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स्वरोजगार से जोड़कर मुसहर वर्ग को बनाएंगे स्वावलंबी
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सोनभद्र। जिले में मुसहर वर्ग के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए उनके आर्थिक विकास पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए जिले के 77 मुसहर बस्तियों के 1580 मुसहर परिवार को सीएसआर मद से दो-दो बकरियां दी जाएंगी। इस पर करीब एक करोड़ 55 लाख 80 हजार रुपए खर्च होंगे। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिये इस वर्ग के लोगों का समूह भी बनाया जा रहा है ताकि उन्हें रोजगार से जोड़कर स्वावलंबी बनाया जा सके।
जिले में मुसहरों की 77 बस्तियां हैं जिसमें 1580 परिवार हैं। जिला प्रशासन ने इन सभी परिवारों को एक जगह सामूहिक आवास बनाकर उन्हें रखने और सारी सुविधाएं देने का प्रयास किया था लेकिन मुसहर इसके लिए तैयार नहीं हुए। वे जहां रहते थे वहीं आवास की मांग कर रहे थे। प्रशासन की एक जगह उनके लिए आवास बनाने का प्लान निरस्त कर दिया लेकिन उनको स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक, सामाजिक उन्नति का प्रयास लगातार जारी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिये अब मुसहर परिवारों को स्वरोजगार से जोड़कर स्वावलंबी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बाबत आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक एमजी रवि ने बताया कि मुसहर परिवारों को बकरियां देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जिले में 1580 मुसहर परिवार हैं, हर परिवार को दो-दो बकरियां औद्योगिक कंपनियों के सीएसआर मद से दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रति बकरी पर पांच हजार रुपये खर्च होगा। इस तरह कुल एक करोड़ 55 लाख 80 हजार रुपये खर्च होगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही बकरियों की खरीद कर मुसहरों को पशुपालन के लिए दिया जाएगा।
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जिले में मुसहरों की 77 बस्तियां हैं जिसमें 1580 परिवार हैं। जिला प्रशासन ने इन सभी परिवारों को एक जगह सामूहिक आवास बनाकर उन्हें रखने और सारी सुविधाएं देने का प्रयास किया था लेकिन मुसहर इसके लिए तैयार नहीं हुए। वे जहां रहते थे वहीं आवास की मांग कर रहे थे। प्रशासन की एक जगह उनके लिए आवास बनाने का प्लान निरस्त कर दिया लेकिन उनको स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक, सामाजिक उन्नति का प्रयास लगातार जारी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिये अब मुसहर परिवारों को स्वरोजगार से जोड़कर स्वावलंबी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बाबत आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक एमजी रवि ने बताया कि मुसहर परिवारों को बकरियां देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जिले में 1580 मुसहर परिवार हैं, हर परिवार को दो-दो बकरियां औद्योगिक कंपनियों के सीएसआर मद से दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रति बकरी पर पांच हजार रुपये खर्च होगा। इस तरह कुल एक करोड़ 55 लाख 80 हजार रुपये खर्च होगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही बकरियों की खरीद कर मुसहरों को पशुपालन के लिए दिया जाएगा।
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