती हैं। सिपाही बनने के बाद नौकरी में स्थायित्व तो रहेगा, बस इसी सोच में फाॅर्म भरा था। परीक्षा अच्छी हुई है, आगे जो होगा देखा जाएगा। बाराबंकी की अंजली केएनआईपीएसएस में परीक्षा देने के बाद घर जा रही थीं। पूछने पर बताया कि उन्होंने बीटीसी कर रखी है। घर के पास ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं। तीन हजार रुपये महीना मिलता है। महंगाई के दौर में इतने पैसे से क्या होता है।
गणित के सवालों में चकराए, हिंदी ने दी राहत
बहराइच के रामकेश ने बताया कि वह एमएससी जूलॉजी से हैं। गणित के कुछ सवाल कठिन थे। रीजनिंग ने भी काफी परेशान किया। हालांकि हिंदी के सवालों ने जरूर राहत दी। कुशीनगर के आशू मलिक ने बताया कि पेपर पिछली बार जैसा ही था। कोई दिक्कत नहीं हुई। रीजनिंग में कुछ प्रश्न घुमाकर पूछे गए थे। उनका जवाब देने में दिमाग पर जोर देना पड़ा। बस्ती के ओमप्रकाश ने बताया कि उन्होंने पहली बार पुलिस भर्ती की परीक्षा दी है। पेपर आसान था, कोई दिक्कत नहीं हुई। (संवाद)
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तीसरे दिन की पहली पाली में परीक्षा देने कुशीनगर से पहुंचे राम आशीष मौर्य ने बताया कि उनका सेंटर सर्वोदय इंटर कॉलेज लंभुआ है। टैक्सी पकड़ने के लिए बस स्टेशन पर खड़े थे। पूछने पर बताया कि वह बीएड डिग्रीधारक हैं। काफी प्रयास के बाद कोई रोजगार नहीं मिला तो एक प्राइवेट स्कूल में पांच हजार रुपये में शिक्षक की नौकरी कर ली। घरवालों के दबाव में सिपाही भर्ती का फॉर्म भर दिया था, इसलिए परीक्षा देने आ गया।
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अंबेडकरनगर से केशकुमारी बालिका इंटर कॉलेज में परीक्षा देने पहुंचीं अनामिका सिंह दिल्ली के मुखर्जीनगर में पीसीएस की तैयारी कर रही हैं। पूछने पर बताया कि सरकारी नौकरी कोई भी हो, चलेगा। अगर खाकी वर्दी मिल रही है तो सिपाही बनना भी खराब नहीं है, पुलिस वाला रौब तो रहेगा। टांटियानगर बाईपास पर सवारी का इंतजार कर रहे अनुभव गुप्ता बीटेक डिग्रीधारक हैं। बताया कि वह गोरखपुर से आए हैं। पहली पाली की परीक्षा देने के बाद घर जा रहे हैं।
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इसी तरह बहराइच से राम सुभावन भी एमए की डिग्री लेकर सिपाही की परीक्षा देने जीआईसी पहुंचे थे। बताया कि यूपीएससी की तैयारी प्रयागराज में कर रहे थे। 10 साल तैयारी करने के बाद सफलता नहीं मिली। शादी के बाद जिम्मेदारी बढ़ी तो प्रयागराज छोड़कर घर आ गए और एक कोचिंग सेंटर खोलकर बच्चों को पढ़ाने लगे। सरकार ने कोचिंग पर रोक लगा दी तो नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं।
अयोध्या से परीक्षा देने गनपत सहाय डिग्री कॉलेज पहुंचीं सुरभि मिश्रा भी एमबीए डिग्रीधारक हैं। प्राइवेट सेक्टर की एक कंपनी में मार्केटिंग का काम कर रही हैं। बताया कि बहुत मेहनत करने के बाद 18 हजार तक महीना कमा पाती हैं। सिपाही बनने के बाद नौकरी में स्थायित्व तो रहेगा, बस इसी सोच में फाॅर्म भरा था। परीक्षा अच्छी हुई है, आगे जो होगा देखा जाएगा। बाराबंकी की अंजली केएनआईपीएसएस में परीक्षा देने के बाद घर जा रही थीं। पूछने पर बताया कि उन्होंने बीटीसी कर रखी है। घर के पास ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं। तीन हजार रुपये महीना मिलता है। महंगाई के दौर में इतने पैसे से क्या होता है।
गणित के सवालों में चकराए, हिंदी ने दी राहत
बहराइच के रामकेश ने बताया कि वह एमएससी जूलॉजी से हैं। गणित के कुछ सवाल कठिन थे। रीजनिंग ने भी काफी परेशान किया। हालांकि हिंदी के सवालों ने जरूर राहत दी। कुशीनगर के आशू मलिक ने बताया कि पेपर पिछली बार जैसा ही था। कोई दिक्कत नहीं हुई। रीजनिंग में कुछ प्रश्न घुमाकर पूछे गए थे। उनका जवाब देने में दिमाग पर जोर देना पड़ा। बस्ती के ओमप्रकाश ने बताया कि उन्होंने पहली बार पुलिस भर्ती की परीक्षा दी है। पेपर आसान था, कोई दिक्कत नहीं हुई। (संवाद)