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Sonebhadra News: जो ट्रक सोनभद्र आए ही नहीं, उनसे दिखाई गई कफ सिरप की आपूर्ति
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कफ सिरप तस्करी...
जो ट्रक सोनभद्र आए ही नहीं, उनसे दिखाई गई कफ सिरप की आपूर्ति
- सोनभद्र से भदोही कनेक्शन में भी फर्जी तरीके से तस्करी का हुआ खेल, एसआईटी खंगाल रही सुराग
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनभद्र। कफ सिरप तस्करी को लेकर जांच में जुटी एसआईटी हो कई अहम जानकारियां लगी हैं। सिरप की ढुलाई के लिए ऐसी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के कागजात लगाए गए हैं, जिन्होंने ढुलाई की ही नहीं। सोनभद्र में एक ऐसी फर्म से सिरप की आपूर्ति दिखा दी गई, जिससे सिरप में वाराणसी मंगाकर स्टोर किया गया था। बाद में उसी फर्म के कागज से सोनभद्र, भदोही में आपूर्ति दर्शाई गई। इस तरह की आपूर्ति कहां-कहां की गई है, इसकी जांच एसआईटी कर रही है।
बता दें कि रांची से लेकर दिल्ली से जुड़े कफ तस्करी नेटवर्क का पूर्वांचल से बड़़ा कनेक्शन सामने आया है। सरगना शुभम के वाराणसी रहने के कारण जहां यहां की कई फर्माें की भूमिका प्रमुख रूप से सामने आई है। वहीं इस कफ तस्करी के तार वाराणसी से कानपुर, गाजियाबाद के साथ ही राजधानी लखनऊ से प्रमुख रूप से जुड़े पाए गए हैं। महज सोनभद्र में फर्जी तरीके से दो फर्में खोलकर साढ़े सात लाख से अधिक सिरप खपाने की बात सामने आई है। यह भी पता चला है कि सोनभद्र में की गई आपूर्ति को उसी दिन भदोही में भी होना दिखाया गया है। भदोही में पूर्वांचल के अन्य जनपदों से भी कफ सिरप लाकर खपाया गया। एक तरफ जहां कफ सिरप की फर्जी आपूर्ति सामने आई है। वहीं कागज पर कई ऐसे ट्रांसपोर्टरों से सिरप ढुलाई कराई गई, जिन्होंने कभी ट्रांसपोर्टिंग का काम ही नहीं किया या फिर कभी उनके वाहन उस जनपद में गए ही नहीं।
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कागज पर चलती रहीं फर्में, जिम्मेदार बने रहे उदासीन :
एक तरफ सिरप आपूर्ति से जुड़ी फर्में कागज पर चलाई जाती रहीं। वहीं दूसरी तरफ तत्कालीन जिम्मेदार उदासीन बने रहे। नियमानुसार माह भर के भीतर नई फर्म का भौतिक सत्यापन हो जाना चाहिए लेकिन जिस तरह की जानकारियां सामने आई हैं उससे पता चला है कि अपने ही यहां पंजीकृत फर्म का वजूद तलाशने के लिए औषधि निरीक्षकों को गली-गली भटकना पड़ा। कई ऐसे फर्म ऐसी मिली हैं, जिनका दर्शाए गए पते पर कोई वजूद नहीं मिल पाया। संचालक भी मोबाइल फोन बंद कर गायब हो गए हैं।
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नई मेडिकल फर्मों को लाइसेंस जारी करने के 15 दिन के भीतर भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। उस समय किन लोगों ने लाइसेंस जारी किया था और किसने भौतिक सत्यापन किया था, इसका डेटा वेबसाइट बदलने के कारण खत्म हो गया है। इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। - मुकेश पालीवाल, असिस्टेंट कमिश्नर, ड्रग।
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सोनभद्र में जिस ट्रांसपोर्टिंग कंपनी के जरिये कफ सिरप की आपूर्ति दिखाई गई है, उससे एसआईटी को पता चला कि संबंधित ट्रांसपोर्टिंग कंपनी की कभी सेवा नहीं ली गई। वाराणसी में कफ सिरप की आपूर्ति की गई थी, उसी से जुड़े कागजात लगा दिए गए। एसआईटी को पूरे प्रकरण की जांच के लिए कहा गया है। - अभिषेक वर्मा, एसपी।
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जो ट्रक सोनभद्र आए ही नहीं, उनसे दिखाई गई कफ सिरप की आपूर्ति
- सोनभद्र से भदोही कनेक्शन में भी फर्जी तरीके से तस्करी का हुआ खेल, एसआईटी खंगाल रही सुराग
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनभद्र। कफ सिरप तस्करी को लेकर जांच में जुटी एसआईटी हो कई अहम जानकारियां लगी हैं। सिरप की ढुलाई के लिए ऐसी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के कागजात लगाए गए हैं, जिन्होंने ढुलाई की ही नहीं। सोनभद्र में एक ऐसी फर्म से सिरप की आपूर्ति दिखा दी गई, जिससे सिरप में वाराणसी मंगाकर स्टोर किया गया था। बाद में उसी फर्म के कागज से सोनभद्र, भदोही में आपूर्ति दर्शाई गई। इस तरह की आपूर्ति कहां-कहां की गई है, इसकी जांच एसआईटी कर रही है।
बता दें कि रांची से लेकर दिल्ली से जुड़े कफ तस्करी नेटवर्क का पूर्वांचल से बड़़ा कनेक्शन सामने आया है। सरगना शुभम के वाराणसी रहने के कारण जहां यहां की कई फर्माें की भूमिका प्रमुख रूप से सामने आई है। वहीं इस कफ तस्करी के तार वाराणसी से कानपुर, गाजियाबाद के साथ ही राजधानी लखनऊ से प्रमुख रूप से जुड़े पाए गए हैं। महज सोनभद्र में फर्जी तरीके से दो फर्में खोलकर साढ़े सात लाख से अधिक सिरप खपाने की बात सामने आई है। यह भी पता चला है कि सोनभद्र में की गई आपूर्ति को उसी दिन भदोही में भी होना दिखाया गया है। भदोही में पूर्वांचल के अन्य जनपदों से भी कफ सिरप लाकर खपाया गया। एक तरफ जहां कफ सिरप की फर्जी आपूर्ति सामने आई है। वहीं कागज पर कई ऐसे ट्रांसपोर्टरों से सिरप ढुलाई कराई गई, जिन्होंने कभी ट्रांसपोर्टिंग का काम ही नहीं किया या फिर कभी उनके वाहन उस जनपद में गए ही नहीं।
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कागज पर चलती रहीं फर्में, जिम्मेदार बने रहे उदासीन :
एक तरफ सिरप आपूर्ति से जुड़ी फर्में कागज पर चलाई जाती रहीं। वहीं दूसरी तरफ तत्कालीन जिम्मेदार उदासीन बने रहे। नियमानुसार माह भर के भीतर नई फर्म का भौतिक सत्यापन हो जाना चाहिए लेकिन जिस तरह की जानकारियां सामने आई हैं उससे पता चला है कि अपने ही यहां पंजीकृत फर्म का वजूद तलाशने के लिए औषधि निरीक्षकों को गली-गली भटकना पड़ा। कई ऐसे फर्म ऐसी मिली हैं, जिनका दर्शाए गए पते पर कोई वजूद नहीं मिल पाया। संचालक भी मोबाइल फोन बंद कर गायब हो गए हैं।
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नई मेडिकल फर्मों को लाइसेंस जारी करने के 15 दिन के भीतर भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। उस समय किन लोगों ने लाइसेंस जारी किया था और किसने भौतिक सत्यापन किया था, इसका डेटा वेबसाइट बदलने के कारण खत्म हो गया है। इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। - मुकेश पालीवाल, असिस्टेंट कमिश्नर, ड्रग।
सोनभद्र में जिस ट्रांसपोर्टिंग कंपनी के जरिये कफ सिरप की आपूर्ति दिखाई गई है, उससे एसआईटी को पता चला कि संबंधित ट्रांसपोर्टिंग कंपनी की कभी सेवा नहीं ली गई। वाराणसी में कफ सिरप की आपूर्ति की गई थी, उसी से जुड़े कागजात लगा दिए गए। एसआईटी को पूरे प्रकरण की जांच के लिए कहा गया है। - अभिषेक वर्मा, एसपी।