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वक्फ संपत्तियों के नाम पर बंद होगी मनमानी

Wed, 21 Sep 2022 11:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Sep 2022 11:51 PM IST
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Arbitrariness will be stopped in the name of Waqf properties
सुल्तानपुर। वक्फ बोर्ड के खाते में करीब साढ़े तीन दशक पहले तक संपत्तियां दर्ज होती रही हैं। इनमें से तमाम संपत्तियों का मनमाना उपयोग हो रहा हैै। मौजूदा समय में जिले में वक्फ के खाते में 926 संपत्तियां दर्ज हैं। शासन के आदेश के बाद अब इन संपत्तियों की जांच की कवायद फिर शुरू हो गई है।
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मुस्लिम समाज की ओर से धार्मिक कार्यों के लिए दान की जाने वाली संपत्तियों का जिले में मनमाना उपयोग किए जाने का चर्चाएं होती रही हैं। जिन कार्यों के लिए संपत्ति दान में दी जाती है, उसके बजाय दूसरे कार्य में उसका प्रयोग किया जा रहा है। कुछ जगह संपत्तियों के उपयोग को लेकर विवाद भी सामने आते रहे हैं। मगर बाद में मामला रफादफा कर दिया गया।
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अब शासन की ओर से इसका संज्ञान लिए जाने के बाद प्रकरण फिर गरमा गया है। शासन के निर्देश पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से कराई गई छानबीन में जिले में वक्फ की 926 संपत्तियां पाई गईं हैं। इसमें अलल औलाद व अलल खैर संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां वर्ष 1988 तक वक्फ बोर्ड के खाते में दर्ज होती रही हैं।
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वक्फ इंस्पेक्टर इफ्तेखार आलम के मुताबिक वर्ष 1988 में वक्फ गजट प्रकाशित होने के बाद जिले में कोई संपत्ति नहीं दर्ज हुई है। दर्ज संपत्तियों के गलत उपयोग व कब्जे के मामले को लेकर शासन की ओर से सर्वे के दिए गए आदेश के बाद प्रशासन जागा है। हालांकि पूर्व में एक बार उपजिलाधिकारियों ने वक्फ संपत्ति को क्लीन चिट दे दी है लेकिन अल्पसंख्यक विभाग की ओर से जिला प्रशासन के जरिए फिर से जांच कराने की कवायद शुरू कर दी गई है।
नए सिरे से छानबीन में कई मामलों के खुलासे की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक कई जगह पर बड़ी वक्फ संपत्तियों पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। कब्जा करके उसका मनमाना उपयोग किया जा रहा हैै। इसमें अलल औलाद व अलल खैर दोनों प्रकार की संपत्तियां शामिल हैं।
अल्पसंख्यक विभाग के मुताबिक धार्मिक कार्य के लिए मुस्लिम समाज के लोगों की ओर से दो प्रकार से संपत्तियां दान की जाती हैं। इसमें पहला अलल औलाद है। अलल औलाद संपत्ति का दान करने वाले के वंशज ही इसके केयरटेकर होते हैं, जबकि अलल खैर संपत्तियों को सार्वजनिक तरीके से उपयोग करने का प्रावधान है। इसका प्रयोग ईदगाह, कर्बला, कब्रिस्तान, दरगाह, मस्जिद व मदरसा के लिए किया जाता है।

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुनीता देवी ने बताया कि शासन की ओर से वक्फ की संपत्ति की जांच का आदेश दिया गया है। जिले में फिलहाल कोई विवाद अभी तक सामने नहीं आया है। जिला प्रशासन के जरिए तहसीलों से फिर वक्फ संपत्तियों की जांच कराई जाएगी।
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