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मिनी हाइड्रो प्रोजेक्ट के संचालन में फंसा पेच

Sun, 06 Nov 2016 11:05 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, सोनभद्र
ब्यूरो, अमर उजाला, सोनभद्र Updated Sun, 06 Nov 2016 11:05 PM IST
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Trapped in operation treadle
आधे शहर की बिजली गुल - फोटो : अमर उजाला
तापीय बिजली संयंत्र के शीतलन के बाद छोड़े जाने वाले पानी से बिजली पैदा करने वाला प्रदेश का पहला मिनी प्रोजेक्ट फाइलों के दांव-पेंच में उलझकर रह गया है। करीब एक साल से एनटीपीसी रिहंद प्रबंधन रिहंद में स्थापित किए जाने वाले हाइड्रा प्रोजेक्ट से पैदा होने वाली बिजली को पीसीएल की स्थानीय लाइन से जोड़ने की अनुमति मांग रहा है। अधिकारी लखनऊ तक का कई चक्कर लगा चुके हैं लेकिन  इसकी अनुमति नहीं मिल पाई है।
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एनटीपीसी रिहंद अपने यहां शीतलन के बाद छोड़े जाने वाले बिजली से तीन मेगावाट बिजली पैदा करेगा। इसके लिए जरूरी स्ट्रक्चर के साथ ही परियोजना स्तर पर होने वाली औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी है। चूंकि पांच मेगावाट से कम प्रोजेक्ट की बिजली ग्रिड की बजाय सीधे लोकल लाइन से जुड़ती है। इसके लिए यूपी पीसीएल की अनुमति जरूरी है। उधर, अपर महाप्रबंधक तकनीकी संचालन जीसी पांडेय का कहना है कि उन्होंने जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर कई महीने पहले ही फाइल पीसीएल को दे दी।
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एमडी से लखनऊ जाकर मुलाकात की। वहां से अनुमति के लिए फाइल जिले में भेजी गई। यहां के अफसरों से भी मुलाकात की। इसके लिए दो-तीन बार लखनऊ गए लेकिन अभी तक सिवाय आश्वासन के कुछ हासिल नहीं हुआ है। इसके चलते हाइड्रा प्रोजेक्ट का संचालन फंसा हुआ है। जब तक अनुमति नहीं मिलेगी, तब तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सकेगा। वहीं अधीक्षण अभियंता सुभाषचंद्र यादव का कहना था कि रिहंद हाइड्रा प्रोजेक्ट से संबंधित ऐसी कोई फाइल उनके संज्ञान में नहीं है।
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