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मासूम बच्ची समेत दो लोगों की पानी में डूबने से मौत
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चौना और करकच्छी गांव में शुक्रवार को मासूम बच्ची समेत दो लोगों की पानी में डूबने से मौत हो गई। बच्ची की मौत पर परिजनों ने सीएचसी बभनी में जमकर हंगामा किया। उनका आरोप था कि स्वास्थ्य कर्मी डीजे की धुन पर नाचते रहे और बच्ची तड़पती रही। समय से उपचार न होने के कारण बच्ची की मौत हो गई। उन्होंने सीएमओ से मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
चौना निवासी शिवकुमार (26) पुत्र रामजीत शुक्रवार को गांव में होली खेलने के बाद रात आठ बजे घर लौटा। इसके बाद वह कुएं पर स्नान करने के लिए चला गया। कुएं से पानी भरते समय उसका पैर फिसल गया और वह कुएं में गिर गया। आसपास के लोगों ने किसी तरह उसे कुएं से बाहर निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
उधर करकच्छी गांव में तीन साल की मासूम बच्ची सुमन पुत्री श्याम लाल अपने घर के पास खेल रही थी। खेलते-खेलते बच्ची घर के बगल में स्थित नहर में जा गिरी। जानकारी होने पर लोगों ने उसे नहर से निकाला और तत्काल उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बभनी लेकर पहुंचे। डाक्टर ने बच्ची को देखा और मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल आने तक बच्ची जिंदा थी। अस्पताल में डीजे बज रहा था। सभी कर्मचारी डीजे में मस्त थे। अगर समय से बच्ची को उपचार मिल जाता तो जान बच सकती थी। समय से उपचार न होने पर परिवार के लोग हंगामा करने लगे। मामला गंभीर होता देख स्वास्थ्य कर्मियों ने समझा-बुझाकर शांत कराया। डाक्टर अरविंद कुमार ने कहा कि बच्ची को देखने में कोई लापरवाही नहीं किया गया है। अस्पताल पहुंचने से पहले बच्ची की मौत हो चुकी थी। प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी भिजवा दिया।
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चौना निवासी शिवकुमार (26) पुत्र रामजीत शुक्रवार को गांव में होली खेलने के बाद रात आठ बजे घर लौटा। इसके बाद वह कुएं पर स्नान करने के लिए चला गया। कुएं से पानी भरते समय उसका पैर फिसल गया और वह कुएं में गिर गया। आसपास के लोगों ने किसी तरह उसे कुएं से बाहर निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
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उधर करकच्छी गांव में तीन साल की मासूम बच्ची सुमन पुत्री श्याम लाल अपने घर के पास खेल रही थी। खेलते-खेलते बच्ची घर के बगल में स्थित नहर में जा गिरी। जानकारी होने पर लोगों ने उसे नहर से निकाला और तत्काल उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बभनी लेकर पहुंचे। डाक्टर ने बच्ची को देखा और मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल आने तक बच्ची जिंदा थी। अस्पताल में डीजे बज रहा था। सभी कर्मचारी डीजे में मस्त थे। अगर समय से बच्ची को उपचार मिल जाता तो जान बच सकती थी। समय से उपचार न होने पर परिवार के लोग हंगामा करने लगे। मामला गंभीर होता देख स्वास्थ्य कर्मियों ने समझा-बुझाकर शांत कराया। डाक्टर अरविंद कुमार ने कहा कि बच्ची को देखने में कोई लापरवाही नहीं किया गया है। अस्पताल पहुंचने से पहले बच्ची की मौत हो चुकी थी। प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी भिजवा दिया।
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