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खाता होगा भारी, जेखाता होगा भारी, जेब रहेगी खालीब रहेगी खाली
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Wed, 30 Nov 2016 11:54 PM IST
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नोट बंदी के बाद से उपजे हालात से निपटने के लिए बैंक कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। इस बीच दिसंबर महीने के वेतन का समय आ गया। पहले ही करेंसी की कमी से कई बार लोगों को बैंकों से लौटा दिया गया। ऐसे में बैंक सरकारी कर्मचारियों और अन्य वेतनभोगियों को भुगतान कहां से करेंगे। नोटबंदी के तकरीबन एक माह बाद भी हालात सामान्य नहीं हो सके हैं।
एक अनुमान के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की देय राशि ही जनपद में तकरीबन 60 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है। ऐसे में बैंकों के सामने यह मुश्किल है कि यह राशि आएगी कहां से। वरिष्ठ कोषाधिकारी मदन गोपाल कसेरा ने बताया कि जिले में प्रतिमाह औसतन करीब 45 करोड़ रुपये वेतन और 15 करोड़ रुपये से अधिक की पेंशन बांटी जाती है।जिले में विभिन्न विभागों के सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। उनके वेतन के साथ ही लाखों लोगों को विभिन्न तरह के पेंशन दिए जाते हैं।
हर माह की पहली तारीख को उनके खाते में वेतन और पेंशन की धनराशि भेज दी जाती है। लेकिन इस बार यह पैसा कैसे निकलेगा, इसको लेकर सरकारी कर्मचारी परेशान हैं। क्यों कि नोटबंदी के चलते लोगों ने पुराने नोट जमा कर दिये और नई करेंसी आई नहीं। बता दें कि स्वास्थ्य विभाग में करीब सवा करोड़ रुपये वेतन पर दिये जाता है। इसी तरह विधवा व विकलांग पेंशन पर प्रतिमाह 88 लाख 53 हजार रुपये खर्च होते हैं। पुलिस महकमे में ढाई करोड़ वेतन बंटता है। पुलिस के करीब 291 रंगरूट हैं। वेतन के सहारे ही इनका मेस से लेकर अन्य खर्च चलता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वभाविक है कि रंगरूट कानून व्यवस्था देखेंगे या बैंकों पर कतार लगाएंगे।
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इसी तरह अन्य विभागों में भी प्रतिमाह करोड़ों रुपये वेतन में बंटता है। लीड बैंक के मैनेजर करूणेश कुलश्रेष्ठ कहते हैं कि माह की पहली तारीख से नौकरीपेेशा के लोग बैंकों में धन निकालने के लिए पहुंचने लगते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए बैंककर्मियों को जो उनके पास करेंसी है उसी में से सभी को भुगतान करने का निर्देश दिया गया है। आरबीआई से करेंसी आने के बाद ऐसे लोगों को जरूरत के अनुसार भुगतान किया जाएगा। बताया कि सरकार ने हेलीकाप्टर और जहाज से जिलों में नोट भेजने की बात कहीं है, लेकिन अभी तक उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
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एक अनुमान के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की देय राशि ही जनपद में तकरीबन 60 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है। ऐसे में बैंकों के सामने यह मुश्किल है कि यह राशि आएगी कहां से। वरिष्ठ कोषाधिकारी मदन गोपाल कसेरा ने बताया कि जिले में प्रतिमाह औसतन करीब 45 करोड़ रुपये वेतन और 15 करोड़ रुपये से अधिक की पेंशन बांटी जाती है।जिले में विभिन्न विभागों के सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। उनके वेतन के साथ ही लाखों लोगों को विभिन्न तरह के पेंशन दिए जाते हैं।
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हर माह की पहली तारीख को उनके खाते में वेतन और पेंशन की धनराशि भेज दी जाती है। लेकिन इस बार यह पैसा कैसे निकलेगा, इसको लेकर सरकारी कर्मचारी परेशान हैं। क्यों कि नोटबंदी के चलते लोगों ने पुराने नोट जमा कर दिये और नई करेंसी आई नहीं। बता दें कि स्वास्थ्य विभाग में करीब सवा करोड़ रुपये वेतन पर दिये जाता है। इसी तरह विधवा व विकलांग पेंशन पर प्रतिमाह 88 लाख 53 हजार रुपये खर्च होते हैं। पुलिस महकमे में ढाई करोड़ वेतन बंटता है। पुलिस के करीब 291 रंगरूट हैं। वेतन के सहारे ही इनका मेस से लेकर अन्य खर्च चलता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वभाविक है कि रंगरूट कानून व्यवस्था देखेंगे या बैंकों पर कतार लगाएंगे।
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इसी तरह अन्य विभागों में भी प्रतिमाह करोड़ों रुपये वेतन में बंटता है। लीड बैंक के मैनेजर करूणेश कुलश्रेष्ठ कहते हैं कि माह की पहली तारीख से नौकरीपेेशा के लोग बैंकों में धन निकालने के लिए पहुंचने लगते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए बैंककर्मियों को जो उनके पास करेंसी है उसी में से सभी को भुगतान करने का निर्देश दिया गया है। आरबीआई से करेंसी आने के बाद ऐसे लोगों को जरूरत के अनुसार भुगतान किया जाएगा। बताया कि सरकार ने हेलीकाप्टर और जहाज से जिलों में नोट भेजने की बात कहीं है, लेकिन अभी तक उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है।