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तीन हजार पहुंची टीबी रोगियों की संख्या
Sultanpur
Updated Fri, 07 Nov 2014 05:30 AM IST
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सुल्तानपुर। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से चलाया जा रहा पुनरीक्षित क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम जिले में फेल हो गया है। जिले में क्षय रोगियों खासकर एमडीआर रोगियों की लगातार बढ़ती संख्या इसकी पुष्टि कर रही है। स्थिति यह है कि मौजूदा वर्ष में ही टीबी के रोगियों की संख्या तीन हजार के करीब पहुंच गई है जबकि एमडीआर रोगियों की संख्या 36 से अधिक हो गई है। चपेट में आए 80 से अधिक रोगियों की मौतें हो चुकी हैं।
तपेदिक यानि कि टीबी रोग के उन्मूलन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से चलाया गया पुनरीक्षित क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम जिले में तकरीबन फेल हो गया है। इसके पीछे विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से रोग उन्मूलन के लिए तैयार की गई प्रणाली का ध्वस्त होना बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इसी वजह से जिले में लगातार टीबी के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो मौजूदा समय में जिले में टीबी के रोगियों की संख्या करीब तीन हजार पहुंच गई है। इनमें करीब 32 मरीज ऐसे हैं जो एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस) किस्म के हैं। टीबी में एमडीआर सबसे खतरनाक माना जाता है। एमडीआर के शिकार हुए 80 से अधिक मरीजों की मौत भी हो
चुकी है।
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तपेदिक यानि कि टीबी रोग के उन्मूलन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से चलाया गया पुनरीक्षित क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम जिले में तकरीबन फेल हो गया है। इसके पीछे विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से रोग उन्मूलन के लिए तैयार की गई प्रणाली का ध्वस्त होना बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इसी वजह से जिले में लगातार टीबी के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो मौजूदा समय में जिले में टीबी के रोगियों की संख्या करीब तीन हजार पहुंच गई है। इनमें करीब 32 मरीज ऐसे हैं जो एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस) किस्म के हैं। टीबी में एमडीआर सबसे खतरनाक माना जाता है। एमडीआर के शिकार हुए 80 से अधिक मरीजों की मौत भी हो
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