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Sonebhadra News: अदालत में अपने बयान पर कायम नहीं रहे गवाह
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सोनभद्र। पिपरी थाना क्षेत्र में करीब 25 साल पहले हुई हत्या के मामले में गोसाईगंज के पूर्व विधायक व बाहुबली इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी को सोनभद्र के एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिए गए हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष पूर्व विधायक पर लगे आरोपों की पुष्टि के संबंध में कोई मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका और न ही यह स्पष्ट कर सका कि आरोपी के पास वारदात को अंजाम देने का कोई कारण है।
पिपरी थाना क्षेत्र में 3 जून 1997 में व्यापारी पवन शर्मा की हत्या तुर्रा इलाके में हुई थी। मामले में मृतक के पिता अमीचंद शर्मा ने पिपरी थाने में बाहुबली पूर्व विधायक खब्बू तिवारी व उनके दो साथी रवि सिंह और मुन्ना सिंह पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि तुर्रा पेट्रोल पंप के पास टाटा सूमो सवार तीन लोगों ने उसके बेटे को अपने पास बुलाया। वहां विवाद के बाद रवि सिंह व इंद्र प्रताप तिवारी ने पवन का हाथ पकड़ लिया और मुन्ना सिंह ने अपने राइफल से पवन को गोली मार दी। पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की और चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत किया गया, लेकिन विवेचना के दौरान न तो हत्या में प्रयुक्त असलहे की बरामदगी हुई और न ही आरोपियों के पास से टाटा सूमो मिला। जिस सूमो का प्रयोग हत्या में हाेने की बात बताई गई उसे जौनपुर-सुल्तानपुर बार्डर से चोरी किए जाने का उल्लेख था, जबकि सूमो चोपन थाने में लावारिस हाल में मिली थी। विवेचक ने उसके मालिक के बारे में कोई जानकारी नहीं जुटाई।
विवेचना के दौरान इन कमियों को आधार बनाकर बचाव पक्ष ने मजबूती से अपनी बात रखी और यह दावा किया कि पवन कुमार की हत्या में पूर्व विधायक खब्बू तिवारी व अन्य आरोपियों की कोई संलिप्तता नहीं थी। इन तर्कों व साक्ष्यों के अभाव में एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश खलीकुज्जमा ने आरोपी पूर्व विधायक को दोषमुक्त करार दिया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता धर्मेंद्र दुबे व विकास शुक्ला ने पैरवी की।
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पिपरी थाना क्षेत्र में 3 जून 1997 में व्यापारी पवन शर्मा की हत्या तुर्रा इलाके में हुई थी। मामले में मृतक के पिता अमीचंद शर्मा ने पिपरी थाने में बाहुबली पूर्व विधायक खब्बू तिवारी व उनके दो साथी रवि सिंह और मुन्ना सिंह पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि तुर्रा पेट्रोल पंप के पास टाटा सूमो सवार तीन लोगों ने उसके बेटे को अपने पास बुलाया। वहां विवाद के बाद रवि सिंह व इंद्र प्रताप तिवारी ने पवन का हाथ पकड़ लिया और मुन्ना सिंह ने अपने राइफल से पवन को गोली मार दी। पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की और चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत किया गया, लेकिन विवेचना के दौरान न तो हत्या में प्रयुक्त असलहे की बरामदगी हुई और न ही आरोपियों के पास से टाटा सूमो मिला। जिस सूमो का प्रयोग हत्या में हाेने की बात बताई गई उसे जौनपुर-सुल्तानपुर बार्डर से चोरी किए जाने का उल्लेख था, जबकि सूमो चोपन थाने में लावारिस हाल में मिली थी। विवेचक ने उसके मालिक के बारे में कोई जानकारी नहीं जुटाई।
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विवेचना के दौरान इन कमियों को आधार बनाकर बचाव पक्ष ने मजबूती से अपनी बात रखी और यह दावा किया कि पवन कुमार की हत्या में पूर्व विधायक खब्बू तिवारी व अन्य आरोपियों की कोई संलिप्तता नहीं थी। इन तर्कों व साक्ष्यों के अभाव में एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश खलीकुज्जमा ने आरोपी पूर्व विधायक को दोषमुक्त करार दिया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता धर्मेंद्र दुबे व विकास शुक्ला ने पैरवी की।
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