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रिहंद बांध के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी
ब्यूरो, अमर उजाला/ सोनभद्र
Updated Mon, 01 Aug 2016 11:50 PM IST
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रिहंद बांध के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी
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जिले में अच्छी बारिश के बावजूद एशिया के विशालतम जलाशयों में एक रिहंद डैम का जलस्तर बढ़ने की गति पूर्व के वर्षों के मुकाबले धीमी बनी हुई है। हालांकि रिहंद डैम का जलस्तर सोमवार को 842.6 फीट तक जा पहुंचा है, जो न्यूनतम जलस्तर से 12.6 फीट अधिक है। वहीं पिछले वर्ष के 848 फीट के मुकाबले यह 5.4 फीट कम है।चार सौ वर्गमील कैचमेंट एरिया वाले इस जलाशय की अधिकतम क्षमता 880 और न्यूनतम 830 फीट है। इस हिसाब से अभी इस जलाशय को 37 फीट से अधिक पानी की जरूरत है।
इस जलाशय से बिजली परियोजनाओं, उनके रहवासी परिसरों, एशिया के सबसे बड़ी अल्युमीनियम फैक्ट्री हिण्डाल्को रेणुकूट सहित अन्य तटवर्ती परियोजनाओं के पानी की जरूरत की पूर्ति होती है। ओबरा डैम ओर परियोजना दोनों के पानी की जरूरत के साथ रिहंद और ओबरा पन बिजली का संचालन इसी जलाशय के पानी पर निर्भर है। बिहार के इंद्रपुरी बैराज को सिंचाई की जरूरत के समय भी पानी जलाशय से उपलब्ध कराया जाता है।
इसको देखते हुए रिहंद में बारिश के समय पर्याप्त जलस्तर की जरूरत समझी जाती है लेकिन इस बार अभी तक जिस हिसाब से जलस्तर में बढ़ोतरी होनी चाहिए, वह नहीं हो पाई है। उधर, अधीक्षण अभियंता रिहंद शैलेष सिंह भी इसे स्वीकारते हैं।उन्होंने बताया कि इस समय रोजाना तीन से चार फीट पानी बढ़ना चाहिए लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की डैम वाली एरिया में अभी बारिश कम हो रही है। हालांकि बारिश का सिलसिला बना है, इससे आगे चलकर जलस्तर का आंकड़ा पर्याप्त होने की पूरी उम्मीद है।
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इस जलाशय से बिजली परियोजनाओं, उनके रहवासी परिसरों, एशिया के सबसे बड़ी अल्युमीनियम फैक्ट्री हिण्डाल्को रेणुकूट सहित अन्य तटवर्ती परियोजनाओं के पानी की जरूरत की पूर्ति होती है। ओबरा डैम ओर परियोजना दोनों के पानी की जरूरत के साथ रिहंद और ओबरा पन बिजली का संचालन इसी जलाशय के पानी पर निर्भर है। बिहार के इंद्रपुरी बैराज को सिंचाई की जरूरत के समय भी पानी जलाशय से उपलब्ध कराया जाता है।
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इसको देखते हुए रिहंद में बारिश के समय पर्याप्त जलस्तर की जरूरत समझी जाती है लेकिन इस बार अभी तक जिस हिसाब से जलस्तर में बढ़ोतरी होनी चाहिए, वह नहीं हो पाई है। उधर, अधीक्षण अभियंता रिहंद शैलेष सिंह भी इसे स्वीकारते हैं।उन्होंने बताया कि इस समय रोजाना तीन से चार फीट पानी बढ़ना चाहिए लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की डैम वाली एरिया में अभी बारिश कम हो रही है। हालांकि बारिश का सिलसिला बना है, इससे आगे चलकर जलस्तर का आंकड़ा पर्याप्त होने की पूरी उम्मीद है।
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