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Sonebhadra News: अमेठी-रायबरेली से कम नहीं पूर्वांचल की रॉबर्ट्सगंज सीट का सस्पेंस

Sat, 04 May 2024 10:44 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 04 May 2024 10:44 PM IST
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The suspense of Robertsganj seat of Purvanchal
सोनभद्र। प्रत्याशी को लेकर जैसा सस्पेंस अमेठी, रायबरेली और कैसरगंज में था, ठीक वैसे ही हालात पूर्वांचल की रॉबर्ट्सगंज सीट पर भी है। फर्क यही है कि यहां कोई वीआईपी नहीं है। सातवें चरण का नामांकन शुरू होने में अब 48 घंटे शेष रह गए हैं, मगर अब तक यहां की सियासी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। न तो सत्ताधारी गठबंधन ने उम्मीदवार की घोषणा की है और न ही विपक्षी गठबंधन की ओर से ही प्रत्याशी तय हुआ है। दोनों ही प्रमुख खेमे में प्रत्याशी को लेकर सियासी रणनीतिकार भी हैरान हैं। लोग नामों पर सिर्फ कयासबाजी ही कर रहे हैं।
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यूपी की अंतिम लोकसभा सीट रॉबर्ट्सगंज अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। मौजूदा समय यहां अपना दल-एस के पकौड़ी लाल कोल सांसद हैं। भाजपा के साथ गठबंधन में अपना दल-एस को प्रदेश में जो दो सीटें मिली हैं, उसमें राॅबर्ट्सगंज भी एक है। पार्टी अब तक तय नहीं कर पाई है कि इस सीट पर वह किसे उतारे।
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पार्टी का एक धड़ा पकौड़ी लाल कोल को ही दोबारा मौका देने पर जोर दे रहा है, मगर दूसरा खेमा नए चेहरे पर दांव लगाने की पैरवी कर रहा है। इसके पीछे पिछले साल वायरल ऑडियो के कारण एक खास वर्ग की नाराजगी को कारण बताया जा रहा है।
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दूसरी ओर इंडी गठबंधन की ओर से सपा के खाते में सीट है। सपा में टिकट के कई दावेदार हैं, लेकिन जातिगत समीकरणों के लिहाज से सभी पहलुओं को टटोलने के बाद पार्टी ऊहापोह में है। वह पहले अपना दल-एस से दावेदार तय होने का इंतजार कर रही है, ताकि कई सीटों की तरह उसे यहां भी प्रत्याशी बदलने की नौबत न आए। इसके चलते अब तक दोनाें ही दलों में प्रत्याशी का चेहरा साफ नहीं हो पाया है। इस सीट पर अब तक बसपा ने ही उम्मीदवार उतारा है। नामांकन की तिथि नजदीक आने के बाद भी मुख्य दलों में छाए सन्नाटे से चुनावी माहौल जोर नहीं पकड़ पा रहा।
प्रत्याशियों के लिए मुश्किल होगा हर दर तक पहुंचना
रॉबर्ट्सगंज भौगोलिक रूप से यूपी का सबसे बड़ा लोकसभा क्षेत्र है। बिहार, झारखंड, मप्र और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से सटे इस सीट के एक छोर से दूसरे छोर की दूरी करीब ढाई सौ किमी है। कई गांवों की बसावट इतनी दुरुह है कि वहां तक पहुंचने में तीन-चार घंटे लग जाते हैं। सात मई से नामांकन शुरू होगा और 30 मई को प्रचार का अंतिम दिन है। आचार संहिता को लेकर भी चुनाव प्रचार में कई पाबंदियां हैं। ऐसे में प्रत्याशियों के लिए हर मतदाता तो दूर, हर गांव तक पहुंचना भी मुश्किल है। संभव है, ऐसे बहुत से मतदाता होंगे, जिन्हें प्रत्याशी को जाने-समझे और देखे बगैर वोट देना होगा।

प्रत्याशी चयन को लेकर शीर्ष स्तर पर लगातार चर्चा चल रही है। दोनों ही सीटों पर कोई नाम घोषित नहीं हुआ है। पार्टी के सिंबल को ही अपना प्रत्याशी मानकर कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। नामांकन से पहले ही नेतृत्व प्रत्याशी घोषित कर देगा। -सत्यनारायण पटेल, जिलाध्यक्ष, अपना दल-एस।
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