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Sultanpur News: सड़कों पर लगे ठेले, वेंडिंग जोन बना पार्किंग
Tue, 28 Nov 2023 12:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Tue, 28 Nov 2023 12:19 AM IST
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सुल्तानपुर। अफसरों ने सांसद को खुश करने के लिए आनन-फानन वेंडिंग जोन शुरू करके वाहवाही तो हासिल कर ली किंतु इसका कोई फायदा वेंडरों को या शहर के आम नागरिकों को नहीं हुआ। बिना किसी पक्की योजना के इस कवायद के चलते वेंडिंग जोन में एक भी दुकान नहीं लग सकी। उल्टे वहां पार्किंग बन गईं और सारे ठेले आज भी सड़क पर जाम लगाने का काम कर रहे हैं।
जीआईसी के पीछे 300 दुकानों के वेंडिंग जोन तक पहुंचने के दो ही प्रमुख रास्ते हैं। एक कोतवाली के बगल से है तो दूसरा गोपालदास पुल के पास से बनाया जाना है। गोपालदास पुल वाला रास्ता अभी बनाया नहीं गया है। कोतवाली के बगल वाले रोड पर कहीं कोई ऐसा इंडीकेटर नहीं है जिससे लोगों को पता चल सके कि भीतर कोई वेंडिंग जोन भी है।
ऐसे में अफसरों की जोर-जबर्दस्ती से जो चंद दुकानें एक दिन लगी भी थीं, उनकी बोहनी की नौबत तक नहीं आई। जिला अस्पताल के पास फल का ठेला लगाने वाले ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि जब वहां एक भी पैसे की बिक्री नहीं होती है तो वहां कोई क्यों जाएगा? यदि प्रशासन जबर्दस्ती करेगा तो एक-दो दिन लोग वहां जाएंगे और फिर सड़क पर भाग आएंगे।
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मेडिकल कॉलेज के पास लगता रहता जाम
वेंडिंग जोन बनने से सबसे ज्यादा राहत मेडिकल कॉलेज जाने वालों को मिलनी थी क्योंकि यहां सड़कों पर सौ से ज्यादा ठेले लगे होने के कारण हर वक्त जाम के हालात बने रहते हैं और एंबुलेंस तक फंसी रहती है। किंतु वेंडिंग जोन बनने के बाद यहां से एक भी दुकान शिफ्ट नहीं हुई जिसकी वजह से समस्या ज्यों का ज्यों बनी है।
इस तरह से बनाई जानी थी योजना
- वेंडिंग जोन तक पहुंचने के हर रास्ते पर एरो बोर्ड लगाकर रास्ता बताया जाता
- दोनों तरफ के रास्ते कम से कम पूरी तरह से दुरुस्त किए जाते
- कम से कम एक क्षेत्र, अस्पताल के पास वाले सारे ठेले हर हाल में वहां शिफ्ट कराए जाते
- नागरिकों के बीच भी माइक लगाकर प्रचार-प्रसार किया जाता
- नियमित रूप से एक सप्ताह या पखवाड़े भर वहां पर मानीटरिंग की जाती
अब करवाएंगे प्रचार-प्रसार
एडीएम प्रशासन पंकज सिंह कहते हैं कि वेंडिंग जोन का प्रचार-प्रसार जरूरी है। जागरूकता से ही लोग वहां जाएंगे। इसके लिए सड़क पर इंडीकेटर भी लगाए जाने पर विचार किया जाएगा। इस बारे में नगर पालिका और सदर एसडीएम से बात करके योजनाबद्ध तरीके से वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया जाएगा।
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जीआईसी के पीछे 300 दुकानों के वेंडिंग जोन तक पहुंचने के दो ही प्रमुख रास्ते हैं। एक कोतवाली के बगल से है तो दूसरा गोपालदास पुल के पास से बनाया जाना है। गोपालदास पुल वाला रास्ता अभी बनाया नहीं गया है। कोतवाली के बगल वाले रोड पर कहीं कोई ऐसा इंडीकेटर नहीं है जिससे लोगों को पता चल सके कि भीतर कोई वेंडिंग जोन भी है।
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ऐसे में अफसरों की जोर-जबर्दस्ती से जो चंद दुकानें एक दिन लगी भी थीं, उनकी बोहनी की नौबत तक नहीं आई। जिला अस्पताल के पास फल का ठेला लगाने वाले ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि जब वहां एक भी पैसे की बिक्री नहीं होती है तो वहां कोई क्यों जाएगा? यदि प्रशासन जबर्दस्ती करेगा तो एक-दो दिन लोग वहां जाएंगे और फिर सड़क पर भाग आएंगे।
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मेडिकल कॉलेज के पास लगता रहता जाम
वेंडिंग जोन बनने से सबसे ज्यादा राहत मेडिकल कॉलेज जाने वालों को मिलनी थी क्योंकि यहां सड़कों पर सौ से ज्यादा ठेले लगे होने के कारण हर वक्त जाम के हालात बने रहते हैं और एंबुलेंस तक फंसी रहती है। किंतु वेंडिंग जोन बनने के बाद यहां से एक भी दुकान शिफ्ट नहीं हुई जिसकी वजह से समस्या ज्यों का ज्यों बनी है।
इस तरह से बनाई जानी थी योजना
- वेंडिंग जोन तक पहुंचने के हर रास्ते पर एरो बोर्ड लगाकर रास्ता बताया जाता
- दोनों तरफ के रास्ते कम से कम पूरी तरह से दुरुस्त किए जाते
- कम से कम एक क्षेत्र, अस्पताल के पास वाले सारे ठेले हर हाल में वहां शिफ्ट कराए जाते
- नागरिकों के बीच भी माइक लगाकर प्रचार-प्रसार किया जाता
- नियमित रूप से एक सप्ताह या पखवाड़े भर वहां पर मानीटरिंग की जाती
अब करवाएंगे प्रचार-प्रसार
एडीएम प्रशासन पंकज सिंह कहते हैं कि वेंडिंग जोन का प्रचार-प्रसार जरूरी है। जागरूकता से ही लोग वहां जाएंगे। इसके लिए सड़क पर इंडीकेटर भी लगाए जाने पर विचार किया जाएगा। इस बारे में नगर पालिका और सदर एसडीएम से बात करके योजनाबद्ध तरीके से वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया जाएगा।