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बिना डॉक्टर के ही चल रहा था अस्पताल, अफसरों ने जड़ा ताला

Thu, 15 Sep 2022 11:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 15 Sep 2022 11:54 PM IST
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The hospital was running without a doctor, the officers locked
राबर्ट्सगंज स्थित एक निजि अस्पताल की जांच करते एसडीएम रमेश कुमार और स्वास्थ्य विभाग की टीम। - फोटो : SONBHADRA
सदर एसडीएम के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को प्रशासनिक टीम ने नगर के दो अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान एक अस्पताल में बिना डॉक्टर ही मरीजों का उपचार होता मिला। अस्पताल में तीन महिलाएं भर्ती थीं, जबकि कोई डॉक्टर्र नहीं था। कई अन्य खामियां भी सामने आईं। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए एसडीएम ने अस्पताल को सील करा दिया है। संचालक को तीन दिनों में दस्तावेज उपलब्ध कराने की मोहलत दी है।
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सदर एसडीएम रमेश कुमार और निजी अस्पतालों के पंजीयन प्रभारी डॉ. रामकुंवर ने नगर के चंडी तिराहा स्थित श्वेता हास्पिटल एंड ट्रामा सेंटर का औचक निरीक्षण किया। अस्पताल में तीन महिलाएं भर्ती मिलीं। भर्ती शिवकुमारी देवी व सावित्री देवी का ऑपरेशन से प्रसव हुआ था। वहीं तीसरी मरीज सीमा देवी नौ महीने की गर्भवती थी। वह गंभीर एनीमिया से ग्रसित थी। महिला में हीमोग्लोबिन का स्तर महज सात ग्राम था। उसकी हालत गंभीर थी।
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तीन गंभीर मरीज भर्ती होने के बाद भी अस्पताल में किसी डॉक्टर के न होने पर जांच अधिकारियों ने हैरानी जताई। मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ की गई तो बताया कि डॉक्टर बाहर गए हैं। बोर्ड में लिखे नाम में से एक भी डॉक्टर का अस्पताल में पता नहीं था। बिना चिकित्सक के ही गंभीर मरीजों को भर्ती करने को बड़ी लापरवाही मानते हुए एसडीएम ने अस्पताल को सील करा दिया।
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संचालक को तीन दिनों में पंजीयन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। भर्ती तीनों मरीजों को जिला संयुक्त अस्पताल की मातृ-शिशु इकाई में शिफ्ट कराया गया। उधर, टीम ने बनारस पॉली क्लीनिक का भी निरीक्षण किया। वहां कोई भी मरीज ओपीडी या आईपीडी में नहीं पाया गया। अस्पताल से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की हिदायत दी गई। औचक जांच से निजी अस्पताल संचालकों में खलबली मची रही।
आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध है अस्पताल
निजी अस्पताल के निरीक्षण के दौरान वहां की स्थिति देख जांच टीम भौचक थी। तमाम खामियों के बावजूद अस्पताल पर आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध होने का उल्लेख था। बिना डॉक्टर चल रहे अस्पताल को आयुष्मान योजना के तहत कैसे सूचीबद्ध किया गया, इसे लेकर लोग एक-दूसरे का मुंह ताकते रहे। फिलहाल जांच अफसर इस बारे में कुछ भी कहने से बचते रहे। उनका कहना था कि अभिलेख देखने के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा।

मानक के विपरीत निजी अस्पतालों के संचालन की शिकायतों पर औचक निरीक्षण किया गया। इसमें श्वेता अस्पताल एंड ट्रामा सेंटर में तीन मरीज भर्ती पाए गए, जबकि वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। तैनात कर्मचारी भी समुचित जवाब नहीं दे सके। लिहाजा अस्पताल को सील करते हुए दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। - रमेश कुमार, एसडीएम सदर।
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