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समृद्धि की कामना
अमर उजाला ब्यूरो (सोनभद्र)
Updated Tue, 09 Feb 2016 12:01 AM IST
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जिले भर में अखंड सौभाग्य एवं सुख समृद्धि की कामना के लिए सोमावती
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अमावस्या पर सोमवार की भोर से ही महिलाओं ने पीपल वृक्ष की 108 बार
परिक्रमा की। अपनी सामर्थ्य के अनुसार प्रसाद स्वरूप तिल, गुड़, चना की
दाल, फल-फूल चढ़ाया। कहानी सुनने के बाद हवन करके, पुरोहितों को दान
दक्षिणा देकर भोजन भी कराया।
सोमावती अमावस्या पर राबर्ट्सगंज सिविल लाइंस रोड स्थित अनुसंधान कालोनी गेट पर स्थित पीपल वृक्ष की महिलाओं ने प्रात: चार बजे भोर से ही पूजन-अर्चन कर कच्चा धागा से फेरा लगाकर पीपल वृक्ष की 108 बार परिक्रमा में जूटी रही। देखते ही देखते सुबह तक परिक्रमा करने के लिए महिलाओं का तांता लग गया
इसी प्रकार से न्यू कालोनी स्थित हरदा बाबा मंदिर के पास, हाइडिल मैदान के पास स्थित दंडइत बाबा मंदिर परिसर, सिंचाई कालोनी, चंडी होटल, धर्मशाला, घोरावल बस स्टैंड पर सुबह से ही पीपल वृक्ष की परिक्रमा के लिए महिलाओं का तांता लगा रहा।
परिक्रमा करने पहुंची चंद्रशीला, सुमन, सुनीता, सुशीला, उषा, संगीता, आशा आदि का कहना है कि अखंड सौभाग्य और सुख समृद्धि के लिए निराहार व्रत रहकर पीपल वृक्ष की 108 बार परिक्रमा की जाती है। परिक्रमा करते समय मौन रहना पड़ता है।
इस व्रत को करने वाली महिलाएं सुबह स्नान के समय से ही मौन रहती हैं। जब तक पीपल वृक्ष की परिक्रमा पूर्ण नहीं हो जाती तब तक मौन ही रहना पड़ता है। कहानी सुनने और हवन के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है।
सोमावती अमावस्या पर राबर्ट्सगंज सिविल लाइंस रोड स्थित अनुसंधान कालोनी गेट पर स्थित पीपल वृक्ष की महिलाओं ने प्रात: चार बजे भोर से ही पूजन-अर्चन कर कच्चा धागा से फेरा लगाकर पीपल वृक्ष की 108 बार परिक्रमा में जूटी रही। देखते ही देखते सुबह तक परिक्रमा करने के लिए महिलाओं का तांता लग गया
इसी प्रकार से न्यू कालोनी स्थित हरदा बाबा मंदिर के पास, हाइडिल मैदान के पास स्थित दंडइत बाबा मंदिर परिसर, सिंचाई कालोनी, चंडी होटल, धर्मशाला, घोरावल बस स्टैंड पर सुबह से ही पीपल वृक्ष की परिक्रमा के लिए महिलाओं का तांता लगा रहा।
परिक्रमा करने पहुंची चंद्रशीला, सुमन, सुनीता, सुशीला, उषा, संगीता, आशा आदि का कहना है कि अखंड सौभाग्य और सुख समृद्धि के लिए निराहार व्रत रहकर पीपल वृक्ष की 108 बार परिक्रमा की जाती है। परिक्रमा करते समय मौन रहना पड़ता है।
इस व्रत को करने वाली महिलाएं सुबह स्नान के समय से ही मौन रहती हैं। जब तक पीपल वृक्ष की परिक्रमा पूर्ण नहीं हो जाती तब तक मौन ही रहना पड़ता है। कहानी सुनने और हवन के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है।