खतरे में सपा की मुस्लिम सियासत!

अमर उजाला, देवबंद Updated Tue, 24 Sep 2013 08:44 AM IST
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मुजफ्फरनगर में हुई सांप्रदायिक हिंसा का असर समाजवादी पार्टी की मुस्लिम सियासत पर पड़ने लगा है। दंगों में प्रदेश सरकार की भूमिका से खफा आल इंडिया तंजीम उलेमा-ए-हक ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को पत्र भेजकर उन्हें दिया गया सम्मान वापस मांगा है।
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मुलायम सिंह को संस्था की ओर से नई दिल्ली में ‘राम मनोहर लोहिया’ नामक यह अवार्ड वर्ष 2010 में दिया गया है। संस्था द्वारा सामाजिक कार्यों और अल्पसंख्यक हितैषी विचारों के लिए वर्ष 2008 से यह अवार्ड प्रदान किया जाता है और अब तक पूर्व केंद्रीय मंत्री समेत पांच हस्तियां इससे सम्मानित हो चुके हैं।


सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम सियासत को मुजफ्फरनगर दंगे की आंच झुलसाने लगी है। दंगे को लेकर देवबंदी उलेमा मुलायम से पहले से ही खफा दिख रहे थे। अब दूसरी मुस्लिम जमातों ने भी मुलायम सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

इसी क्रम में अब आल इंडिया तंजीम उलेमा-ए-हक संस्था ने मुलायम सिंह को पत्र भेजकर उन्हें वर्ष 2010 में प्रदान किया गया ‘राम मनोहर लोहिया’ अवार्ड वापस मांग लिया है। अवार्ड वापस लिए जाने को मुजफ्फरनगर दंगों में सरकार की भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।

सोमवार को दारुल उलूम पहुंचे आल इंडिया तंजीम उलेमा-ए-हक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना ऐजाज उर्फी कासमी ने कहा कि यूपी विशेषकर मुजफ्फरनगर दंगे में सपा की जो भूमिका निकलकर सामने आई है, उससे साफ है कि सपा सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से मुसलमानों पर अत्याचार किए।

दंगों के दौरान मुलायम सिंह का चेहरा नरेंद्र मोदी की शक्ल में सामने आया और उन्होंने अल्पसंख्यक शत्रुता में मोदी को भी पछाड़ दिया। उन्होंने बताया कि मुसलमानों के बलबूते यूपी में सत्ता पर काबिज होने वाली सपा सरकार में मुसलमानों पर जुल्म की इंतहा हो गई है।

इसे देखते हुए उन्होंने मुलायम सिंह को रविवार को पत्र भेजकर अपने दिए सम्मान के लिए उन्हें अयोग्य करार दिया है। इसीलिए मुलायम सिंह से 18 अप्रैल 2010 को नई दिल्ली में हुए अखिल भारतीय शिक्षा सम्मेलन में उन्हें दिए गए ‘राम मनोहर लोहिया’ अवार्ड को लौटाने को कहा है।

उन्होंने बताया कि मुलायम सिंह को अवार्ड के तहत दिए गए स्मृति चिह्न तथा प्रमाण पत्र दस दिन के भीतर वापस लौटाने को कहा गया है। यदि तय समय के भीतर सम्मान नहीं लौटाया जाता तो संस्था द्वारा प्रेस कांफ्रेंस कर उनसे यह सम्मान वापस लिए जाने की विधिवत घोषणा की जाएगी।

ये है सम्मान
संस्था द्वारा वर्ष 2008 में सामाजिक कार्यों और अल्पसंख्यक हितैषी विचार रखने वाली हस्तियों को सम्मानित करने के लिए ‘राम मनोहर लोहिया’ अवार्ड की घोषणा की गई थी। स्थापना वर्ष में ही सबसे पहले यह सम्मान कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री आस्कर फर्नांडीज को दिया गया था।

इसके बाद वर्ष 2009 में सपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव अमर सिंह, वर्ष 2010 में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को, वर्ष 2011 में अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन सुहैल ऐजाज सिद्दीकी तथा वर्ष 2012 में वरिष्ठ पत्रकार डा. अजीज बर्नी को प्रदान किया जा चुका है।

अवार्ड के तहत नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित हस्ती को संस्था की ओर से स्मृति चिह्न तथा प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।

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