{"_id":"577414e34f1c1ba32c79be8a","slug":"warning-employees-to-resist","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्मचारियों ने विरोध करने की दी चेतावनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्मचारियों ने विरोध करने की दी चेतावनी
ब्यूरो,अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Thu, 30 Jun 2016 12:05 AM IST
विज्ञापन
चंडीगढ़ क्लब में डेविस क्लब मुकाबलों की तैयारियों का जायजा लेने पहुंची टीम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए सातवें वेतन आयोग का मसौदा केंद्रीय कर्मियों को रास नहीं आ रहा है। इसके विरोध में कर्मचारी 11 जुलाई से देशव्यापी हड़ताल करने की चेतावनी दे रहे हैं। कर्मियों का कहना है कि महज वेतन में 14 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई और इसे भत्तों को भी जोड़कर 23 फीसदी की जादूगरी की जा रही है। उधर, राज्य कर्मियों ने राज्य में भी सातवें वेतन आयोग लागू होने की उम्मीद की है, लेकिन केंद्रीय मसौदे के प्रावधान में जरूरी फेरबदल के बाद ही इसे स्वीकार करने की बात कही।
चोपन में तैनात रेलवे कर्मचारी एवं पूर्व मध्य रेलवे कर्मचारी यूनियन के चोपन शाखा सचिव एसके राय का कहना था कि छठवें वेतन आयोग में 52, पांचवें वेतन आयोग में 40 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी लेकिन सातवें वेतन आयोग में इसे काफी कम कर दिया गया था। केंद्रीय कर्मचारी मुकेश ने कहा कि नई पेंशन नीति को हटाकर पुरानी पेंशन नीति लागू करने और न्यूनतम वेतन 26 हजार किए जाने की मांग की गई थी लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। उधर, राज्य कर्मियों ने भी केंद्रीय मसौदे को गलत ठहराया है।
राज्य विद्युत जूनियर इंजीनियर संगठन के क्षेत्रीय सचिव इं. सुरेश सिंह कहते हैं कि वेतन के साथ भत्तों को भी अलग-अलग अपग्रेड किया जाना चाहिए। ना कि उसे एक साथ जोड़ दिया जाए। 52 भत्तों में कटौती के मसौदे को भी गलत बताया। इसी संगठन के केंद्रीय संचालन समिति इं. केके मिश्रा की भी कुछ यहीं राय है। कहते हैं कि राज्य में भी सातवां वेतन आयोग लागू होना चाहिए, लेकिन उसमें कर्मियों के सभी हित का ख्याल रखा जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
चोपन में तैनात रेलवे कर्मचारी एवं पूर्व मध्य रेलवे कर्मचारी यूनियन के चोपन शाखा सचिव एसके राय का कहना था कि छठवें वेतन आयोग में 52, पांचवें वेतन आयोग में 40 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी लेकिन सातवें वेतन आयोग में इसे काफी कम कर दिया गया था। केंद्रीय कर्मचारी मुकेश ने कहा कि नई पेंशन नीति को हटाकर पुरानी पेंशन नीति लागू करने और न्यूनतम वेतन 26 हजार किए जाने की मांग की गई थी लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। उधर, राज्य कर्मियों ने भी केंद्रीय मसौदे को गलत ठहराया है।
विज्ञापन
राज्य विद्युत जूनियर इंजीनियर संगठन के क्षेत्रीय सचिव इं. सुरेश सिंह कहते हैं कि वेतन के साथ भत्तों को भी अलग-अलग अपग्रेड किया जाना चाहिए। ना कि उसे एक साथ जोड़ दिया जाए। 52 भत्तों में कटौती के मसौदे को भी गलत बताया। इसी संगठन के केंद्रीय संचालन समिति इं. केके मिश्रा की भी कुछ यहीं राय है। कहते हैं कि राज्य में भी सातवां वेतन आयोग लागू होना चाहिए, लेकिन उसमें कर्मियों के सभी हित का ख्याल रखा जाना चाहिए।
विज्ञापन