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Sonebhadra News: कहीं बीएलओ को ढूंढ रहे ग्रामीण, कहीं मतदाता ही लापता
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रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक में छपका में मतदाता पुनरीक्षण करते बीएलओ।संवाद
सोनभद्र। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। अफसर-कर्मचारी दिन-रात एक कर पुनरीक्षण प्रक्रिया को पूरा करने में परेशान हैं तो मतदाता भी अपनी पहचान साबित करने में उलझे हुए हैं। वह कभी बूथ चक्कर लगा रहे हैं तो कभी बीएलओ को ढूंढ रहे हैं। दूसरी ओर बीएलओ भी मतदाताओं को खेत-खलिहान और दुकानों में तलाशते फिर रहे हैं। समय से लक्ष्य पूरा करने के दबाव में उनके सारे काम छूट गए हैं।
मतदाता सूची की वर्ष 2003 से मैपिंग कराकर पोर्टल पर अपलोड करने (डिजिटाइजेशन) के लिए जिले में 27 नवंबर तक की समय सीमा तय की गई थी। समय सीमा में काम पूरा कराने के लिए बीएलओ की मदद में सभी शिक्षक-कर्मचारियों को भी लगाया गया है। जिला स्तर के अधिकारी भी विभागीय कार्यों से पहले एसआईआर को पूरा कराने में लगे हैं। लगातार भ्रमण, निरीक्षण जारी है। बावजूद लक्ष्य अभी काफी दूर है।
सुस्ती के पीछे बड़ी वजह सर्वर की सुस्ती तो मतदाताओं की बेरुखी को बताई जा रही है। जिले के कई इलाके ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क ही नहीं है। चोपन, म्योरपुर, नगवां, कोन, घोरावल ब्लॉक के नेटवर्क विहीन गांवों में गणना प्रपत्र को अपलोड करने में फजीहत हो रही है। बिखरे टोले वाले गांवों तक बीएलओ को पहुंचने और फॉर्म भरवाने में चुनौती बनी हुई है। नगरीय इलाकों में भी समस्याएं कम नहीं हैं।
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केस एक::
अभी धान काट रहे हैं, आएंगे तो फॉर्म भरेंगे
रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के छपका बूथ पर गणना प्रपत्र भरवाने में चुनौती बनी हुई है। बीएलओ की मदद के लिए प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों, अनुदेशकों को लगाया गया है। बृहस्पतिवार को सभी इसी कार्य में तल्लीन रहे। तमाम मतदाताओं की ओर से गणना प्रपत्र अभी तक भरकर वापस नहीं किया गया है। बीएलओ ने संपर्क किया तो बताया गया कि अभी धान की कटाई चल रही है। इसके बाद घर लौटेंगे तब फॉर्म भरेंगे। बढ़ौली बूथ पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। पसियान मोहाल के बीएलओ ने बताया कि पता बदलने से दिक्कत आ रही है। वार्ड बदलने के कारण मतदाताओं को ढूंढना पड़ रहा है।
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केस दो::
मायके से नहीं मिल रहा महिलाओं का पता
मतदाता सूची में उन महिलाओं के मैपिंग में दिक्कत आ रही है, जो दूसरे राज्यों से शादी कर यूपी आई हैं। यहां एसआईआर जोरों पर है, जबकि दूसरे राज्यों में इसे लेकर कोई उत्साह नहीं है। ऐसे में महिलाओं के माता-पिता का वर्ष 2003 की सूची में नाम ढूंढने में वक्त लग रहा है। न्यू काॅलोनी बूथ पर मिले बीएलओ शिवशंकर ने बताया कि गणना प्रपत्र काफी पहले ही दिया जा चुका है। अब वापस लेने जा रहे हैं तो पला चल रहा कि अभी भरा ही नहीं गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत महिला मतदाताओं की है। पूरब मोहाल की बीएलओ सरोजा देवी ने भी ऐसी समस्या बताई। सहिजन वार्ड के बूथ पर फॉर्म अपलोड करने में जुटे बीएलओ का कहना था कि नेटवर्क सुस्त रहने से कई बार 5-10 मिनट लग जा रहा है। यहां एक हजार में सिर्फ 350 मतदाताओं का फॉर्म भरा जा सका था।
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गणना प्रपत्र न देने पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट सकता है नाम
सोनभद्र। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया तेजी से जारी है। डीएम बीएन सिंह ने बताया कि 4 नवंबर से 30 नवंबर तक बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण, एकत्रीकरण और डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा करें। प्रत्येक मतदाता को दो प्रतियों में फॉर्म उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे भरकर बीएलओ को देना अनिवार्य है। स्पष्ट किया कि गणना प्रपत्र के साथ किसी भी प्रकार के दस्तावेज लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मतदाता अपना फॉर्म बीएलओ को उपलब्ध नहीं कराता है तो उसका नाम 9 दिसंबर को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट निर्वाचक नामावली में शामिल नहीं होगा।
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सिर्फ 45.9 फीसदी हुआ डिजिटाइजेशन, ओबरा सबसे पीछे
सोनभद्र। मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम में ओबरा विधानसभा सबसे पीछे चल रहा है। बृहस्पतिवार की शाम तक यहां सिर्फ 36 फीसदी डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा हो पाया था, जबकि प्रशासन की ओर से कार्य पूर्ण करने के लिए 27 नवंबर तक की अंतिम तिथि तय की गई थी। वहीं रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र 53 फीसदी कार्य के साथ सबसे आगे रहा। हालांकि कार्य पूरा करने के लिए समय सीमा बढ़ाई गई है।
एसआईआर के तहत 4 नवंबर से ही कार्य शुरू है। पहले चरण में 04 दिसंबर तक मतदाताओं से गणना प्रपत्र पर पूरी जानकारी भरकर जमा कराना है। इसी अवधि में उसे पोर्टल पर अपलोड भी करना है। स्थानीय चुनौतियों व बीएलओ की सुस्ती के कारण जिला प्रशासन ने 27 नवंबर तक शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा था। इसके लिए कई दिन से डीएम, एसडीएम सहित जिले के सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी पूरा जोर लगाए हुए हैं। तमाम जद्दोजहद के बाद भी बृहस्पतिवार की शाम तक सिर्फ 45 फीसदी कार्य ही पूरा हो पाया है। इसमें भी ओबरा विधानसभा क्षेत्र सबसे पीछे रह गया है।
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मतदाता सूची की वर्ष 2003 से मैपिंग कराकर पोर्टल पर अपलोड करने (डिजिटाइजेशन) के लिए जिले में 27 नवंबर तक की समय सीमा तय की गई थी। समय सीमा में काम पूरा कराने के लिए बीएलओ की मदद में सभी शिक्षक-कर्मचारियों को भी लगाया गया है। जिला स्तर के अधिकारी भी विभागीय कार्यों से पहले एसआईआर को पूरा कराने में लगे हैं। लगातार भ्रमण, निरीक्षण जारी है। बावजूद लक्ष्य अभी काफी दूर है।
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सुस्ती के पीछे बड़ी वजह सर्वर की सुस्ती तो मतदाताओं की बेरुखी को बताई जा रही है। जिले के कई इलाके ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क ही नहीं है। चोपन, म्योरपुर, नगवां, कोन, घोरावल ब्लॉक के नेटवर्क विहीन गांवों में गणना प्रपत्र को अपलोड करने में फजीहत हो रही है। बिखरे टोले वाले गांवों तक बीएलओ को पहुंचने और फॉर्म भरवाने में चुनौती बनी हुई है। नगरीय इलाकों में भी समस्याएं कम नहीं हैं।
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केस एक::
अभी धान काट रहे हैं, आएंगे तो फॉर्म भरेंगे
रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के छपका बूथ पर गणना प्रपत्र भरवाने में चुनौती बनी हुई है। बीएलओ की मदद के लिए प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों, अनुदेशकों को लगाया गया है। बृहस्पतिवार को सभी इसी कार्य में तल्लीन रहे। तमाम मतदाताओं की ओर से गणना प्रपत्र अभी तक भरकर वापस नहीं किया गया है। बीएलओ ने संपर्क किया तो बताया गया कि अभी धान की कटाई चल रही है। इसके बाद घर लौटेंगे तब फॉर्म भरेंगे। बढ़ौली बूथ पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। पसियान मोहाल के बीएलओ ने बताया कि पता बदलने से दिक्कत आ रही है। वार्ड बदलने के कारण मतदाताओं को ढूंढना पड़ रहा है।
केस दो::
मायके से नहीं मिल रहा महिलाओं का पता
मतदाता सूची में उन महिलाओं के मैपिंग में दिक्कत आ रही है, जो दूसरे राज्यों से शादी कर यूपी आई हैं। यहां एसआईआर जोरों पर है, जबकि दूसरे राज्यों में इसे लेकर कोई उत्साह नहीं है। ऐसे में महिलाओं के माता-पिता का वर्ष 2003 की सूची में नाम ढूंढने में वक्त लग रहा है। न्यू काॅलोनी बूथ पर मिले बीएलओ शिवशंकर ने बताया कि गणना प्रपत्र काफी पहले ही दिया जा चुका है। अब वापस लेने जा रहे हैं तो पला चल रहा कि अभी भरा ही नहीं गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत महिला मतदाताओं की है। पूरब मोहाल की बीएलओ सरोजा देवी ने भी ऐसी समस्या बताई। सहिजन वार्ड के बूथ पर फॉर्म अपलोड करने में जुटे बीएलओ का कहना था कि नेटवर्क सुस्त रहने से कई बार 5-10 मिनट लग जा रहा है। यहां एक हजार में सिर्फ 350 मतदाताओं का फॉर्म भरा जा सका था।
गणना प्रपत्र न देने पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट सकता है नाम
सोनभद्र। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया तेजी से जारी है। डीएम बीएन सिंह ने बताया कि 4 नवंबर से 30 नवंबर तक बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण, एकत्रीकरण और डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा करें। प्रत्येक मतदाता को दो प्रतियों में फॉर्म उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे भरकर बीएलओ को देना अनिवार्य है। स्पष्ट किया कि गणना प्रपत्र के साथ किसी भी प्रकार के दस्तावेज लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मतदाता अपना फॉर्म बीएलओ को उपलब्ध नहीं कराता है तो उसका नाम 9 दिसंबर को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट निर्वाचक नामावली में शामिल नहीं होगा।
सिर्फ 45.9 फीसदी हुआ डिजिटाइजेशन, ओबरा सबसे पीछे
सोनभद्र। मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम में ओबरा विधानसभा सबसे पीछे चल रहा है। बृहस्पतिवार की शाम तक यहां सिर्फ 36 फीसदी डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा हो पाया था, जबकि प्रशासन की ओर से कार्य पूर्ण करने के लिए 27 नवंबर तक की अंतिम तिथि तय की गई थी। वहीं रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र 53 फीसदी कार्य के साथ सबसे आगे रहा। हालांकि कार्य पूरा करने के लिए समय सीमा बढ़ाई गई है।
एसआईआर के तहत 4 नवंबर से ही कार्य शुरू है। पहले चरण में 04 दिसंबर तक मतदाताओं से गणना प्रपत्र पर पूरी जानकारी भरकर जमा कराना है। इसी अवधि में उसे पोर्टल पर अपलोड भी करना है। स्थानीय चुनौतियों व बीएलओ की सुस्ती के कारण जिला प्रशासन ने 27 नवंबर तक शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा था। इसके लिए कई दिन से डीएम, एसडीएम सहित जिले के सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी पूरा जोर लगाए हुए हैं। तमाम जद्दोजहद के बाद भी बृहस्पतिवार की शाम तक सिर्फ 45 फीसदी कार्य ही पूरा हो पाया है। इसमें भी ओबरा विधानसभा क्षेत्र सबसे पीछे रह गया है।