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Sonebhadra News: केबल न बदलने से क्षुब्ध ग्रामीणों ने किया घेराव
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स्थानीय थाना क्षेत्र के रनटोला गांव में रेलवे लाइन के नीचे से गुजरे 11 हजार विद्युत क्षमता के केबल के जलने से कई दिनों से विद्युत आपूर्ति ठप है। इसे लेकर विभागीय स्तर पर ग्रामीणों ने शिकायत की है, लेकिन अभी तक इसकी मरम्मत नहीं हुई। इससे क्षुब्ध ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान की अगुवाई में शनिवार को जिम्मेदारों का घेराव किया।
ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल ने कहा कि रेलवे के दोहरीकरण कार्य में लगी कंपनी द्वारा ब्लास्टिंग का कार्य किया जा रहा है, ऐसे में किसकी वजह से यह केबल जली है यह स्पष्ट होना चाहिए और तत्काल इसकी मरम्मत हो तभी विद्युत आपूर्ति बहाल हो पाएगी। ग्राम प्रधान ने बताया कि मौके पर दोहरीकरण के विस्तार में लगी कंपनी जीडीसीएल और रेलवे तथा बिजली विभाग के लोगों को बुलाया गया था, लेकिन बिजली विभाग के लोगों के न आने से मरम्मत को लेकर निर्णय नहीं हो सका। ऐसे में ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है। इससे पूर्व 25 नवंबर को ही पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद मण्डल के गढ़वा से चोपन तक चल रहे रेलवे के दोहरीकरण कार्य के दौरान ग्यारह हजार विद्युत क्षमता के केबल कटने की वजह से रनटोला गांव में अंधेरा छाया हुआ है। इस वजह से रेलवे स्टेशन की भी बत्ती गुल हो गई है। रेलवे स्टेशन का काम तो रेलवे की बिजली से चल जा रहा है, लेकिन कॉलोनी व गांव के अन्य इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। दोहरीकरण कार्य के दौरान ही किसी समय ग्यारह हजार विद्युत क्षमता के केबल जो पटरी के नीचे से आए हुए हैं के जल जाने की वजह से आपूर्ति प्रभावित हो गई।
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ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल ने कहा कि रेलवे के दोहरीकरण कार्य में लगी कंपनी द्वारा ब्लास्टिंग का कार्य किया जा रहा है, ऐसे में किसकी वजह से यह केबल जली है यह स्पष्ट होना चाहिए और तत्काल इसकी मरम्मत हो तभी विद्युत आपूर्ति बहाल हो पाएगी। ग्राम प्रधान ने बताया कि मौके पर दोहरीकरण के विस्तार में लगी कंपनी जीडीसीएल और रेलवे तथा बिजली विभाग के लोगों को बुलाया गया था, लेकिन बिजली विभाग के लोगों के न आने से मरम्मत को लेकर निर्णय नहीं हो सका। ऐसे में ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है। इससे पूर्व 25 नवंबर को ही पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद मण्डल के गढ़वा से चोपन तक चल रहे रेलवे के दोहरीकरण कार्य के दौरान ग्यारह हजार विद्युत क्षमता के केबल कटने की वजह से रनटोला गांव में अंधेरा छाया हुआ है। इस वजह से रेलवे स्टेशन की भी बत्ती गुल हो गई है। रेलवे स्टेशन का काम तो रेलवे की बिजली से चल जा रहा है, लेकिन कॉलोनी व गांव के अन्य इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। दोहरीकरण कार्य के दौरान ही किसी समय ग्यारह हजार विद्युत क्षमता के केबल जो पटरी के नीचे से आए हुए हैं के जल जाने की वजह से आपूर्ति प्रभावित हो गई।
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