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बर्खास्त शिक्षकों पर केस दर्ज कराने से कतरा रहे बीईओ
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सुल्तानपुर। फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी हासिल करने के आरोप में परिषदीय विद्यालयों के 17 शिक्षकों को अब तक बर्खास्त किया जा चुका है लेकिन उन पर प्राथमिकी दर्ज कराने व धन की रिकवरी कराने को लेकर खंड शिक्षाधिकारी गंभीर नहीं हैं। आधे से अधिक शिक्षकों पर आदेश के बाद भी प्राथमिकी नहीं दर्ज हो सकी है। 10 जुलाई को बेसिक शिक्षा निदेशक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इन प्रकरणों की समीक्षा करेंगे।
फर्जी अंकपत्र लगाकर नौकरी हासिल करने वाले जिले के 17 शिक्षकों की सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया जा चुका है। इसमें धनपतगंज के दो, बल्दीराय के पांच, कादीपुर के चार, मोतिगरपुर के एक, दोस्तपुर के दो, अखंडनगर के एक, लंभुआ के एक व प्रतापपुर कमैचा के एक शिक्षक शामिल हैं।
फर्जी अंकपत्रों की पुष्टि होने के बाद इन शिक्षकों से जवाब तलब किया गया। संतोषजनक जवाब न मिलने और नोटिस के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराने के बाद इन सभी को बर्खास्तगी का नोटिस थमाया गया।
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साथ ही संबंधित खंड शिक्षाधिकारी को यह निर्देश दिया गया था कि फर्जी अभिलेख लगाने के आरोप में इन पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाय। बावजूद इसके 17 में से करीब 10 लोगों पर अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई और न ही रिकवरी की ही समुचित कार्रवाई हो सकी है।
शासन ने फर्जी अभिलेख के सहारे नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज कराकर उसकी प्रति मंगाई है। साथ ही उनकी ओर से वेतन आदि के रूप में प्राप्त की गई धनराशि की वसूली के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत जो आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी की गई है, उसकी भी प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इस प्रकरण में बेसिक शिक्षा निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह की ओर से 10 जुलाई को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की जाएगी।
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फर्जी अंकपत्र लगाकर नौकरी हासिल करने वाले जिले के 17 शिक्षकों की सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया जा चुका है। इसमें धनपतगंज के दो, बल्दीराय के पांच, कादीपुर के चार, मोतिगरपुर के एक, दोस्तपुर के दो, अखंडनगर के एक, लंभुआ के एक व प्रतापपुर कमैचा के एक शिक्षक शामिल हैं।
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फर्जी अंकपत्रों की पुष्टि होने के बाद इन शिक्षकों से जवाब तलब किया गया। संतोषजनक जवाब न मिलने और नोटिस के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराने के बाद इन सभी को बर्खास्तगी का नोटिस थमाया गया।
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साथ ही संबंधित खंड शिक्षाधिकारी को यह निर्देश दिया गया था कि फर्जी अभिलेख लगाने के आरोप में इन पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाय। बावजूद इसके 17 में से करीब 10 लोगों पर अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई और न ही रिकवरी की ही समुचित कार्रवाई हो सकी है।
शासन ने फर्जी अभिलेख के सहारे नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज कराकर उसकी प्रति मंगाई है। साथ ही उनकी ओर से वेतन आदि के रूप में प्राप्त की गई धनराशि की वसूली के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत जो आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी की गई है, उसकी भी प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इस प्रकरण में बेसिक शिक्षा निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह की ओर से 10 जुलाई को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की जाएगी।