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Sonebhadra News: ज्येष्ठ खान अधिकारी के खिलाफ दर्ज मामले की दोबारा होगी विवेचना
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सोनभद्र। दलित उत्पीड़न के मामले में ज्येष्ठ खान अधिकारी शैलेंद्र सिंह को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही। चोपन पुलिस की ओर से भेजी गई अंतिम रिपोर्ट अदालत ने खारिज कर दी है। मामले में सीओ को पीड़ित की तरफ से कोर्ट में दाखिल प्रार्थना पत्र में दिए गए तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की विवेचना का आदेश दिया है।
चोपन थाना क्षेत्र के मारकुंडी बीड़ी गोदाम के सामने टायर पंचर की दुकान चलाने वाले अशोक पासवान ने आरोप लगाया था कि गत तीन फरवरी को उनके यहां एक ट्रक चालक पंचर टायर बनवाने आया। उसी दौरान ज्येष्ठ खान अधिकारी गार्ड-चालक के साथ वाहन से पहुंचे और उसे पैर से मारते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया।
मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप पर चोपन पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की और आरोपों को झूठा बताते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। इस पर कोर्ट से वादी को नोटिस भेजा गया। पीड़ित ने प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल कर पुलिस रिपोर्ट को गलत बताया। दावा किया कि उस पर लगातार सुलह के लिए दबाव बनाया गया। बगैर गवाहों का बयान दर्ज किए और कुछ लोगों का बनावटी बयान दर्ज कर रिपोर्ट दाखिल की गई है।
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दो दिन पहले विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी आबिद शमीम की अदालत ने मामले की सुनवाई की। पाया कि पीड़ित की तरफ से वर्णित तथ्यों और केस डायरी के अवलोकन से मामले में आगे की विवेचना की जरूरत है। कोर्ट संबंधित सीओ को आदेश दिया कि प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र में वर्णित कथनों के आधार पर अग्रिम विवेचना कर अवगत कराएं।
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चोपन थाना क्षेत्र के मारकुंडी बीड़ी गोदाम के सामने टायर पंचर की दुकान चलाने वाले अशोक पासवान ने आरोप लगाया था कि गत तीन फरवरी को उनके यहां एक ट्रक चालक पंचर टायर बनवाने आया। उसी दौरान ज्येष्ठ खान अधिकारी गार्ड-चालक के साथ वाहन से पहुंचे और उसे पैर से मारते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया।
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मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप पर चोपन पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की और आरोपों को झूठा बताते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। इस पर कोर्ट से वादी को नोटिस भेजा गया। पीड़ित ने प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल कर पुलिस रिपोर्ट को गलत बताया। दावा किया कि उस पर लगातार सुलह के लिए दबाव बनाया गया। बगैर गवाहों का बयान दर्ज किए और कुछ लोगों का बनावटी बयान दर्ज कर रिपोर्ट दाखिल की गई है।
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दो दिन पहले विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी आबिद शमीम की अदालत ने मामले की सुनवाई की। पाया कि पीड़ित की तरफ से वर्णित तथ्यों और केस डायरी के अवलोकन से मामले में आगे की विवेचना की जरूरत है। कोर्ट संबंधित सीओ को आदेश दिया कि प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र में वर्णित कथनों के आधार पर अग्रिम विवेचना कर अवगत कराएं।