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आंतक का पर्याय बने हाथियों के झुण्ड को टीम ने छत्तीसगढ़ की सीमा में खदेड़ा
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बीजपुर। वन विभाग के कड़े प्रयास के बाद आखिरकार शनिवार की रात क्षेत्र में आतंक मचा रहे हाथियों के झुंड से ग्रामीणों को राहत मिल ही गई।
वन विभाग की टीम ने जंगली हाथियों के झुंड को पर्वतवा से खदेड़ कर नेमना के रास्ते कोडार के जंगलों से होते हुए छतीसगढ़ सीमा के नजदीक छोड़ दिया। 25 किलोमीटर चलने के बाद हाथियों का झुंड कोडार के जंगलों में छतीसगढ़ की सीमा से मात्र 500 मीटर पहले बैठ गया जहां पूरे दिन वन विभाग की टीम गश्त करती रही। वन विभाग के डिप्टी रेंजर पंकज सिंह ने बताया कि रात में हाथियों के झुंड को अपने यथास्थान छत्तीसगढ़ के जंगलों में भेज दिया जाएगा। हाथियों के झुंड के वापस चले जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बताते चले कि विगत दो माह पहले छत्तीसगढ़ के जंगलों से भटक कर आये हाथियों के झुंड ने जरहा, बभनी सहित म्योरपुर वन रेंज में ग्रामीणों की फसल के साथ घरो को काफी नुकसान पहुंचाया था। वही बभनी में एक युवक को कुचल कर मार डाला था। दो महीने पहले आये हाथियों की संख्या लगभग 15 से 20 के आसपास बतायी जा रही थी लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि झुंड में से कुछ हाथी बिछड़ कर छत्तीसगढ़ के जंगलों में वापस चले गए और एक हाथी के बच्चे की रिहंद जलाशय में डूब जाने से मौत हो गयी थी। वापस जाते वक्त हाथियों की संख्या 12 बतायी जा रही है। जरहा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी दिनेश ने बताया कि हाथियों का झुंड छत्तीसगढ़ की सीमा के बिल्कुल करीब पहुंच गया है रात में लगभग 25 किलोमीटर चलने के बाद हाथी थक कर कोडार के जंगलों में बैठ गए शनिवार की रात में वन कर्मियों द्वारा झुंड को खदेड़ कर वापस छत्तीसगढ़ के जंगलों में भेज दिया जाएगा।
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वन विभाग की टीम ने जंगली हाथियों के झुंड को पर्वतवा से खदेड़ कर नेमना के रास्ते कोडार के जंगलों से होते हुए छतीसगढ़ सीमा के नजदीक छोड़ दिया। 25 किलोमीटर चलने के बाद हाथियों का झुंड कोडार के जंगलों में छतीसगढ़ की सीमा से मात्र 500 मीटर पहले बैठ गया जहां पूरे दिन वन विभाग की टीम गश्त करती रही। वन विभाग के डिप्टी रेंजर पंकज सिंह ने बताया कि रात में हाथियों के झुंड को अपने यथास्थान छत्तीसगढ़ के जंगलों में भेज दिया जाएगा। हाथियों के झुंड के वापस चले जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बताते चले कि विगत दो माह पहले छत्तीसगढ़ के जंगलों से भटक कर आये हाथियों के झुंड ने जरहा, बभनी सहित म्योरपुर वन रेंज में ग्रामीणों की फसल के साथ घरो को काफी नुकसान पहुंचाया था। वही बभनी में एक युवक को कुचल कर मार डाला था। दो महीने पहले आये हाथियों की संख्या लगभग 15 से 20 के आसपास बतायी जा रही थी लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि झुंड में से कुछ हाथी बिछड़ कर छत्तीसगढ़ के जंगलों में वापस चले गए और एक हाथी के बच्चे की रिहंद जलाशय में डूब जाने से मौत हो गयी थी। वापस जाते वक्त हाथियों की संख्या 12 बतायी जा रही है। जरहा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी दिनेश ने बताया कि हाथियों का झुंड छत्तीसगढ़ की सीमा के बिल्कुल करीब पहुंच गया है रात में लगभग 25 किलोमीटर चलने के बाद हाथी थक कर कोडार के जंगलों में बैठ गए शनिवार की रात में वन कर्मियों द्वारा झुंड को खदेड़ कर वापस छत्तीसगढ़ के जंगलों में भेज दिया जाएगा।