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बाणसागर से छोड़ा जाएगा पानी
ब्यूरो/अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Mon, 30 May 2016 11:47 PM IST
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चोपन स्थित सोन नदी, जिसमें बाणसागर बांध से छोड़ा जाना है पानी।
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जिला प्रशासन ने जिले में पानी के गंभीर संकट को देखते हुए मध्य प्रदेश स्थित बाणसागर से पानी छोड़े जाने की मांग की है। जिलाधिकारी सीबी सिंह ने सोन नदी में एक हजार क्यूसेक पानी छोड़ने के लिए संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। बाणसागर से सोन नदी में पानी छोड़ने से काफी हद तक पानी का संकट दूर हो जाएगा।
जिले का अधिकांश क्षेत्रफल वनों और पहाड़ों से आच्छादित है।
जिले की सीमा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और बिहार से सटी हुई है। कई वर्षों से कम बारिश होने और भीषण गर्मी के चलते जिले की 14 नदियों में से पांगन, मलिया, अजीर, लैरा, बेलन, लउवा, बकहर, कर्मनाशा और ठेमा नदियां सूख गई हैं। नदियों के सूखने से तेजी से जलस्तर नीचे खिसक रहा है। इस नाते पानी का संकट और भी गंभीर हो गया है। राबर्ट्सगंज, घोरावल और दुद्धी तहसील क्षेत्र में इंडिया मार्का के लगे करीब 35 हजार हैंडपंपों में से लगभग 15 हजार हैंडपंपों ने पानी छोड़ दिया है।
जिससे पानी का संकट विकराल रूप धारण कर लिया है। अधिकांश बांध, चेकडेम और तालाबों के सूखने से पशु, पक्षी भी पानी के लिए बेहाल हो गए है। जंगली क्षेत्र पानी के अभाव में जीव, जंतु, पशु और पक्षी दम तोड़ने लगे हैं। पानी की संकट से जूझ रहे पहाड़ी इलाकों के रहवासियों ने पलायन करना शुरू कर दिया है।
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हालांकि पानी की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए जिलाधिकारी सीबी सिंह ने शासन को बाणसागर से एक हजार क्यूसेक पानी सोन नदी में छोड़े जाने के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने उच्चाधिकारियों को वर्तमान में नदियों और बांध आदि के सूखने से पानी किल्लत को भी अवगत कराया है।
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जिले का अधिकांश क्षेत्रफल वनों और पहाड़ों से आच्छादित है।
जिले की सीमा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और बिहार से सटी हुई है। कई वर्षों से कम बारिश होने और भीषण गर्मी के चलते जिले की 14 नदियों में से पांगन, मलिया, अजीर, लैरा, बेलन, लउवा, बकहर, कर्मनाशा और ठेमा नदियां सूख गई हैं। नदियों के सूखने से तेजी से जलस्तर नीचे खिसक रहा है। इस नाते पानी का संकट और भी गंभीर हो गया है। राबर्ट्सगंज, घोरावल और दुद्धी तहसील क्षेत्र में इंडिया मार्का के लगे करीब 35 हजार हैंडपंपों में से लगभग 15 हजार हैंडपंपों ने पानी छोड़ दिया है।
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जिससे पानी का संकट विकराल रूप धारण कर लिया है। अधिकांश बांध, चेकडेम और तालाबों के सूखने से पशु, पक्षी भी पानी के लिए बेहाल हो गए है। जंगली क्षेत्र पानी के अभाव में जीव, जंतु, पशु और पक्षी दम तोड़ने लगे हैं। पानी की संकट से जूझ रहे पहाड़ी इलाकों के रहवासियों ने पलायन करना शुरू कर दिया है।
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हालांकि पानी की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए जिलाधिकारी सीबी सिंह ने शासन को बाणसागर से एक हजार क्यूसेक पानी सोन नदी में छोड़े जाने के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने उच्चाधिकारियों को वर्तमान में नदियों और बांध आदि के सूखने से पानी किल्लत को भी अवगत कराया है।