{"_id":"574875354f1c1b2f2d692bdd","slug":"tied-to-the-land-of-illegal-construction","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंधी की भूमि पर अवैध निर्माण्ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंधी की भूमि पर अवैध निर्माण्ा
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Fri, 27 May 2016 10:06 PM IST
विज्ञापन
राबर्ट्सगंज ब्लॉक के अमौली बंधी में बने अवैध मकान।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करीब पांच दशक पूर्व सिंचाई के लिए बनी अमौली बंधी में अब कच्चे मकान बन गए हैं। क्षेत्रीय लोगों ने बंधी के सूखते ही उसमें घर बना लिए। इतना ही नहीं खेती के लिए जमीनों पर अतिक्रमण कर लिया। बंधी डिवीजन और वन विभाग के अफसरों ने इसकी सुधि तक नहीं ली। वन्य जीव क्षेत्र के वार्डेन ओमकार केसरवानी ने इसकी जानकारी से इनकार किया और इसकी जांच कराने की बात कही।
सदर ब्लॉक के बघुआरी गांव के पास अमौली बंधी का निर्माण कराया गया था। यह सेंचूरी एरिया में है। इस बंधी से बघुआरी, तिलौली, अमौली, पापी, महुआर, सेमरा, निपराज आदि गांवों में सिंचाई होती थी। इसके लिए नहर भी बनाई गई, लेकिन नहरों की सफाई न होने से वे बेकार हो गई हैं। उसमें घास के साथ बेहया जम गया है। सूखे की मार के चलते बंधी भी पूरी तरह से सूख गई है। अब इस बंधी में खाली पड़ी जमीन पर आसपास के लोगों ने कब्जा जमा लिया है। लोगों ने कच्चे मकान तो बना लिए ही हैं, साथ ही खेती के लिए भी जमीनों पर अतिक्रमण कर लिया है। बंधी में दूर-दूर घर बने हैं। यहां अतिक्रमण कर घर बनाने वाले घुरफेक्कन, सोनिया, मोहन, बेचन, तनबुड़ुक, विश्वनाथ, नरेश आदि का कहना था कि अमौली बंधी लघु सिंचाई ने बनवाया था और यह वन क्षेत्र में है। बंधी सूख गई। उनके पास रहने के लिए घर आदि नहीं थे, इसलिए उन्होंने बंधी की जमीन पर कच्चा मकान बना लिया और अब यहीं बस गए हैं।
यह पूछने पर कि बारिश होने पर वे कहां जाते हैं तो उनका कहना था कि बंधी का कुछ हिस्सा ऐसा है जहां पानी नहीं भरता। इसलिए ऐसी जगहों पर घर बनाया गया है। उधर वाइल्ड लाइफ के वार्डेन ओमकार नाथ केसरवानी का कहना है कि बंधी और उसके आसपास का इलाका सेंचूरी एरिया में आता है। इसमें अवैध रूप से घर बनने की सूचना उन्हें नहीं मिली है। इसकी जांच कराई जाएगी और यदि सेंचूरी एरिया में घर बने होंगे तो कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सदर ब्लॉक के बघुआरी गांव के पास अमौली बंधी का निर्माण कराया गया था। यह सेंचूरी एरिया में है। इस बंधी से बघुआरी, तिलौली, अमौली, पापी, महुआर, सेमरा, निपराज आदि गांवों में सिंचाई होती थी। इसके लिए नहर भी बनाई गई, लेकिन नहरों की सफाई न होने से वे बेकार हो गई हैं। उसमें घास के साथ बेहया जम गया है। सूखे की मार के चलते बंधी भी पूरी तरह से सूख गई है। अब इस बंधी में खाली पड़ी जमीन पर आसपास के लोगों ने कब्जा जमा लिया है। लोगों ने कच्चे मकान तो बना लिए ही हैं, साथ ही खेती के लिए भी जमीनों पर अतिक्रमण कर लिया है। बंधी में दूर-दूर घर बने हैं। यहां अतिक्रमण कर घर बनाने वाले घुरफेक्कन, सोनिया, मोहन, बेचन, तनबुड़ुक, विश्वनाथ, नरेश आदि का कहना था कि अमौली बंधी लघु सिंचाई ने बनवाया था और यह वन क्षेत्र में है। बंधी सूख गई। उनके पास रहने के लिए घर आदि नहीं थे, इसलिए उन्होंने बंधी की जमीन पर कच्चा मकान बना लिया और अब यहीं बस गए हैं।
विज्ञापन
यह पूछने पर कि बारिश होने पर वे कहां जाते हैं तो उनका कहना था कि बंधी का कुछ हिस्सा ऐसा है जहां पानी नहीं भरता। इसलिए ऐसी जगहों पर घर बनाया गया है। उधर वाइल्ड लाइफ के वार्डेन ओमकार नाथ केसरवानी का कहना है कि बंधी और उसके आसपास का इलाका सेंचूरी एरिया में आता है। इसमें अवैध रूप से घर बनने की सूचना उन्हें नहीं मिली है। इसकी जांच कराई जाएगी और यदि सेंचूरी एरिया में घर बने होंगे तो कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन