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Sonebhadra News: 10 में से छह सीएचसी में हृदय रोग और स्त्री रोग के डॉक्टर नहीं

Tue, 02 Sep 2025 11:43 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 02 Sep 2025 11:43 PM IST
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Six out of 10 CHCs do not have cardiologists and gynecologists
सोनभद्र। जिले के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा है। 10 सीएचसी-पीएचसी पर सिर्फ 20 विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। छह सीएचसी पर स्त्री रोग और हृदय रोग का कोई डॉक्टर नहीं है। बाल रोग, हड्डी रोग, सर्जन जैसे ज्यादातर पद खाली हैं। ऐसे में मरीजों को जिला अस्पताल या वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। महिला मरीजों को इलाज और प्रसव के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ता है। रोज गंभीर हालत में 10-12 महिलाओं को रेफर किया जा रहा है।
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स्वास्थ्य सेवा के लिहाज से देश के अति पिछडे़ जिलों में शामिल सोनभद्र के ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का हाल खराब है। इसे बेहतर करने के लगातार दावे किए जा रहे हैं, मगर विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में सारी कवायद बेकार है। हाल यह है कि जिले के दस सीएचसी में से छह पर एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है। इससे गर्भवती और प्रसूता को सामान्य जांच के लिए भी कई किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में नियमित स्त्री रोग विशेषज्ञ के कुल 13 पद के सापेक्ष सिर्फ चार की ही तैनाती है। उन्हें तीन एफआरयू सेंटर घोरावल, चोपन, म्योरपुर पर तैनात किया गया है। एक चिकित्सक को सीएचसी दुद्धी पर तैनाती दी गई है। दूसरी ओर एनएचएम के तहत जिले में चार स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त हैं। इस तरह सीएचसी स्तर पर नियमित और संविदा के कुल 17 पदों के सापेक्ष महज चार स्त्री रोग विशेषज्ञ ही तैनात हैं।
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एफआरयू सेंटरों पर नहीं हैं बेहोशी के चिकित्सक
जिले में गर्भवती महिलाओं के उपचार और सिजेरियन प्रसव के लिए तीन फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) संचालित हैं। इसमें सिर्फ सीएचसी घोरावल में बेहोशी के चिकित्सक हैं। चोपन व म्योरपुर के एफआरयू और सीएचसी दुद्धी में स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद सिजेरियन प्रसव नहीं हो पाता। पूरे जिले में एनेस्थिसिया के 13 पदों पर सिर्फ एक की तैनाती है। वहीं, सर्जन के भी आठ पद रिक्त हैं। छोटे ऑपरेशन के लिए भी मरीज को रेफर कर दिया जाता है। दूरी की वजह से कई बार गर्भवती रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं।
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दम तोड़ रही जननी सुरक्षा योजना
सरकार की ओर से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना और जननी एवं बाल सुरक्षा योजना जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य मातृ-शिशु समुचित देखभाल और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।गर्भावस्था की शुरुआत से कई महिलाओं को बेहतर उपचार न मिलने से बाद में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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रेफरल हैं सीएचसी, इलाज के लिए 150 किमी तक का चक्कर
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले के अधिकांश सीएचसी रेफरल हैं। यहां से ओपीडी के साथ ही प्रसव जैसे मामलों में अधिकांंश गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए हायर सेंटर रेफर किया जाता है। जिले में बीजपुर, बभनी, नगवां, कोन, अनपरा सहित कई ऐसे इलाके हैं। जहां से गर्भवतियों को सौ से डेढ़ सौ किमी दूर जिला मुख्यालय आना पड़ता है। अस्पतालों में विशेषज्ञों की तैनाती न होने और मानव संसाधनों की भारी कमी के कारण मरीजों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।

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जिले में चिकित्सकों की स्थिति::
नियमित एमबीबीएस: 81
परामर्शदाता: 05
डेंटल: 09
मेडिकल ऑफिसर: 08
विशेषज्ञ चिकित्सक: 20
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वर्जन...
जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती को लेकर शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। जिले में चार स्थानों पर स्त्री रोग विशेषज्ञ मौजूद हैं। अन्य स्थानों पर तैनाती के लिए प्रयास किया जा रहा है। -डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।
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